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Ambala News: कुश्ती में छोरियों के दांव पेच का नहीं तोड़

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jun 2024 04:53 AM IST
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Don't break the stakes of girls in wrestling
अंशु शर्मा
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अंबाला। अंबाला की छोरियां कुश्ती में छोरों से पीछे नहीं है। नेशनल लैवल तक अंबाला की खिलाड़ी पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी है। इतना ही नहीं अपने दांव-पेच की बदौलत अंबाला जिला केसरी का भी खिताब हासिल कर चुकी हैं।
इसका प्रशिक्षण वह अंबाला छावनी के स्टेडियम के होस्टल में मैट पर ले रही है। रोजाना दर्जनभर खिलाड़ी आकर प्रशिक्षण ले रही हैं। इन खिलाड़ियों में कोई दंगल फिल्म देखकर तो रिश्तेदारों को कुश्ती करता देखकर मैदान में उतरी। फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और पदकों की झड़ी लगा दी।
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दंगल देखकर हुआ था जुनून सवार : रिया
अंबाला कैंट निवासी 12 क्राॅस रोड निवासी रिया नैनीवाल ने बताया कि पांच साल पहले दंगल मूवी देखने के बाद कुश्ती का जुनून सवार हुआ था और मैदान में आकर लड़कों को धोबी पछाड़ देने की ठान ली थी। तभी से वह प्रशिक्षण ले रही है। जिला खेल महाकुंभ में चार गोल्ड हासिल किए। अभी तक वह कुल 8 पदक हासिल कर चुकी है। जिला स्तरीय कुश्ती अखाड़ा में भी एक गोल्ड हासिल किया।
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मामा के बेटे को देख सीखे कुश्ती के गुर : सिया
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी सिया ने बताया कि मामा का बेटा भी कुश्ती करता है। उसे देखकर ही पहली बार कुश्ती के लिए मैदान में उतरी थी। तब से लेकर अब तक वह कुश्ती के दांव पेंच सीखने के बाद दो पदक हासिल कर चुकी है। यह दोनों पदक स्कूल गेम्स में हासिल किए थे। जबकि जिला महाकुंभ व खेलों इंडिया में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया लेकिन पदक की चूक गई थी।
अभी तक कुल 7 पदक किए हासिल : नंदिनी
अंबाला कैंट की कुम्हार मंडी निवासी नंदिनी ने बताया कि दो साल पहले कुश्ती खेलना शुरू किया था। शुरूआत में थोड़ा डर जरूर था लेकिन जब मैदान में उतरी तो वो पूरी तरह से खत्म हो गया था। अभी तक वह कुल 7 पदक हासिल कर चुकी है। इसमें से दो ओपन स्टेट, दो स्कूल गेम्स, एक खेल महाकुंभ व जिला स्तरीय कुश्ती अखाड़ा में भी दूसरा स्थान हासिल किया था।
दो बार जीता अंबाला केसरी का खिताब : चेतना
अंबाला कैंट निवासी चेतना ने बताया कि वह दो बार अंबाला केसरी रह चुकी है। जबकि चार बार स्टेट लैवल पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। आगे चलकर हरियाणा की टीम का हिस्सा बनना है और अंबाला व माता-पिता सहित कोच का नाम चमकाना है।

बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल में डालें
कुश्ती में लड़कियों का नेशनल तक दबदबा है। सही समय पर प्रशिक्षण मिल जाए तो बेहतरीन खिलाड़ी तैयार होता है। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी डालना चाहिए। वह खुद भी स्कूल नेशनल दिल्ली में ब्राउंज मेडल, ऑल इंडिया नेशनल में ब्राउंज मेडल। इसके अलावा प्रदेशभर स्तर पर कई पदक हासिल कर चुका हूं। अपने शौक व खिलाड़ियों की प्रतिभा को उबारने के उद्देश् ने उन्हें कुश्ती के दांव पेंच सीखा रहा हूं।
मान सिंह, कुश्ती सीनियर खिलाड़ी
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