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विश्वासघात दिवस मना किसानों ने फिर बोला हल्ला
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किसान आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से किए गए वायदे पूरे नहीं करने का आरोप लगाते हुए किसानों ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही उपायुक्त कार्यालय के समीप पुतला फूंका। उन्होंने इस संबंध में उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रेषित किया।
भारतीय किसान यूनियन की ओर से किसान मलकीत सिंह ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा ने जिन मांगों पर सहमति बनने पर अपना आंदोलन स्थगित किया था। उनमें से एक भी मांग को केंद्र सरकार की ओर से अभी तक पूरा नहीं किया गया है। इसमें आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश व अन्य राज्यों में किसानों पर दर्ज मुकदमों को अभी तक वापस नहीं लिया गया है। केवल हरियाणा में पत्र जारी हुआ था, मगर उसके बाद भी बहुत से किसानों को समन पहुंच रहे हैं। इसके अलावा सरकार ने शहीद किसान के परिवारों को मुआवजा देने की बात कही थी, मगर अभी तक सरकार की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। सरकार ने एमएसपी को लेकर भी कमेटी बनाने और उस पर कार्य करने के बारे में कहा गया था, पर अभी तक सरकार की ओर से इस ओर भी कोई कदम नहीं उठाया है। इसके अलावा लखीमपुर खीरी में हुई घटना में भी आरोपियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इन्हीं को लेकर उनकी ओर से सोमवार को विश्वासघात दिवस मनाया गया और राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया है। इससे पहले प्रदर्शन करने को लेकर किसान पहले अनाज मंडी में एकत्रित हुए और फिर वहां से उपायुक्त कार्यालय पहुंचे।
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एक मंच पर फिर एकत्रित हुए किसान
आंदोलन खत्म होने के बाद विभिन्न संगठनों में बंटे हुए किसान एक बार फिर एक मंच पर आ गए। इस दौरान किसानों ने कहा कि जब भी किसान के हितों की बात होगी तो सभी किसान एक मंच पर खड़े होकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे और अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखते हुए उन्हें पूरा करवाने का कार्य करेंगे।
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भारतीय किसान यूनियन की ओर से किसान मलकीत सिंह ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा ने जिन मांगों पर सहमति बनने पर अपना आंदोलन स्थगित किया था। उनमें से एक भी मांग को केंद्र सरकार की ओर से अभी तक पूरा नहीं किया गया है। इसमें आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश व अन्य राज्यों में किसानों पर दर्ज मुकदमों को अभी तक वापस नहीं लिया गया है। केवल हरियाणा में पत्र जारी हुआ था, मगर उसके बाद भी बहुत से किसानों को समन पहुंच रहे हैं। इसके अलावा सरकार ने शहीद किसान के परिवारों को मुआवजा देने की बात कही थी, मगर अभी तक सरकार की ओर से इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। सरकार ने एमएसपी को लेकर भी कमेटी बनाने और उस पर कार्य करने के बारे में कहा गया था, पर अभी तक सरकार की ओर से इस ओर भी कोई कदम नहीं उठाया है। इसके अलावा लखीमपुर खीरी में हुई घटना में भी आरोपियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इन्हीं को लेकर उनकी ओर से सोमवार को विश्वासघात दिवस मनाया गया और राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया है। इससे पहले प्रदर्शन करने को लेकर किसान पहले अनाज मंडी में एकत्रित हुए और फिर वहां से उपायुक्त कार्यालय पहुंचे।
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एक मंच पर फिर एकत्रित हुए किसान
आंदोलन खत्म होने के बाद विभिन्न संगठनों में बंटे हुए किसान एक बार फिर एक मंच पर आ गए। इस दौरान किसानों ने कहा कि जब भी किसान के हितों की बात होगी तो सभी किसान एक मंच पर खड़े होकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे और अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखते हुए उन्हें पूरा करवाने का कार्य करेंगे।
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