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कुष्ठ आश्रम की 175 करोड़ की जमीन बेचने का मामला
Ambala
Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
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अंबाला। शहर के कालका चौक पर नेशनल हाइवे नंबर एक पर वीटा मिल्क प्लांट के सामने तकरीबन 175 करोड़ की लगभग साढ़े तीन एकड़ जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त मामले में तहसील कार्यालय के अफसर 40 साल तक आंखें मूंदे बैठे रहे। अब जब तहसील कार्यालयों के अफसरों को होश आई है, तो जमीन को बचाने के लिए विभाग व जिला प्रशासन दोनों जुट गया है।
गौरतलब हो कि तीन एकड़ पांच कनाल और 15 मरले जमीन सरकार की ओर से 1971 में कुष्ठ आश्रम बनाने के लिए लेपरोसी मिशन सोसाइटी को दी गई थी। उस वक्त यह जमीन तकरीबन 19 हजार रुपये टोकन प्राइज पर बनाने के लिए बेची गई थी। इस जमीन की उस वक्त नीलामी सिर्फ इसलिए नहीं की गई कि यहां कुष्ठ रोगियों के इलाज और उनके आवास के लिए लैपर होम बनाया जाएगा। नायब तहसील (बिक्री) अंबाला इस जमीन की उस वक्त देखरेख करते थे। लेकिन 1971 में भी टोकन प्राइज में देने के बाद यह तय हुआ था कि यहां केवल लैपर होम ही बनाया जाएगा। लेकिन उसके बाद तहसील कार्यालय के अफसर बदलते गए और सभी अफसरों ने इस जमीन के प्रति अपनी आंखें मूंदे रखीं। वर्तमान समय में इस जमीन की कीमत लगभग 175 करोड़ हो गई है। अब जब इस जमीन को खरीदकर इस पर बहुमंजिला इमारत खड़ी करने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया, तो इस जमीन की सुध तहसील कार्यालय को आई। उसके बाद जिला प्रशासन ने इस जमीन का केस वित्तायुक्त हरियाणा कोर्ट में लगा दिया है, जिस पर स्टे लग गया है।
कोट
अभी तक इस मामले में तहसील के अफसरों ने ध्यान क्यों नहीं दिया गया, इस मामले में वे कुछ नहीं कह सकते है। मामला मेरे संज्ञान में आने के बाद कार्रवाई की गई। पहले ऐसा क्यों हुआ, उन्हें नहीं मालूम।
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-अशोक सरदाना, नायब तहसीलदार, अंबाला शहर-
मामला बेहद गंभीर और हैरान करने वाला है। निसंदेह इस मामले में तहसील के अफसरों व कर्मचारियों की भी लापरवाही रही है। आगे की कार्रवाई जारी है।
-शेखर विद्यार्थी, डीसी
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गौरतलब हो कि तीन एकड़ पांच कनाल और 15 मरले जमीन सरकार की ओर से 1971 में कुष्ठ आश्रम बनाने के लिए लेपरोसी मिशन सोसाइटी को दी गई थी। उस वक्त यह जमीन तकरीबन 19 हजार रुपये टोकन प्राइज पर बनाने के लिए बेची गई थी। इस जमीन की उस वक्त नीलामी सिर्फ इसलिए नहीं की गई कि यहां कुष्ठ रोगियों के इलाज और उनके आवास के लिए लैपर होम बनाया जाएगा। नायब तहसील (बिक्री) अंबाला इस जमीन की उस वक्त देखरेख करते थे। लेकिन 1971 में भी टोकन प्राइज में देने के बाद यह तय हुआ था कि यहां केवल लैपर होम ही बनाया जाएगा। लेकिन उसके बाद तहसील कार्यालय के अफसर बदलते गए और सभी अफसरों ने इस जमीन के प्रति अपनी आंखें मूंदे रखीं। वर्तमान समय में इस जमीन की कीमत लगभग 175 करोड़ हो गई है। अब जब इस जमीन को खरीदकर इस पर बहुमंजिला इमारत खड़ी करने का प्रोजेक्ट तैयार किया गया, तो इस जमीन की सुध तहसील कार्यालय को आई। उसके बाद जिला प्रशासन ने इस जमीन का केस वित्तायुक्त हरियाणा कोर्ट में लगा दिया है, जिस पर स्टे लग गया है।
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कोट
अभी तक इस मामले में तहसील के अफसरों ने ध्यान क्यों नहीं दिया गया, इस मामले में वे कुछ नहीं कह सकते है। मामला मेरे संज्ञान में आने के बाद कार्रवाई की गई। पहले ऐसा क्यों हुआ, उन्हें नहीं मालूम।
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-अशोक सरदाना, नायब तहसीलदार, अंबाला शहर-
मामला बेहद गंभीर और हैरान करने वाला है। निसंदेह इस मामले में तहसील के अफसरों व कर्मचारियों की भी लापरवाही रही है। आगे की कार्रवाई जारी है।
-शेखर विद्यार्थी, डीसी