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Ambala News: गांव खैरा में मकानों में आई दरारें, सहमे लोगों ने अभी तक पशुओं को छत नहीं उतारा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 16 Jul 2023 02:08 AM IST
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Cracks in houses in village Khaira, people in fear have not yet removed the roof of the animals
अंबाला सिटी। गांव खैरा में करीब एक सप्ताह बाद पानी उतरने लगा है। अब गांव के स्कूल और बाहरी इलाकों में पानी जमा है। बाढ़ का पानी 10 फुट से ज्यादा तक आ गया था। इस त्रासदी के निशान आंगनबाड़ी केंद्र की दीवारों पर साफ दिखाई दे रहे हैं। इतना पानी गांव में आ सकता है, इसका ग्रामीणों को अंदाजा भी नहीं था।
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अब पानी धीरे-धीरे उतर रहा है, मगर गांव के लोग सहमे हैं। गांव में ज्यादातर मकान ऐसे हैं, जिनमें दीवारों में दरारें आ चुकी हैं। कच्ची छतों वाले मकानों को ज्यादा नुकसान हुआ है और एक-दो मकान गिर गए हैं और लोग पड़ोसियों के घर पर रहने को मजबूर हैं। लोगों का घरेलू सामान, फ्रिज, टीवी, अलमारी, सोफे, अनाज, पेटी, कूलर और दस्तावेज तक सबकुछ बर्बाद हो गया है। लोग बताते हैं कि उनको बचने की उम्मीद भी नहीं थी कि बस रब ने ही रख लए।
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आंगनबाड़ी में 10 फुट पानी, रिकॉर्ड खराब

गांव की आंगनबाड़ी केंद्र में काफी नुकसान हुआ है। आंगनबाड़ी केंद्र का गांव सरपंच परमजीत कौर ने भी दौरा किया। आंगनबाड़ी की दीवारों पर 10 फुट तक पानी के निशान हैं। आंगनबाड़ी वर्कर प्रसन्नी देवी ने बताया कि आंगनबाड़ी का 1987 तक रखा रिकाॅर्ड भी पानी की वजह से खराब हो गया है। यह रिकॉर्ड स्लैप पर ट्रंक में रखा हुआ था। इसके साथ ही प्ले स्कूल की किताबें, अनाज, तेल, सूखे दूध के पैकेट, खिलौने भी खराब हो गए। उन्होंने बताया कि अब उनको पूरा रिकॉर्ड दोबारा बनाने के लिए गांव में जाकर महिलाओं और बच्चों की जानकारी नए सिरे से जुटानी पड़ेगी।
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रोते हुए हेलीकॉप्टर को पुकारा, नहीं सुनी आवाज
गांव से बाहर खेतों में रह रहे परिवार के लिए यह बाढ़ सबसे ज्यादा भयानक भरी थी। आसपास कोई भी घर नहीं है। हरविंद्र सिंह ने बताया कि जब बारिश आई तो यह अंदाजा नहीं था कि इतना जलभराव हो जाएगा। जब पानी 3 फुट तक जमा हो गया तो उन्होंने अपने पशुओं को मकान की छत पर चढ़ा दिया। एक गाय सीढियों से ऊपर नहीं चढ़ी और वह गाय पानी में बह गई। उनका परिवार छत पर जाकर रहने लगा। खेतों की वजह से पानी 9 से 10 फुट तक आ गया था। जैसे ही दो दिन गुजरे तो उनके पास पीने का पानी भी कम बचा था। बच्चे बुरी तरह डर गए थे और एक-दो बोतल से घूंट-घूंट पानी पीकर वक्त गुजारा। उनको लगा था कि अब वह नहीं बचेंगे। जब हेलीकॉप्टर आसमान में दिखा तो उन्होंने रोते हुए हेलीकॉप्टर को आवाजें दी और लाल कपड़ा बांधकर भी हवा में लहराया, मगर हेलीकॉप्टर उनकी तरफ नहीं आया।
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किसी का मकान गिरा तो कहीं दरार
गांव की कृष्णा देवी का मकान बाढ़ की वजह से गिर गया। अब वह पड़ोसियों के घर पर रहने को मजबूर हैं। इसी तरह कर्मजीत कौर के मकान में दरारें आ गई और दरवाजा भी बल्ली के सहारे अटका है। उनके घर का सामान भी खराब हो गया है।
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कर्ज से लिए 200 सीमेंट के थैले खराब
गांव खैरा के रणबीर ने बताया कि बारिश की वजह से उसके करीब 200 थैले सीमेंट के खराब हो गए और दरवाजे की चौखट भी खराब हो गई। इस कारण उसे लाखों रुपए का नुकसान हो गया। उसने मकान बनाने के लिए लोन लेकर यह सामान खरीदा था।
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किसान के डाई और यूरिया के थैले खराब
किसान हरचरण सिंह ने बताया कि 2004 में बाढ़ आई थी, मगर इतना पानी नहीं आया था। उन्होंने पिछले 60 वर्षों में पहली बार इतना पानी देखा है कि जब सबकुछ बर्बाद हो गया। उनके डाई के 15 और यूरिया के 25 थैले खराब हो गए। 20 क्विंटल गेहूं खराब हो गया। ट्रैक्टर के स्पेयर पार्ट में भी पानी चला गया।
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घर का सारा सामान बर्बाद
गांव के गुरनाम सिंह ने बताया कि बारिश के कारण घरेलू सामान फ्रिज, टीवी, अलमारी, सोफे, अनाज, पेटी, कूलर, दस्तावेज तक सबकुछ बर्बाद हो गया है। अब वह कैसे इसकी भरपाई करेंगे। उनके कच्चे मकान की छत का एक हिस्सा भी गिर गया। इसी तरह जसबीर सिंह के घर का भी सामान खराब हो गया।

बेटी के लिए खरीदा दहेज भी खराब
जग्गा खैरा ने बताया कि एक महिला ने अपनी बेटी को शादी में देने के लिए बेड, अलमारी व अन्य सामान खरीदकर रखा हुआ था, मगर वह सामान बाढ़ की वजह से खराब हो गया। उन्होंने बताया कि ज्यादातर लोगों के मकान में दरारें आ चुकी है और फसल भी खराब हो चुकी है।

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स्कूल की हालत ज्यादा खराब
गांव के प्राइमरी और राजकीय उच्च विद्यालय के हालात काफी खराब है। अभी स्कूल में दो से तीन फुट तक पानी जमा है। स्कूल की आंगनबाड़ी केंद्र और सड़क के पास से चार दिवारी गिर गई है। स्कूल का सारा सामान भी खराब हो गया है। स्कूल खुलने में अभी समय लग सकता है, वहीं प्राइमरी स्कूल में भरी मिट्टी की गाद को साफ किया जा रहा है।
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