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वर्ष 2025 में करें दैवी संपदा का अभिनंदन : स्वामी ज्ञानानंद
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दिव्य गीता सत्संग में समापन दिवस का शुभारंभ करते हुए बाबा भूपेंद्र सिंह महाराज व अन्य। जीओ
अंबाला सिटी। पुलिस लाइन डीएवी स्कूल के ग्राउंड में आयोजित पांच दिवसीय दिव्य गीता सत्संग के समापन दिवस आयोजित किया गया। यह सत्संग महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सान्निध्य में श्री कृष्ण कृपा जीओ गीता परिवार की ओर से किया गया।
मंगलवार को सत्संग के समापन दिवस पर श्रद्धालु उत्साह से पहुंचे। समापन दिवस पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी विशेष रूप से सम्मिलित हुए। सत्संग के समापन सत्र पर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने भगवद् स्तुति श्लोकों के पाठ के उपरांत प्रवचन करते हुए कहा कि वर्ष 2024 की विदाई और वर्ष 2025 का आगमन समय की दृष्टि से काल चक्र का एक भाग है। समय अपनी गति से निकलता है। न समय कभी रुकता है और न ही बीता समय कभी लौटता है। वर्ष 2024 एक-एक दिन करके निकल गया।
उन्होंने कहा कि गीता के अनुसार विचार की स्थिति यह है कि हमें 2024 की विदाई के साथ-साथ विदा करनी हैं दुर्भावनाएं, दुर्गुण, दुर्व्यसन आदि और नव वर्ष के रूप में अभिनंदन करना है सद्गुण, सदाचार और सद्भावना का। गीता मनीषी ने कहा कि गीता का 16वां अध्याय देवासुर संपदा विभागयोग है। इसमें वह सद्गुण भी हैं, जो मनुष्य शरीर में देवत्व प्रदान कर सकते हैं और वह दुर्गुण भी हैं जिन्हें गीता में आसुरी संपदा की संज्ञा दी गई है। जो मनुष्य शरीर में ही मनुष्य को राक्षसी स्थिति में ले आते हैं।
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स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने आह्वान करते हुए कहा कि आओ विश्व वर्ष 2024 के रूप में विदा करें आसुरी संपदा को और वर्ष 2025 में अभिनंदन करें गीता की देवी संपदा का। वहीं, दिव्य गीता सत्संग के समापन अवसर पर बाबा भूपेंद्र सिंह महाराज ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया। मंच संचालन कार्य सुरेश गोयल नारायणगढ़ ने बखूबी निभाया। श्रीमद्भगवद्गीता जी की आरती एवं शांति-सद्भाव प्रार्थना के साथ दिव्य गीता सत्संग का समापन हुआ।
समापन के पलों में जमकर झूमे श्रद्धालु
दिव्य गीता सत्संग के समापन के वृंदावन धाम से पहुंचे रतन झिंझाना ने भजन गाए। भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। वहीं, नीरू चौहान ने भी भजन प्रस्तुति दी। गोपिका वालिया ने धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र कविता सुनाकर कृष्णभक्तों को मंत्र-मुग्ध कर दिया।
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मंगलवार को सत्संग के समापन दिवस पर श्रद्धालु उत्साह से पहुंचे। समापन दिवस पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी विशेष रूप से सम्मिलित हुए। सत्संग के समापन सत्र पर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने भगवद् स्तुति श्लोकों के पाठ के उपरांत प्रवचन करते हुए कहा कि वर्ष 2024 की विदाई और वर्ष 2025 का आगमन समय की दृष्टि से काल चक्र का एक भाग है। समय अपनी गति से निकलता है। न समय कभी रुकता है और न ही बीता समय कभी लौटता है। वर्ष 2024 एक-एक दिन करके निकल गया।
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उन्होंने कहा कि गीता के अनुसार विचार की स्थिति यह है कि हमें 2024 की विदाई के साथ-साथ विदा करनी हैं दुर्भावनाएं, दुर्गुण, दुर्व्यसन आदि और नव वर्ष के रूप में अभिनंदन करना है सद्गुण, सदाचार और सद्भावना का। गीता मनीषी ने कहा कि गीता का 16वां अध्याय देवासुर संपदा विभागयोग है। इसमें वह सद्गुण भी हैं, जो मनुष्य शरीर में देवत्व प्रदान कर सकते हैं और वह दुर्गुण भी हैं जिन्हें गीता में आसुरी संपदा की संज्ञा दी गई है। जो मनुष्य शरीर में ही मनुष्य को राक्षसी स्थिति में ले आते हैं।
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स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने आह्वान करते हुए कहा कि आओ विश्व वर्ष 2024 के रूप में विदा करें आसुरी संपदा को और वर्ष 2025 में अभिनंदन करें गीता की देवी संपदा का। वहीं, दिव्य गीता सत्संग के समापन अवसर पर बाबा भूपेंद्र सिंह महाराज ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया। मंच संचालन कार्य सुरेश गोयल नारायणगढ़ ने बखूबी निभाया। श्रीमद्भगवद्गीता जी की आरती एवं शांति-सद्भाव प्रार्थना के साथ दिव्य गीता सत्संग का समापन हुआ।
समापन के पलों में जमकर झूमे श्रद्धालु
दिव्य गीता सत्संग के समापन के वृंदावन धाम से पहुंचे रतन झिंझाना ने भजन गाए। भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। वहीं, नीरू चौहान ने भी भजन प्रस्तुति दी। गोपिका वालिया ने धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र कविता सुनाकर कृष्णभक्तों को मंत्र-मुग्ध कर दिया।

दिव्य गीता सत्संग में समापन दिवस का शुभारंभ करते हुए बाबा भूपेंद्र सिंह महाराज व अन्य। जीओ