फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   8500 trees in the cantonment area, temperature is three degrees lower than the city

Ambala News: कैंटोनमेंट क्षेत्र में 8500 पेड़, तापमान शहर से तीन डिग्री कम

Thu, 05 Jun 2025 01:36 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 05 Jun 2025 01:36 AM IST
विज्ञापन
8500 trees in the cantonment area, temperature is three degrees lower than the city
अंबाला छावनी में कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन लारेंस रोड पर लगे अमलतास के पेड़। संवाद
अंबाला। कैंटोनमेंट क्षेत्र में 8500 पेड़ हैं। इनमें कुछ पेड़ ताे 500 वर्ष से अधिक पुराने हैं। इन पेड़ों को बचाने और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड के 20 कर्मचारी काम करते हैं।
विज्ञापन

खास बात यह है कि अंबाला शहर और कैंट से सबसे अधिक पेड़ पौधे इसी क्षेत्र में स्थित हैं। इसके कारण गर्मी में शहर की तुलना में यहां का तापमान तीन डिग्री सेल्सियस कम रहता है।
विज्ञापन

बरगद के पेड़ आकर्षण का केंद्र
कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र में छह के करीब बरगद के पेड़ हैं जोकि बरसों पुराने हैं, लेकिन आज भी यह पूरी तरह से हरियाली से भरपूर हैं। इनकी देखरेख के लिए भी बोर्ड की ओर से एहतियात बरती जा रही है। इन पेड़ों को खोखला होने से बचाने के लिए समय-समय पर दवा का छिड़काव किया जाता है, जिससे कि भूमि के कीड़े-मकौड़े इन्हें नुकसान न पहुंचा सकें। इसमें तीन पड़े छावनी के पटेल पार्क में, दो माल रोड पर और एक स्टाफ रोड पर है। इन बरगद के पेड़ों को पवित्र मानकर यहां लोग धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान पूजा भी करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक हजार पौधे लगाने का लक्ष्य
कैंटोनमेंट बोर्ड की ओर से प्रत्येक वर्ष एक हजार से अधिक पौधों को रोपित करने का लक्ष्य निर्धारित है। बोर्ड क्षेत्र के अधीन सड़कों और रिहायशी क्षेत्रों को इसके लिए चिह्नित किया है। यहां अमलतास और लेजिस्टोमिया के फूल वाले पाैधे रोपित किए जाते हैं। हरियाली के लिए नीम, पीपल, तनु और चक्रोसिया के पेड़ लगाए जाते हैं। इनके लगाने से लेकर देखभाल का जिम्मा विभागीय टीम के सुपुर्द होता है जोकि समय पर इन पेड़ों में हो रही वृद्धि की जांच करके रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करते हैं।
सूखी पत्तियों की बन रही खाद
पेड़ों से टूटी सूखी पत्तियों से खाद बनाने का काम किया जा रहा है जोकि बोर्ड के अधीन पार्काें में इस्तेमाल की जाती है। इस प्रक्रिया के तहत रोजाना अलग-अलग क्षेत्रों में 10 से अधिक टीमें भेजी जाती हैं जो पेड़ से टूटे सूखे पत्तों को एकत्रित करने का काम करती हैं और फिर इन्हें वाहन की मदद से खाद बनाने के लिए प्लांट तक भेजा जाता है।

वर्जन
कैंटोनमेंट बोर्ड की पहचान इसकी हरियाली है। इसे हरा-भरा रखने के लिए प्रत्येक वर्ष पौध रोपण किया जाता है। पेड़-पौधों की देखभाल के लिए भी प्रशिक्षित कर्मचारियों को तैनात किया गया है जो लगातार पेड़ों की निगरानी करते हैं।
राहुल आनंद शर्मा, सीईओ, कैंट बोर्ड।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed