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- मिड डे मील वर्करों के लिए बढ़ी परेशानी
Updated Sun, 13 Aug 2017 12:40 AM IST
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अंशुल शर्मा
अंबाला कैंट।
सरकारी स्कूलों में शिक्षा विभाग द्वारा तैनात मिड डे मील वर्करों के समक्ष समस्या खड़ी हो गई है। मिड डे मील वर्करों का मेडिकल स्वास्थ्य विभाग की ओर से निशुल्क न होकर निर्धारित राशि वसूली जाएगी। दरअसल, वर्करों को अपनी नौकरी बचाए रखने के लिए मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट देना पड़ता है और साल में दो बार शिक्षा विभाग के पास जमा होता है। लेकिन पहले ही स्कूलों में तैनात मिड डे वर्करों को विभाग को मेहनताना कम दिया जाता है और ऊपर से अस्पतालों में निशुल्क मेडिकल करवाने की सुविधा को छीन लिया गया। जिससे समस्त मिड डे मील वर्करों में गहरा रोष पनप रहा है।
इस तरह काम करते वर्कर
शिक्षा विभाग द्वारा पहली से आठवीं कक्षा तक के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए स्कूलों में ही मिड डे मील तैयार किया जाता है। बाकायदा विभाग ने स्कूलों में छात्रों की संख्या के अनुसार ही वर्कर तैनात कर रखी है, जो छात्रों के लिए पहले स्कूलों में ही खाना की तैयारी करती है। छात्रों को भोजन करवाने के बाद समस्त काम निपटाकर घरों को जाती है। मिड डे मील के तहत साफ सुथरा खाना देना महिला वर्करों की जिम्मेदारी होती है। कई स्कूलों में इनकी संख्या दो है तो किसी स्कूल में 3-4 भी है। जिलेभर के स्कूलों में मौजूदा वर्करों में इस फरमान के बाद रोष है। वर्करों का कहना है कि पहले ही विभाग द्वारा केवल पंद्रह सौ से लेकर पच्चीस सौ रुपये तक मेहनताना दिया जाता है, ऊपर से साल में दो बार मेडिकल करवाकर फिटनेस प्रमाण पत्र जमा करवाना पड़ता है। वर्करों का कहना है कि कई सालों से अस्पतालों में उनका मेडिकल निशुल्क होने पर थोड़ी राहत थी, परंतु अब मेडिकल की राशि जमा करवाने के फरमान ने महंगाई के समय में कमर तोड़ थी। परिवार का खर्च चलाना तक मुश्किल हो रहा है जोकि सरासर गलत है।
फरमान को लेकर असमंजस में दोनों विभाग
वर्करों के अस्पतालों में मेडिकल चार्ज लगने के फरमान के बाद दोनों विभागों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जहां पहले वर्कर शिक्षा विभाग के डायरेक्टर द्वारा जारी निशुल्क मेडिकल के लेटर को लेकर अपना निशुल्क मेडिकल कराते थे, अब उन्हें मेडिकल का चार्ज देना पड़ता है। वहीं अस्पताल स्टाफ भी नई गाइड लाइन के बाद मेडिकल करने को लेकर असमंजस में बना हुआ है। इस असमंजस के कारण कई मिड डे मिल वर्कर शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों से संपर्क कर राहत की गुहार लगा रहे है।
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नई गाइड लाइन के तहत वसूल किए जाएंगे पैसे
सरकारी अस्पताल में पुरानी गाइड लाइन के तहत मेडिकल किया जाता था। अब नई गाइड लाइन जारी होने के बाद अस्पतालों में मरीज को छोड़कर हर व्यक्ति के मेडिकल करवाने के पैसे लगते है। मिड डे मील वर्करों के मेडिकल में होने वाले टेस्ट के पैसे वसूल किए जाएंगे। फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से कोई निशुल्क मेडिकल करने का लेटर उन्हें नहीं मिला है।
- डॉ. विनोद गुप्ता, सीएमओ, अंबाला
अधिकारियों से की जाएगी बात
मेरे संज्ञान में ये मामला नहीं है, अगर मिड डे मील वर्करों के मेडिकल की पैसे लग रहे है तो संबंधित विभाग के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी।
