{"_id":"67e3041c42a128ac8c054cef","slug":"effect-of-oil-on-wheat-production-may-decrease-ambala-news-c-36-1-sknl1003-139733-2025-03-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: गेहूं पर तेले का प्रभाव, घट सकती है पैदावार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: गेहूं पर तेले का प्रभाव, घट सकती है पैदावार
विज्ञापन
खेत में स्प्रे करते मजदूर
- फोटो : संवाद
जलबेड़ा। जलबेड़ा और आसपास के गांव के किसान बहुत ही चिंतित हैं। हाल ही में किसानों की गेहूं की फसल में तेले का प्रकोप बढ़ गया है। इसके चलते पैदावार कम होने की आशंका जताई जा रही है।
इस दौरान किसान राजेश कुमार, राजेंद्र कुमार, वीरभान, महावीर, मनजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने गेहूं की फसल की अब तक पूरी तरह से देखभाल की है। मगर गेहूं की कटाई से पहले एकदम से उनकी फसल में तेले का प्रकोप बढ़ने लगा है। यही कारण है कि वह अब कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करने को मजबूर हैं। कुछ किसानों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते उन्होंने अपनी फसल पर दवा का छिड़काव न करवाया तो थोड़े ही दिनों के भीतर तेला गेहूं की बालियों में से दूध को चूस लेगा।
इस कारण बाली में जमे हुए दाने का पूरी तरह से विकास नहीं हो पता। जिसका सीधा असर फसल की पैदावार पर पड़ता है। जहां प्रति एकड़ 25 से 30 क्विंटल के बीच पैदावार होनी होती है, वहीं तेले के प्रकोप के कारण यह पैदावार घटकर 15 से 18 क्विंटल के बीच में सिमट कर रह जाती है। इसके साथ ही किसानों ने बताया कि 10 साल पहले इस प्रकार की बीमारी गेहूं की फसल में नहीं आती थी, लेकिन जैसे ही वह फसलों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए यूरिया का इस्तेमाल ज्यादा करने लगे, इसी कारण इस बीमारी ने गेहूं की फसल को आपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस दौरान किसान राजेश कुमार, राजेंद्र कुमार, वीरभान, महावीर, मनजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने गेहूं की फसल की अब तक पूरी तरह से देखभाल की है। मगर गेहूं की कटाई से पहले एकदम से उनकी फसल में तेले का प्रकोप बढ़ने लगा है। यही कारण है कि वह अब कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करने को मजबूर हैं। कुछ किसानों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते उन्होंने अपनी फसल पर दवा का छिड़काव न करवाया तो थोड़े ही दिनों के भीतर तेला गेहूं की बालियों में से दूध को चूस लेगा।
विज्ञापन
इस कारण बाली में जमे हुए दाने का पूरी तरह से विकास नहीं हो पता। जिसका सीधा असर फसल की पैदावार पर पड़ता है। जहां प्रति एकड़ 25 से 30 क्विंटल के बीच पैदावार होनी होती है, वहीं तेले के प्रकोप के कारण यह पैदावार घटकर 15 से 18 क्विंटल के बीच में सिमट कर रह जाती है। इसके साथ ही किसानों ने बताया कि 10 साल पहले इस प्रकार की बीमारी गेहूं की फसल में नहीं आती थी, लेकिन जैसे ही वह फसलों की ग्रोथ बढ़ाने के लिए यूरिया का इस्तेमाल ज्यादा करने लगे, इसी कारण इस बीमारी ने गेहूं की फसल को आपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया।
विज्ञापन