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Ambala News: अमरुत योजना में डली पीने की पाइप लाइन पर पार्षदों ने उठाए सवाल, निगम में समिति ने की जांच
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अंबाला सिटी। करीब दो वर्ष पहले शहर के वार्डों में अमरूत योजना के तहत डाली गई पेयजल की पाइपलाइन पर पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। पार्षदों की मांग के बाद इस मामले में जांच चल रही है। वीरवार को नगर निगम में जांच समिति के सदस्यों ने योजना को लेकर जांच की। साथ ही पार्षदों के पक्ष को भी जानते हुए उनकी बात सुनी। वार्ड पार्षदों को जांच समिति ने आश्वासन दिया कि निगम की तरफ से जेई को भेजा जाएगा। लाइन को पार्षद नक्शे के हिसाब से चेक करेंगे कि लाइन वहां डाली भी है या नहीं। वहीं, इस जांच के दौरान मेयर शक्तिरानी शर्मा, डिप्टी मेयर राजेश मेहता, जांच समिति सदस्य और निगम के अधिकारी भी मौजूद रहे।
दरअसल, नगर निगम के वार्डों में करीब 2 वर्ष पहले अमरुत योजना के तहत पीने की पाइपलाइन डाली गई थी। पूरे शहर की बात करें तो यह लाइन करीब 231 किलोमीटर डाली गई। पार्षदों का आरोप है कि इस पाइपलाइन को निर्धारित मापदंड के अनुसार नहीं डाला गया। जिससे कई जगहों पर लोगों के घरों में पानी नहीं पहुंचता और कई जगह लाइन इंटरलॉकिंग टाइलों के बिल्कुल नीचे ही डाल दी गई। लाइन को गहराई में नहीं डाला गया।
कई जगह अवैध कॉलोनियों में पाइपलाइन डाल दी : टोनी
वार्ड-4 पार्षद विजय कुमार टोनी ने बताया कि दो वर्ष पहले डाली गई यह लाइन करीब साढ़े चार फुट की गहराई में डालनी चाहिए थी, मगर यह लाइन ऊपर ही डाल दी गई। कई ऐसी गलियां हैं, जहां नक्शे में पाइपलाइन को डाला हुआ दिखाया जा रहा है, जबकि वहां लाइन को डाला ही नहीं गया। कई जगह अवैध कॉलोनियों में पाइपलाइन को डाल दिया गया। उनकी मांग है कि जो भी निगम अधिकारी और ठेकेदार पर कार्रवाई की जाए। निगम ने इस प्रोजेक्ट को लेकर 53 करोड़ का भुगतान कर दिया है, जबकि 2 करोड़ का भुगतान अभी रहता है। मामला उठने के बाद यह भुगतान रोक लिया गया था।
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चेक करेंगे, कहां पाइपलाइन डली हुई और कहां नहीं : जसबीर सिंह
वार्ड-1 पार्षद जसबीर सिंह ने बताया कि नगर निगम ने एक महीने पहले नक्शा दिया था। हमने इस नक्शे के हिसाब से निगम अधिकारियों को कहा था कि नक्शे के हिसाब से जहां भी पानी की पाइपलाइन डाली गई है, उन्हें वेरिफाई करवाई जाए। उन्होंने कहा कि अभी तक निगम के जेई, एसडीओ ने यह नहीं बताया कि नक्शे के हिसाब से यह गली है और इसमें कहां पाइपलाइन डाली गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि अधिकारी ठेकेदारों को बचाना चाहते हैं। अब उनको आश्वासन मिला है कि निगम के जेई को पार्षदों के पास भेजा जाएगा। जो नक्शा बनाया है, उसके आधार पर यह लाइन कहां डाली गई है, फिर पार्षद चेक करेंगे।
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वर्जन
पार्षदों का कहना था कि अमरूत योजना के तहत जो पीने की पाइपलाइन डाली गई थी। उसे उतना गहरा नहीं डाला गया, जितना गहरा डालना चाहिए था। इसके साथ ही उनकी कुछ अन्य आपत्तियां भी थी। यह लाइन दो वर्ष पहले डली थी। वीरवार को इसको लेकर समिति ने जांच की है। इसमें पार्षदों का फाइनल व्यू जानना था। अभी मामले में जांच चल रही है।
-हरीश कुमार, एक्सईएन नगर निगम व जांच समिति सदस्य।
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दरअसल, नगर निगम के वार्डों में करीब 2 वर्ष पहले अमरुत योजना के तहत पीने की पाइपलाइन डाली गई थी। पूरे शहर की बात करें तो यह लाइन करीब 231 किलोमीटर डाली गई। पार्षदों का आरोप है कि इस पाइपलाइन को निर्धारित मापदंड के अनुसार नहीं डाला गया। जिससे कई जगहों पर लोगों के घरों में पानी नहीं पहुंचता और कई जगह लाइन इंटरलॉकिंग टाइलों के बिल्कुल नीचे ही डाल दी गई। लाइन को गहराई में नहीं डाला गया।
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कई जगह अवैध कॉलोनियों में पाइपलाइन डाल दी : टोनी
वार्ड-4 पार्षद विजय कुमार टोनी ने बताया कि दो वर्ष पहले डाली गई यह लाइन करीब साढ़े चार फुट की गहराई में डालनी चाहिए थी, मगर यह लाइन ऊपर ही डाल दी गई। कई ऐसी गलियां हैं, जहां नक्शे में पाइपलाइन को डाला हुआ दिखाया जा रहा है, जबकि वहां लाइन को डाला ही नहीं गया। कई जगह अवैध कॉलोनियों में पाइपलाइन को डाल दिया गया। उनकी मांग है कि जो भी निगम अधिकारी और ठेकेदार पर कार्रवाई की जाए। निगम ने इस प्रोजेक्ट को लेकर 53 करोड़ का भुगतान कर दिया है, जबकि 2 करोड़ का भुगतान अभी रहता है। मामला उठने के बाद यह भुगतान रोक लिया गया था।
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चेक करेंगे, कहां पाइपलाइन डली हुई और कहां नहीं : जसबीर सिंह
वार्ड-1 पार्षद जसबीर सिंह ने बताया कि नगर निगम ने एक महीने पहले नक्शा दिया था। हमने इस नक्शे के हिसाब से निगम अधिकारियों को कहा था कि नक्शे के हिसाब से जहां भी पानी की पाइपलाइन डाली गई है, उन्हें वेरिफाई करवाई जाए। उन्होंने कहा कि अभी तक निगम के जेई, एसडीओ ने यह नहीं बताया कि नक्शे के हिसाब से यह गली है और इसमें कहां पाइपलाइन डाली गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि अधिकारी ठेकेदारों को बचाना चाहते हैं। अब उनको आश्वासन मिला है कि निगम के जेई को पार्षदों के पास भेजा जाएगा। जो नक्शा बनाया है, उसके आधार पर यह लाइन कहां डाली गई है, फिर पार्षद चेक करेंगे।
वर्जन
पार्षदों का कहना था कि अमरूत योजना के तहत जो पीने की पाइपलाइन डाली गई थी। उसे उतना गहरा नहीं डाला गया, जितना गहरा डालना चाहिए था। इसके साथ ही उनकी कुछ अन्य आपत्तियां भी थी। यह लाइन दो वर्ष पहले डली थी। वीरवार को इसको लेकर समिति ने जांच की है। इसमें पार्षदों का फाइनल व्यू जानना था। अभी मामले में जांच चल रही है।
-हरीश कुमार, एक्सईएन नगर निगम व जांच समिति सदस्य।