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Ambala: नर्क की जिंदगी जी रही थी बुजुर्ग महिला, बंद कमरे में काटते थे चूहे; संस्था ने किया रेस्क्यू
Sat, 27 Dec 2025 06:37 PM IST
शाहिल शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sat, 27 Dec 2025 06:37 PM IST
सार
अंबाला में तीन वर्षों से एक बंद कमरे में जिंदगी गुजार रही महिला को रेस्क्यू किया गया। महिला की देखभाल करने वाला कोई नहीं था जिसके बाद महिला को रेस्क्यू किया गया।
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अंबाला में बुजुर्ग महिला का किया गया रेस्क्यू
- फोटो : संवाद
विस्तार
अंबाला में काजीवाड़ा मोहल्ले की एक तंग और अंधेरी गली के बंद कमरे में मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां रहने वाली बुजुर्ग महिला दर्शाना देवी बीते तीन साल से नर्क का जीवन जीने को मजबूर थीं, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाए। बुजुर्ग महिला का न कोई अपना है और न सेवा करने वाला है।
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गंदगी के बीच गुजार रही थी जिंदगी
चारपाई पर पड़ी बुजुर्ग महिला गंदगी के बीच अपनी सांसें गिनने को मजबूर थी। बुजुर्ग महिला जिस कमरे में थी वहां चूहों और कॉकरोचों का बसेरा था। हैरानी की बात यह है कि तथाकथित आधुनिक समाज की आंखों के सामने एक बुजुर्ग महिला नर्क की जिंदगी जी रही थी। कमरे से उठने वाली असहनीय दुर्गंध के बीच दर्शाना देवी के हाथों के नाखूनों में मल-मूत्र फंसा हुआ था। शरीर पूरी तरह जवाब दे चुका था और बुजुर्ग महिला हिलने-डुलने में भी असमर्थ थीं। पड़ोसी मानवता के नाते रोटी-पानी दे जाते थे, लेकिन बुजुर्ग माता के सम्मानजनक अस्तित्व पर समाज और व्यवस्था ने चुप्पी साध रखी थी।
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वन्दे मातरम दल बना मसीहा
इस हृदयविदारक स्थिति की सूचना मिलते ही वन्दे मातरम दल संस्था की टीम सक्रिय हुई। दल के सदस्यों ने न केवल बुजुर्ग महिला को इस नर्क से रेस्क्यू किया, बल्कि उन्हें तत्काल लुधियाना स्थित मनुखता दी सेवा सब्ब तो बड़ी सेवा आश्रम पहुंचाया। अब बुजुर्ग महिला गुरप्रीत सिंह के संरक्षण में सुरक्षित हैं, जहां उन्हें इलाज और सम्मानजनक वातावरण मिल रहा है। वंदे मातरम दल के फाउंडर भरत ने बताया कि अगर हमारे बुजुर्ग इस तरह बंद कमरों में सड़ते रहेंगे और हम चुप रहेंगे, तो समझ लेना चाहिए कि हमारी मानवता मर चुकी है। आज हम नहीं जागे, तो कल यही कहानी हमारी भी हो सकती है। मनुखता दी सेवा ही सब्ब तो बड़ी सेवा आश्रम में फिलहाल 850 से अधिक ऐसे ही लाचार लोगों की सेवा की जा रही है, जिन्हें समाज ने ठुकरा दिया था।