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Ambala: माता-पिता की संपत्ति नाम कराने के बाद नहीं छोड़ सकेंगे अनाथ, छावनी के एसडीएम की ओर से की गई पहल
Sat, 24 Jun 2023 10:22 AM IST
नवीन दलाल
संदीप कुमार, अंबाला (हरियाणा)
संदीप कुमार, अंबाला (हरियाणा)
Published by: नवीन दलाल
Updated Sat, 24 Jun 2023 10:22 AM IST
सार
वरिष्ठ नागरिक अगर अपने बच्चों के नाम संपत्ति कर देते हैं और बाद में संतान की ओर से उनका भरण-पोषण नहीं किया जाता तो वे अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए एसडीएम कोर्ट में केस डाल सकते हैं, लेकिन अभी तक भरण-पोषण की शर्त ट्रांसफर डीड में नहीं लिखी जाती थी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
माता-पिता से संपत्ति अपने नाम कराने के बाद उन्हें प्रताड़ित करना और अनाथ आश्रम में छोड़ देना कोई नहीं बात नहीं है, लेकिन अब अंबाला छावनी में शायद ऐसा नहीं होगा। इसके लिए छावनी के एसडीएम ने पहल की है। इसके तहत ट्रांसफर डीड लिखते समय मां-बाप की देखभाल और उनकी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी करने का उल्लेख अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में एसडीएम की ओर से तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को निर्देश दिए गए हैं।
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तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को दिए निर्देश
दरअसल, वरिष्ठ नागरिक अगर अपने बच्चों के नाम संपत्ति कर देते हैं और बाद में संतान की ओर से उनका भरण-पोषण नहीं किया जाता तो वे अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए एसडीएम कोर्ट में केस डाल सकते हैं, लेकिन अभी तक भरण-पोषण की शर्त ट्रांसफर डीड में नहीं लिखी जाती थी। इस कारण कोर्ट में जब मामलों की सुनवाई होती थी तो बच्चे यह तर्क देते थे कि ट्रांसफर डीड में यह शर्त लिखी ही नहीं गई।
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देखभाल और आवश्यकताएं पूरी करने की शर्त होगी शामिल
इस आधार पर अपने माता-पिता के भरण-पोषण के लिए वे उत्तरदायी नहीं हैं। इसे देखते हुए अब यह बात ट्रांसफर डीड में अनिवार्य कर दी गई है। ऐसे में अब संतान की ओर से देखभाल नहीं करने की स्थिति में संपत्ति वापस माता-पिता के पास चली जाएगी। इस बाबत एसडीएम छावनी सतिंद्र सिवाच ने तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस फैसले से ऐसे सभी माता-पिता को लाभ मिलेगा, जिनके बच्चे संपत्ति हड़पने के बाद उन्हें बेसहारा छोड़ देते हैं।
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आधारभूत सुविधाओं में रोटी, कपड़ा, मकान और दवा शामिल
नियमानुसार ट्रांसफर डीड, जिसके नाम हुई है उन बच्चों को अपने माता-पिता को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। इसमें रोटी, कपड़ा, मकान और दवा शामिल है। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं और उनके माता पिता एसडीएम की कोर्ट में केस डाल देते हैं तो बच्चों से वह संपत्ति लेकर उनके माता-पिता के नाम रजिस्ट्री दोबारा से ट्रांसफर की जा सकती है। विदित हो कि सीनियर सिटीजन मेंटेनेंस एक्ट-2007 के तहत ट्रिब्यूनल कोर्ट में केस डाला जाएगा। इस केस की सुनवाई एसडीएम करेंगे और अपील डीसी सुनेंगे। इसके बाद सेक्शन 23 के तहत ट्रांसफर डीड रद हो सकती है। इस प्रक्रिया में करीब 90 दिन लगेंगे।
अधिकारी के अनुसार
ट्रांसफर डीड में माता-पिता की देखभाल संबंधी लाइनें अनिवार्य रूप से लिखी जाएगी। इससे बच्चों की उनके प्रति जवाबदेही रहेगी। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं, ताकि बुजुर्गों के उत्पीड़न संबंधी मामलों में कमी आ सके। -सतिंद्र सिवाच, एसडीएम, अंबाला छावनी।