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पंचायत चुनाव से पहले शक्ति केंद्रों को सक्रिय कर रही भाजपा
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अंबाला। हरियाणा में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव सितंबर में संभावित हैं। भाजपा ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। सभी जिलों में चुनाव के लिए जिला प्रभारियों की भी नियुक्ति हो गई है जबकि प्रदेश स्तरीय चुनाव प्रबंधन समिति के सदस्यों को भी जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है। इस चुनाव को लेकर भाजपा जिलावार रणनीति तय करने में जुट गई है मगर पार्टी पंचायती चुनाव सिंबल पर लड़ेगी या नहीं। इस पर भाजपा 15 अगस्त के बाद फैसला लेगी।
दूसरी ओर, पंचायत चुनाव से पूर्व भाजपा अपने शक्ति केंद्रों को भी मजबूत बनाने में जुटी है। इसके लिए सभी जिलों में शक्ति केंद्र प्रमुखों की कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि चुनाव के दौरान जनता तक भाजपा की नीतियां पहुंचाने के लिए शक्ति केंद्र एक अहम कड़ी है। इसी सोच के साथ भाजपा पंचायत चुनाव से पहले प्रदेश के सभी शक्ति केंद्रों को सक्रिय करना चाहती है।
इसी के चलते मंगलवार को अंबाला में भी भाजपा के शक्ति केंद्र प्रमुखों की कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष समेत अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यशाला में भाजपा के नेताओं ने अलग-अलग सत्रों में
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केंद्र प्रमुखों को न केवल विभिन्न क्षेत्र की गतिविधियों से अवगत कराया बल्कि उन्हें केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियों, बतौर कार्यकर्ता ग्राउंड जीरो पर जाकर कार्य करने की क्षमताओं को परखने और निखारने के अलावा उन्हें तमाम तरह बारीकियों से अवगत कराया।
पांच सत्रों में संपन्न हुई कार्यशाला में हर घर तिरंगा कार्यक्रम को सफल बनाने और इसके प्रोटोकाल का पालन करने के नियम भी उन्हें समझाए गए। इस दौरान अमर उजाला से विशेष बातचीत में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने बताया कि इस तरह की गतिविधियां संगठन को सक्रिय रखने की दृष्टि से साल भर चलाई जाती हैं ताकि भाजपा का कार्यकर्ता अनुशासन में रह कर पार्टी की मजबूती के लिए अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकें।
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. संजय शर्मा के मुताबिक अंबाला में 216 और प्रदेश में करीब 6000 शक्ति केंद्र हैं। एक शक्ति केंद्र में 4 से 5 पांच बूथ हैं। एक शक्ति केंद्र में एक पालक, दूसरे पर बूथ अध्यक्ष और तीसरे पर बीएलए टू, जिन्हें भाजपा त्रिदेव की उपाधि देती है, मौजूद रहते हैं। ये त्रिदेव सितंबर संभावित पंचायती राज चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने में किस तरह अपनी भूमिका निभा सकते हैं, इस बारे में भी उन्हें भाजपा नेताओं ने बताया।
पहले सत्र में बूथ सशक्तीकरण विषय पर भाजपा के प्रदेश महामंत्री. डा.पवन सैनी और दूसरे सत्र में प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने शक्ति केंद्र प्रमुखों को विस्तार से उनकी भूमिका के बारे में बताया। हालांकि इन पांच सत्रों में पंचायती राज पर आधारित चौथा सत्र इसलिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नजदीक है और पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव भाजपा सिंबल पर लड़ेगी या नहीं, इसका फैसला 15 अगस्त के बाद होगा।
