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Ambala News: छावनी क्षेत्र में हाेगी कुत्तों की नसबंदी, घटेगी संख्या
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अंबाला। कुत्तों की नसबंदी के जिस निविदा को सिरे चढ़ाने में नगर परिषद के हाथ-पांव फूल रहे हैं, उस निविदा को छावनी परिषद (कैंटोनमेंट बोर्ड) ने एक वर्ष के अंदर तीसरी बार जारी कर दिया है। इसका मूल्य 13 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। इसके तहत प्रति कुत्ते की दर से ठेकेदार को 500 रुपये का भुगतान किया जाएगा। पिछली निविदा के तहत ठेकेदार ने लगभग 250 कुत्तों की नसबंदी करके उन्हें एंटी रेबिज टीका लगाया था ताकि स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और कुत्तों की संख्या पर भी विराम लग सके।
छावनी बोर्ड के मुख्य अधिशासी अभियंता विनित लोटे ने बताया कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या गंभीर समस्या बन गई है। इसलिए कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया लगातार चलाई जा रही है ताकि लोगों को राहत मिले। कई बार ऐसी शिकायतें आती हैं कि आवारा कुत्तों की वजह से बुजुर्गाें व बच्चों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है तो उस क्षेत्र में तुरंत कार्रवाई की जाती है और ठेकेदार के कर्मचारी मौके पर जाकर आवारा कुत्तों की धरपकड़ करते हैं।
सदर क्षेत्र में नहीं राहत
अंबाला छावनी नगर परिषद के अधीन क्षेत्र में आवारा कुत्तों की गंभीर समस्या बनी हुई है। शायद ही कोई ऐसा गली-मोहल्ला होगा, जहां आवारा कुत्तों की भरमार न हो। वहीं इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अंबाला छावनी के सामान्य अस्पताल में रोजाना कुत्ता काटने के लगभग 15 मामले आ रहे हैं। बावजूद इसके नगर परिषद कुत्तों की नसबंदी को लेकर टेंडर सिरे नहीं चढ़ा पाया है। लगभग दो साल से ऐसे ही हालात बने हुए हैं और इसका खामियाजा छोटे बच्चों, बुजुर्गाें व महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। वहीं इस संबंध में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी जरनैल सिंह ने बताया कि तीन बार टेंडर जारी किया गया था, लेकिन किसी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड की मदद ली जाएगी।
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छावनी बोर्ड के मुख्य अधिशासी अभियंता विनित लोटे ने बताया कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या गंभीर समस्या बन गई है। इसलिए कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया लगातार चलाई जा रही है ताकि लोगों को राहत मिले। कई बार ऐसी शिकायतें आती हैं कि आवारा कुत्तों की वजह से बुजुर्गाें व बच्चों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है तो उस क्षेत्र में तुरंत कार्रवाई की जाती है और ठेकेदार के कर्मचारी मौके पर जाकर आवारा कुत्तों की धरपकड़ करते हैं।
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सदर क्षेत्र में नहीं राहत
अंबाला छावनी नगर परिषद के अधीन क्षेत्र में आवारा कुत्तों की गंभीर समस्या बनी हुई है। शायद ही कोई ऐसा गली-मोहल्ला होगा, जहां आवारा कुत्तों की भरमार न हो। वहीं इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अंबाला छावनी के सामान्य अस्पताल में रोजाना कुत्ता काटने के लगभग 15 मामले आ रहे हैं। बावजूद इसके नगर परिषद कुत्तों की नसबंदी को लेकर टेंडर सिरे नहीं चढ़ा पाया है। लगभग दो साल से ऐसे ही हालात बने हुए हैं और इसका खामियाजा छोटे बच्चों, बुजुर्गाें व महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। वहीं इस संबंध में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी जरनैल सिंह ने बताया कि तीन बार टेंडर जारी किया गया था, लेकिन किसी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड की मदद ली जाएगी।
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