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Ambala News: लोन लेकर गिरवी रखी जमीन बेची, पिता-पुत्र को दो साल की कैद
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संवाद न्यूज एजेंसी
नारायणगढ़। बैंक के साथ धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने पिता-पुत्र को दो साल कैद की सजा सुनाई है। दोनों ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से खेती के लिए लाखों रुपये का लोन लिया था। इसके लिए गिरवी रखी जमीन को चुपचाप अन्य लोगों को बेच दिया। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी डॉ. जितेंद्र कुमार की अदालत ने आरोपी पिता-पुत्र को दोषी करार देते हुए दो-दो साल की साधारण कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। हालांकि, अदालत ने आरोपियों को आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश के आरोपों से बरी कर दिया। क्योंकि अभियोजन पक्ष इन धाराओं के तहत अपराध साबित करने में विफल रहा।
गांव कोड़वा खुर्द निवासी आरोपी भूपिंदर सिंह और उनके पिता बहादुर सिंह ने एसबीआई नारायणगढ़ से कृषि लोन लिया था। उन्होंने लोन की सुरक्षा के तौर पर अपनी 43 कनाल 16 मरला कृषि भूमि बैंक के पास गिरवी रखी थी। आरोप है कि कर्ज न चुकाने पर जब बैंक ने रिकॉर्ड की जांच की, तो पता चला कि आरोपियों ने बैंक को अंधेरे में रखकर वह जमीन कई अन्य लोगों को बेच दी थी। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने जानबूझकर राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर की। बैंक को रिकवरी से वंचित करने के लिए धोखाधड़ी की।
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नारायणगढ़। बैंक के साथ धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने पिता-पुत्र को दो साल कैद की सजा सुनाई है। दोनों ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से खेती के लिए लाखों रुपये का लोन लिया था। इसके लिए गिरवी रखी जमीन को चुपचाप अन्य लोगों को बेच दिया। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी डॉ. जितेंद्र कुमार की अदालत ने आरोपी पिता-पुत्र को दोषी करार देते हुए दो-दो साल की साधारण कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है। हालांकि, अदालत ने आरोपियों को आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश के आरोपों से बरी कर दिया। क्योंकि अभियोजन पक्ष इन धाराओं के तहत अपराध साबित करने में विफल रहा।
गांव कोड़वा खुर्द निवासी आरोपी भूपिंदर सिंह और उनके पिता बहादुर सिंह ने एसबीआई नारायणगढ़ से कृषि लोन लिया था। उन्होंने लोन की सुरक्षा के तौर पर अपनी 43 कनाल 16 मरला कृषि भूमि बैंक के पास गिरवी रखी थी। आरोप है कि कर्ज न चुकाने पर जब बैंक ने रिकॉर्ड की जांच की, तो पता चला कि आरोपियों ने बैंक को अंधेरे में रखकर वह जमीन कई अन्य लोगों को बेच दी थी। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने जानबूझकर राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर की। बैंक को रिकवरी से वंचित करने के लिए धोखाधड़ी की।

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