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Ambala News: छोटी व बड़ी आंत में फैले कैंसर की बनी पांच किलो की रसौली, पांच घंटे ऑपरेशन कर निकाली
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अटल कैंसर केयर केंद्र में ग्रेस्ट्रोसर्जन डॉ. जितेंद्र ऑपरेशन के बाद निकाली पांच किलो की रसौली
- फोटो : अमर उजाला
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। अटल कैंसर केयर केंद्र में छोटी व बड़ी आंत में फैले कैंसर का सफल ऑपरेशन हुआ। देरी के चलते यह कैंसर पेट की छोटी व बड़ी आंतों को अपनी चपेट में ले चुका था। साथ ही कैंसर के चलते आंतों के कुछ हिस्से ने पत्थरनुमा यानी रसौली का रूप ले लिया था। ग्रेस्ट्रो सर्जन डॉ. जतिंद्र चौहान ने अपनी टीम संग करीब पांच घंटे ऑपरेशन कर इस रसौली को निकाला। इससे अंबाला सिटी के बकनौर गांव निवासी 65 वर्षीय नरेश कुमार की जान बच गई। डॉक्टरों ने मरीज को एक सप्ताह से अपनी निगरानी में रखने के बाद छुट्टी दे दी।
समय पर उपचार न मिलने के कारण फैल रहा था कैंसर, दो चरणों में हुआ था जटिल ऑपरेशन
डॉ. जतिंद्र चौहान ने बताया कि एक माह पहले ही मरीज अस्पताल में उनकी ओपीडी में आया था। टेस्ट करवाने के बाद पता चला कि कैंसर फैलता जा रहा है। यह ऑपरेशन दो चरणों में हुआ था। पहले तो पेट में दूरबीन डालकर पता लगाया गया कि आखिर क्या स्थिति है। दूसरी बार में स्टेपलर पद्धति के साथ ऑपरेशन किया। छोटी आंत का 50 सेंटीमीटर व बड़ी आंत का 60 सेंटीमीटर का हिस्सा काटकर अलग कर दिया गया। बाकी हिस्से को स्टेपलर से जोड़ा गया। इस बीच पांच किलो रसौली निकली। इस ऑपरेशन के दौरान बेहोशी के डॉक्टर वेद पाठक, ट्रेनी डॉक्टर विद्या, नर्सिंग ऑफिसर ज्योति, ओटीए सुरेंद्र, अरूण, अजय व संजीव शामिल रहे।
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अंबाला। अटल कैंसर केयर केंद्र में छोटी व बड़ी आंत में फैले कैंसर का सफल ऑपरेशन हुआ। देरी के चलते यह कैंसर पेट की छोटी व बड़ी आंतों को अपनी चपेट में ले चुका था। साथ ही कैंसर के चलते आंतों के कुछ हिस्से ने पत्थरनुमा यानी रसौली का रूप ले लिया था। ग्रेस्ट्रो सर्जन डॉ. जतिंद्र चौहान ने अपनी टीम संग करीब पांच घंटे ऑपरेशन कर इस रसौली को निकाला। इससे अंबाला सिटी के बकनौर गांव निवासी 65 वर्षीय नरेश कुमार की जान बच गई। डॉक्टरों ने मरीज को एक सप्ताह से अपनी निगरानी में रखने के बाद छुट्टी दे दी।
समय पर उपचार न मिलने के कारण फैल रहा था कैंसर, दो चरणों में हुआ था जटिल ऑपरेशन
डॉ. जतिंद्र चौहान ने बताया कि एक माह पहले ही मरीज अस्पताल में उनकी ओपीडी में आया था। टेस्ट करवाने के बाद पता चला कि कैंसर फैलता जा रहा है। यह ऑपरेशन दो चरणों में हुआ था। पहले तो पेट में दूरबीन डालकर पता लगाया गया कि आखिर क्या स्थिति है। दूसरी बार में स्टेपलर पद्धति के साथ ऑपरेशन किया। छोटी आंत का 50 सेंटीमीटर व बड़ी आंत का 60 सेंटीमीटर का हिस्सा काटकर अलग कर दिया गया। बाकी हिस्से को स्टेपलर से जोड़ा गया। इस बीच पांच किलो रसौली निकली। इस ऑपरेशन के दौरान बेहोशी के डॉक्टर वेद पाठक, ट्रेनी डॉक्टर विद्या, नर्सिंग ऑफिसर ज्योति, ओटीए सुरेंद्र, अरूण, अजय व संजीव शामिल रहे।
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