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Ambala News: डिपो में निरीक्षकों की कमी, 16 के कंधों पर जिले की जिम्मेदारी, 53 पद खाली
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रूटों पर चलने वाली बसों के औचक निरीक्षण प्रक्रिया लगभग हुई ठप
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। अंबाला डिपो कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि महज 16 निरीक्षकों के भरोसे जिला के बसों की चेकिंग का जिम्मा है। इससे राजस्व को नुकसान हो रहा है। सीनियर परिचालकों की पदोन्नति नहीं हो रही। जबकि दिसंबर माह में एक निरीक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
डिपो में चेकिंग स्टाफ की कमी है। विभाग में निरीक्षक और उप-निरीक्षक के 52 पद खाली पड़े हैं। लंबे समय से इन पदों को नहीं भरा गया है। स्टाफ कम होने के कारण फ्लाइंग टीमें नहीं बन पा रही हैं। जिससे रूटों पर चलने वाली बसों की औचक निरीक्षण प्रक्रिया लगभग ठप हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि काम का बोझ इतना अधिक है कि एक अधिकारी को कई क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
सीनियर परिचालकों की नहीं हो रही पदोन्नति
नियमानुसार, सीनियर परिचालकों को प्रमोट कर उप-निरीक्षक बनाया जाता है, लेकिन काफी समय से पदोन्नति की प्रक्रिया लटकी है। प्रमोशन न होने से सीनियर परिचालक उसी पद पर रिटायर हो रहे हैं, जबकि विभाग में फील्ड अधिकारियों की कमी है। अगर प्रमोशन समय पर हों, तो चेकिंग स्टाफ की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। चेकिंग स्टाफ की कमी का सीधा असर रोडवेज की कमाई पर पड़ रहा है। चेकिंग न होने से कई रूटों पर बिना टिकट यात्रा और राजस्व चोरी की शिकायत बढ़ रही हैं।
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निरीक्षक और उप निरीक्षक की कमी के बारे में मुख्यालय को लिखा गया है।
- अश्वनी डोगरा, महाप्रबंधक, अंबाला डिपो
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। अंबाला डिपो कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि महज 16 निरीक्षकों के भरोसे जिला के बसों की चेकिंग का जिम्मा है। इससे राजस्व को नुकसान हो रहा है। सीनियर परिचालकों की पदोन्नति नहीं हो रही। जबकि दिसंबर माह में एक निरीक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
डिपो में चेकिंग स्टाफ की कमी है। विभाग में निरीक्षक और उप-निरीक्षक के 52 पद खाली पड़े हैं। लंबे समय से इन पदों को नहीं भरा गया है। स्टाफ कम होने के कारण फ्लाइंग टीमें नहीं बन पा रही हैं। जिससे रूटों पर चलने वाली बसों की औचक निरीक्षण प्रक्रिया लगभग ठप हो गई है। कर्मचारियों का कहना है कि काम का बोझ इतना अधिक है कि एक अधिकारी को कई क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
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सीनियर परिचालकों की नहीं हो रही पदोन्नति
नियमानुसार, सीनियर परिचालकों को प्रमोट कर उप-निरीक्षक बनाया जाता है, लेकिन काफी समय से पदोन्नति की प्रक्रिया लटकी है। प्रमोशन न होने से सीनियर परिचालक उसी पद पर रिटायर हो रहे हैं, जबकि विभाग में फील्ड अधिकारियों की कमी है। अगर प्रमोशन समय पर हों, तो चेकिंग स्टाफ की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। चेकिंग स्टाफ की कमी का सीधा असर रोडवेज की कमाई पर पड़ रहा है। चेकिंग न होने से कई रूटों पर बिना टिकट यात्रा और राजस्व चोरी की शिकायत बढ़ रही हैं।
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निरीक्षक और उप निरीक्षक की कमी के बारे में मुख्यालय को लिखा गया है।
- अश्वनी डोगरा, महाप्रबंधक, अंबाला डिपो