- उमा शर्मा, डीईओ, अंबाला
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अंबाला कैंट।
सरकारी स्कूलों में शिक्षा विभाग द्वारा तैनात मिड डे मील वर्करों के समक्ष समस्या खड़ी हो गई है। मिड डे मील वर्करों का मेडिकल स्वास्थ्य विभाग की ओर से निशुल्क न होकर निर्धारित राशि वसूली जाएगी। दरअसल, वर्करों को अपनी नौकरी बचाए रखने के लिए मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट देना पड़ता है और साल में दो बार शिक्षा विभाग के पास जमा होता है। लेकिन पहले ही स्कूलों में तैनात मिड डे वर्करों को विभाग को मेहनताना कम दिया जाता है और ऊपर से अस्पतालों में निशुल्क मेडिकल करवाने की सुविधा को छीन लिया गया। जिससे समस्त मिड डे मील वर्करों में गहरा रोष पनप रहा है।
इस तरह काम करते वर्कर
शिक्षा विभाग द्वारा पहली से आठवीं कक्षा तक के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए स्कूलों में ही मिड डे मील तैयार किया जाता है। बाकायदा विभाग ने स्कूलों में छात्रों की संख्या के अनुसार ही वर्कर तैनात कर रखी है, जो छात्रों के लिए पहले स्कूलों में ही खाना की तैयारी करती है। छात्रों को भोजन करवाने के बाद समस्त काम निपटाकर घरों को जाती है। मिड डे मील के तहत साफ सुथरा खाना देना महिला वर्करों की जिम्मेदारी होती है। कई स्कूलों में इनकी संख्या दो है तो किसी स्कूल में 3-4 भी है। जिलेभर के स्कूलों में मौजूदा वर्करों में इस फरमान के बाद रोष है। वर्करों का कहना है कि पहले ही विभाग द्वारा केवल पंद्रह सौ से लेकर पच्चीस सौ रुपये तक मेहनताना दिया जाता है, ऊपर से साल में दो बार मेडिकल करवाकर फिटनेस प्रमाण पत्र जमा करवाना पड़ता है। वर्करों का कहना है कि कई सालों से अस्पतालों में उनका मेडिकल निशुल्क होने पर थोड़ी राहत थी, परंतु अब मेडिकल की राशि जमा करवाने के फरमान ने महंगाई के समय में कमर तोड़ थी। परिवार का खर्च चलाना तक मुश्किल हो रहा है जोकि सरासर गलत है।
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फरमान को लेकर असमंजस में दोनों विभाग
वर्करों के अस्पतालों में मेडिकल चार्ज लगने के फरमान के बाद दोनों विभागों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जहां पहले वर्कर शिक्षा विभाग के डायरेक्टर द्वारा जारी निशुल्क मेडिकल के लेटर को लेकर अपना निशुल्क मेडिकल कराते थे, अब उन्हें मेडिकल का चार्ज देना पड़ता है। वहीं अस्पताल स्टाफ भी नई गाइड लाइन के बाद मेडिकल करने को लेकर असमंजस में बना हुआ है। इस असमंजस के कारण कई मिड डे मिल वर्कर शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों से संपर्क कर राहत की गुहार लगा रहे है।
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नई गाइड लाइन के तहत वसूल किए जाएंगे पैसे
सरकारी अस्पताल में पुरानी गाइड लाइन के तहत मेडिकल किया जाता था। अब नई गाइड लाइन जारी होने के बाद अस्पतालों में मरीज को छोड़कर हर व्यक्ति के मेडिकल करवाने के पैसे लगते है। मिड डे मील वर्करों के मेडिकल में होने वाले टेस्ट के पैसे वसूल किए जाएंगे। फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से कोई निशुल्क मेडिकल करने का लेटर उन्हें नहीं मिला है।
- डॉ. विनोद गुप्ता, सीएमओ, अंबाला
अधिकारियों से की जाएगी बात
मेरे संज्ञान में ये मामला नहीं है, अगर मिड डे मील वर्करों के मेडिकल की पैसे लग रहे है तो संबंधित विभाग के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी।
- उमा शर्मा, डीईओ, अंबाला