उधर, निकाय चुनावों में भाजपा को जिन सीटों पर जीत की पूरी उम्मीद थी, इनमें कुछ सीटों पर इसलिए नुकसान झेलना पड़ा, क्योंकि भाजपा से जुड़े नेता एक दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर गए थे। ऐसे में पार्टी को सीटों का नुकसान हुआ। लेकिन पंचायती राज संस्थाओं के होने वाले चुनाव में भाजपा पूरी ताकत से मैदान में एक ही उम्मीदवार को उतार कर जीत को सुनिश्चित करना चाहती है और यह फैसला रायशुमारी के बाद ही लिया जाएगा।
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दूसरी ओर, पंचायत चुनाव से पूर्व भाजपा अपने शक्ति केंद्रों को भी मजबूत बनाने में जुटी है। इसके लिए सभी जिलों में शक्ति केंद्र प्रमुखों की कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि चुनाव के दौरान जनता तक भाजपा की नीतियां पहुंचाने के लिए शक्ति केंद्र एक अहम कड़ी है। इसी सोच के साथ भाजपा पंचायत चुनाव से पहले प्रदेश के सभी शक्ति केंद्रों को सक्रिय करना चाहती है।
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इसी के चलते मंगलवार को अंबाला में भी भाजपा के शक्ति केंद्र प्रमुखों की कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष समेत अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यशाला में भाजपा के नेताओं ने अलग-अलग सत्रों में
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केंद्र प्रमुखों को न केवल विभिन्न क्षेत्र की गतिविधियों से अवगत कराया बल्कि उन्हें केंद्र व राज्य सरकार की उपलब्धियों, बतौर कार्यकर्ता ग्राउंड जीरो पर जाकर कार्य करने की क्षमताओं को परखने और निखारने के अलावा उन्हें तमाम तरह बारीकियों से अवगत कराया।
पांच सत्रों में संपन्न हुई कार्यशाला में हर घर तिरंगा कार्यक्रम को सफल बनाने और इसके प्रोटोकाल का पालन करने के नियम भी उन्हें समझाए गए। इस दौरान अमर उजाला से विशेष बातचीत में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने बताया कि इस तरह की गतिविधियां संगठन को सक्रिय रखने की दृष्टि से साल भर चलाई जाती हैं ताकि भाजपा का कार्यकर्ता अनुशासन में रह कर पार्टी की मजबूती के लिए अपनी भूमिका का निर्वहन कर सकें।
भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. संजय शर्मा के मुताबिक अंबाला में 216 और प्रदेश में करीब 6000 शक्ति केंद्र हैं। एक शक्ति केंद्र में 4 से 5 पांच बूथ हैं। एक शक्ति केंद्र में एक पालक, दूसरे पर बूथ अध्यक्ष और तीसरे पर बीएलए टू, जिन्हें भाजपा त्रिदेव की उपाधि देती है, मौजूद रहते हैं। ये त्रिदेव सितंबर संभावित पंचायती राज चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने में किस तरह अपनी भूमिका निभा सकते हैं, इस बारे में भी उन्हें भाजपा नेताओं ने बताया।
पहले सत्र में बूथ सशक्तीकरण विषय पर भाजपा के प्रदेश महामंत्री. डा.पवन सैनी और दूसरे सत्र में प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने शक्ति केंद्र प्रमुखों को विस्तार से उनकी भूमिका के बारे में बताया। हालांकि इन पांच सत्रों में पंचायती राज पर आधारित चौथा सत्र इसलिए महत्वपूर्ण था, क्योंकि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव नजदीक है और पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव भाजपा सिंबल पर लड़ेगी या नहीं, इसका फैसला 15 अगस्त के बाद होगा।
उधर, निकाय चुनावों में भाजपा को जिन सीटों पर जीत की पूरी उम्मीद थी, इनमें कुछ सीटों पर इसलिए नुकसान झेलना पड़ा, क्योंकि भाजपा से जुड़े नेता एक दूसरे के खिलाफ मैदान में उतर गए थे। ऐसे में पार्टी को सीटों का नुकसान हुआ। लेकिन पंचायती राज संस्थाओं के होने वाले चुनाव में भाजपा पूरी ताकत से मैदान में एक ही उम्मीदवार को उतार कर जीत को सुनिश्चित करना चाहती है और यह फैसला रायशुमारी के बाद ही लिया जाएगा।