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Ambala News: असीम के मंत्री बनने से विकास को मिलेगी गति, परियोजनाएं होंगी पूरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Mar 2024 01:51 AM IST
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Development will gain momentum with Asim becoming minister, projects will be completed
अंबाला सिटी। शहर में दो बार विधायक रह चुके असीम गोयल को सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का दर्जा दिया गया है। इस सूचना के बाद उनके घर पर सामने भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने लड्डू बांटे और ढोल की थाप पर खुशी में झूमते नजर आए।
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असीम अग्रवाल वैश्य समाज से आते हैं ऐसे में सरकार में वैश्य समाज की भागीदारी बढ़ने से समाज में भी खुशी की लहर दिखाई दे रही है। मगर मंत्री बनने के साथ-साथ अंबाला को असीम गोयल से अब खास उम्मीदें होंगी। उनके आने से अंबाला में विकास को गति मिल सकेगी। वहीं पिछले लंबे समय से अधूरी चल रही या यूं कहें कि अधर में फंसी परियोजनाओं में तेजी लाने की संभावना भी अब बढ़ गई है।
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इसमें सबसे अधिक अटकी परियोजनाएं अंबाला शहर से ही जुड़ी हैं। इसमें अंबाला सिटी में लघु सचिवालय, राजकीय महिला महाविद्यालय, नौरंगराय तालाब, महाबीर पार्क, बाल भवन, 100 बैड के सिविल अस्पताल जैसी बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। इसमें कुछ परियोजनाएं तो न्यायालय में विचाराधीन हैं तो कुछ परियोजनाओं में बजट का अभाव है। हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद इन कार्यों में गति देने को राज्यमंत्री असीम गोयल के पास तीन से चार महीने का ही समय रहेगा।
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संघ और परिवार से सीखा टिके रहने का गुर

44 वर्षीय असीम गोयल शहर के नन्यौला के रहने वाले हैं। उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त की है। असीम गोयल का परिवार संघ से शुरुआत से जुड़ा रहा है। राजनैतिक दांवपेच भी उन्हें परिवार से ही सीखने को मिले हैं। ऐसे में संघ से संगठन की शिक्षा और राजनीति में परिवार की भूमिका ने उन्हें राज्यमंत्री के पद तक पहुंचाने में काफी मदद की है। असीम के ताऊ सोहन लाल भाजपा की टिकट पर वर्ष 1982 में चुनाव लड़ चुके हैं तो उनके चाचा प्रभु दयाल भाजपा में मंडल अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। असीम गोयल ने अपने राजनैतिक सफर की शुरुआत वर्ष 1996-97 में की थी। वह भाजपा में युवा मोर्चा में भी अहम रोल निभा चुके हैं। इसके बाद अमरनाथ श्राइन बोर्ड यात्रा को लेकर एक प्रदर्शन में वह चोटिल भी हो गए थे, जिसमें उनकी रीढ़ की हड्डी में भी चोट आ गई थी और लकवा की स्थिति से गुजरना पड़ा। उन्होंने ऐसे दिन भी देखे जब व्यापार ठप हो गया था, मगर हार नहीं मानी और दोबारा राजनीति में सक्रिय हो गए।


वर्ष 2014 में पहली बार बने थे विधायक

असीम पहली बार वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की टिकट पर अंबाला सिटी से चुनावी मैदान में उतरे थे। तब मोदी लहर में उन्होंने हरियाणा जनचेतना पार्टी के उम्मीदवार विनोद शर्मा को करीब 23 हजार से अधिक मतों से हराया। इसके बाद वर्ष 2019 में भी उन पर भाजपा ने उन पर भरोसा जताया और टिकट दिया। इस पर वे फिर खरे उतरे और वर्ष 2019 का विधानसभा चुनाव जीतने में कामयाब हुए। तब उन्होंने कांग्रेस छोड़कर गए और अपनी पार्टी से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी निर्मल सिंह को हराया था।
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