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Ambala News: डेंगू और मलेरिया फैलने का खतरा, चार सप्ताह अहम
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जलभराव में तेल का छिड़काव करता स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी।
अंबाला सिटी। बाढ़ के बाद सबसे अधिक खतरा डेंगू मलेरिया का है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग भी चिंतित है। उनके लिए बाढ़ के बाद के चार सप्ताह काफी कठिन हैं। अगर इन चार सप्ताह में मच्छर का लारवा पनप गया तो डेंगू मलेरिया का आउटब्रेक संभालना स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।
यही कारण है कि एनडीआरएफ और सेना बचाव टीम के साथ पहले ही रेस्क्यू अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जाना शुरू कर दिया था। वह क्षेत्र में तेल व दवा का छिड़काव करा रहे थे ए जिससे कि भरे पानी में मच्छराें का लारवा न पनपे। अभी भी विभाग के लिए यही कार्य चुनौती बना हुआ है। यही कारण है कि वह लोगों से बार-बार अपील कर रहे हैं कि अपने घर के आसपास जलभराव देखें तो किसी भी प्रकार के तेल का छिड़काव कर दें।
नप या निगम का काम, कर रहा स्वास्थ्य विभाग
साफ सफाई, जलभराव व मच्छर न पनपने देने का काम नगर निकायों का है। मगर स्वास्थ्य विभाग पहले ही दिन से इस कार्य को प्रमुखता से कर रहा है। क्योंकि अगर डेंगू या मलेरिया का आउटब्रेक होता है तो स्वास्थ्य विभाग पर सबसे अधिक भार आएगा। इस आउटब्रेक को संभालना भी एक चुनौती बन जाएगा।
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इधर...
गंदे पानी से स्किन एलर्जी के मामले मिल रहे अधिक
जिला के 450 गांवों में 216 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें स्वास्थ्य विभाग की टीम डोर टू डो जा रही है। इस कार्य के लिए 315 टीमों को लगाया गया है। प्रत्येक टीम में दो सदस्य है। इसमें मोबाइल टीम को भी लगाया गया है। इसके साथ ही 80 लोगों की अगल से एक टीम का गठन किया गया है। जाे एक क्षेत्र में पूरा एक दिन जांच करने में लगाती है। अभी तक लोगों की स्क्रीनिंग करने के बाद सबसे अधिक मामले गंदे पानी के कारण लोगों को पेट दर्द, स्किन एलर्जी, आंखों की एलर्जी, हाथ पैर गलना आदि के मिल रहे हैं। वहीं कुछ मामले डायरिया से जुड़े भी हैं। जिनका उपचार किया जा रहा है। इसके साथ ही बुखार आदि के केस भी मिल रहे हैं। इन बीमारियों को रोकने के लिए घर के पेयजल में भी क्लोरीन की गोली तो जलस्रोतों पर ब्लीचिंग पाउडर डाला जा रहा है।
वर्जन
बाढ़ का पानी निकलने से पहले ही हमने पेयजल और जलभराव क्षेत्र में तेल का छिड़काव शुरू करा दिया था, क्योंकि बाढ़ के बाद डेंगू मलेरिया का आउटब्रेक चुनौती बनता है। हमने पहले से ही अभियान शुरू कर दिया तो अभी तक राहत है। आगे स्थिति को लगातार देख रहे हैं।
-डॉ सुखप्रीत सिंह, नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग
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यही कारण है कि एनडीआरएफ और सेना बचाव टीम के साथ पहले ही रेस्क्यू अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जाना शुरू कर दिया था। वह क्षेत्र में तेल व दवा का छिड़काव करा रहे थे ए जिससे कि भरे पानी में मच्छराें का लारवा न पनपे। अभी भी विभाग के लिए यही कार्य चुनौती बना हुआ है। यही कारण है कि वह लोगों से बार-बार अपील कर रहे हैं कि अपने घर के आसपास जलभराव देखें तो किसी भी प्रकार के तेल का छिड़काव कर दें।
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नप या निगम का काम, कर रहा स्वास्थ्य विभाग
साफ सफाई, जलभराव व मच्छर न पनपने देने का काम नगर निकायों का है। मगर स्वास्थ्य विभाग पहले ही दिन से इस कार्य को प्रमुखता से कर रहा है। क्योंकि अगर डेंगू या मलेरिया का आउटब्रेक होता है तो स्वास्थ्य विभाग पर सबसे अधिक भार आएगा। इस आउटब्रेक को संभालना भी एक चुनौती बन जाएगा।
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गंदे पानी से स्किन एलर्जी के मामले मिल रहे अधिक
जिला के 450 गांवों में 216 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें स्वास्थ्य विभाग की टीम डोर टू डो जा रही है। इस कार्य के लिए 315 टीमों को लगाया गया है। प्रत्येक टीम में दो सदस्य है। इसमें मोबाइल टीम को भी लगाया गया है। इसके साथ ही 80 लोगों की अगल से एक टीम का गठन किया गया है। जाे एक क्षेत्र में पूरा एक दिन जांच करने में लगाती है। अभी तक लोगों की स्क्रीनिंग करने के बाद सबसे अधिक मामले गंदे पानी के कारण लोगों को पेट दर्द, स्किन एलर्जी, आंखों की एलर्जी, हाथ पैर गलना आदि के मिल रहे हैं। वहीं कुछ मामले डायरिया से जुड़े भी हैं। जिनका उपचार किया जा रहा है। इसके साथ ही बुखार आदि के केस भी मिल रहे हैं। इन बीमारियों को रोकने के लिए घर के पेयजल में भी क्लोरीन की गोली तो जलस्रोतों पर ब्लीचिंग पाउडर डाला जा रहा है।
वर्जन
बाढ़ का पानी निकलने से पहले ही हमने पेयजल और जलभराव क्षेत्र में तेल का छिड़काव शुरू करा दिया था, क्योंकि बाढ़ के बाद डेंगू मलेरिया का आउटब्रेक चुनौती बनता है। हमने पहले से ही अभियान शुरू कर दिया तो अभी तक राहत है। आगे स्थिति को लगातार देख रहे हैं।
-डॉ सुखप्रीत सिंह, नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग

जलभराव में तेल का छिड़काव करता स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी।