फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   civic

जिन कटी लावारिश लाशों को छूने से भी लगता है डर, विधि विधान से होता है उनका अंतिम संस्कार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Nov 2019 01:57 AM IST
विज्ञापन
civic
रेलवे ट्रैक से मिलने वाली जिन कटी लावारिस लाशों को कोई छूने तक के लिए तैयार नहीं होता। हेल्पर सोसायटी पूरे विधि विधान से उन लाशों का अंतिम संस्कार करवा रही है। ये दो साल में ये संस्था ऐसी 471 लाशों का अंतिम संस्कार कर चुकी है। हर तीन महीने बाद संस्था के सदस्य अस्थियों को लेकर परिवार के साथ हरिद्वार जाते हैं। फिर अस्थियों को गंगा में प्रवाहित कर दिया जाता है। पहले ऐसी लाशों का केवल अंतिम संस्कार होता था। विधि विधान से उनके अस्थि विसर्जन की कोई व्यवस्था नहीं थी। उधर ट्रैक से हर साल लावारिस लाशें मिलने की संख्या निरंतर बढ़ रही है।
विज्ञापन

घायलों के उपचार से शुरू हुई सेवा
हेल्पर सोसायटी के प्रधान तिलकराज ने बताया कि 2010 में पहले उनकी संस्था ने सड़क हादसे में घायल होने वाले लोगों को उपचार करवाना शुरू किया। संस्था खुद सड़क से उठाकर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाती थी। जब तक उसके परिजन न आ जाएं तक मरीज का संस्था अपने खर्च पर ही उपचार करवाती थी। अब 2017 से वे लावारिश लाशों का भी अंतिम संस्कार करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक वे 471 लाशों का अंतिम संस्कार करवा चुके हैं। इसमें दो लाशें मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों की थी। उन्हें मुस्लिम परंपरा के लिहाज से दफनाया गया। अंतिम संस्कार के बाद हर लाश का पूरा रिकार्ड रखा जाता है ताकि पहचान के बाद उनके परिवारों को पूरा ब्योरा दिया जा सके।
विज्ञापन

11 प्रकल्पों पर चल रही है सेवा
हेल्पर सोसायटी 11 प्रकल्पों पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। इनमें लावारिश लाशों के अंतिम संस्कार से लेकर घायलों के उपचार, लंगर सेवा, देहदान, नेत्रदान, रक्तदान, तथा अंगदान भी शामिल हैं। संस्था के जरिए अब तक दो लोग देह दान कर चुके हैं। 67 ने नेत्रदान किया। एक अंगदान कर चुका है। जबकि वे 4700 घायलों का उपचार भी करवा चुके हैं। हर साल पीजीआई को चार बड़े कैंप के जरिए दो हजार यूनिट रक्त भी उपलब्ध करवाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

74 लाशों की नहीं हुई शिनाख्त
रेलवे ट्रैक से लावारिस लाशें मिलने की संख्या हर साल बढ़ रही है। अब तक अंबाला राजकीय रेलवे पुलिस को 170 लावारिस लाशें मिल चुकी हैं। इनमें से 74 की पहचान नहीं हो पाई है। इनमें 6 महिलाएं भी शामिल हैं। ट्रैक से मिलने के बाद पुलिस लाश का पूरा रिकार्ड रखती है। पहचान के लिए उसे 72 घंटे मोर्चरी में रखा जाता है।फिर अंतिम संस्कार के लिए सामाजिक संस्था को सौंप दिया जाता है। एसएचओ जीआरपी रामबचन कहते हैं कि ट्रैक से लावारिस लाशें मिलने के बाद उनकी पहचान बड़ी चुनौती है। फिर भी कई लाशों की पहचान नहीं हो पाती।

हर थाने में संस्था का नाम
तिलकराज ने बताया कि दो साल के भीतर ही उनकी संस्था का हर थाने-चौकी में नाम हो गया। अब वे अंबाला के साथ चंडीगढ़ व कुरुक्षेत्र तक में मिलने वाली लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करवा रहे हैं। पुलिस की एक कॉल पर ही उनकी टीम मौके पर पहुंच जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed