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प्याज महंगा हो रहा है... और झूम उठी थी अंबाला की जनता
Updated Fri, 17 Aug 2018 01:17 AM IST
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आलोक सिंह रघुवंशी
अंबाला कैंट। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को अंबाला से और जिलेवासियों को उनसे खासा लगाव था। हर चुनाव में यहां के लोगों को बेसब्री से उनके आगमन का इंतजार रहता था। वर्ष 1996 में कैंट में चुनाव रैली के दौरान भाषण शुरू करते वक्त जैसे ही कहा कि प्याज महंगा हो रहा है... तभी यहां की जनता झूम उठी थी। दरअसल अटल बिहारी वाजपेयी की भाषण शैली के सभी कायल थे। वीरवार शाम सरल स्वभाव वाले अटल बिहारी की मौत की खबर सुनते ही जिलेवासियों की आंखें नम हो गईं।
सांसद रतनलाल कटारिया बताते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी के मार्गदर्शन में वह एक छोटे से परिवार से उठकर संसद तक पहुंचने में कामयाब हुए हैं। उनके शब्द हमेशा उनके लिए प्रेरणा ही रहे हैं और रहेंगे। उन्होंने बताया कि वह अंतिम बार वर्ष 2000 में अंबाला सिटी में विधायक वीना छिब्बर के चुनाव प्रचार में पुलिस लाइन मैदान में पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने वर्ष 1996 में कैंट में चुनाव रैली को संबोधित किया था। इस दौरान काफी भीड़ उमड़ी हुई थी। उन्होंने कांग्रेस शासन में प्याज महंगा होने के मुद्दे को रैली में उछाला। उन्होंने जैसे ही प्याज महंगा हो रहा है... कहा तभी लोगों ने हाथ ऊपर करके उनका सम्मान किया। इससे पूर्व वर्ष 1977 में इंदिरा गांधी के शासनकाल में विदेश मंत्री थे तब रूक्मणि देवी हॉल में आए थे।
आरएसएस और बाद में राजनीति से जुड़े बुजुर्ग सोमनाथ खुराना, लक्ष्मण दास कुमार और प्रेम लाल शर्मा बताते हैं कि अटलजी सबसे पहले 1967 के चुनाव में प्रचार करने के लिए अंबाला शहर और छावनी में आए थे। उसके बाद तो उन्हें अंबाला का उनसे और उनका अंबाला से इतना ज्यादा लगाव हो गया कि उसके बाद का कोई चुनाव उनकी जनसभा के बिना पूरा नहीं होता था। उन्हें जिलेवासियों की मांग को पूरा करने यहां आना ही पड़ता था। वह इतने साधारण स्वभाव के थे कि यहां आकर वह सर्राफा बाजार स्थित पार्टी कार्यालय में जमीन पर बैठकर ही सारी कार्रवाई करते थे, उन्होंने कभी अपने बड़े होने का अहसास नहीं करवाया। अंबाला में वह दलित नेता सूरजभान के सबसे ज्यादा करीब थे। 5 जून 1994 को उनकी बेटी की शादी में भारी गर्मी में सड़क मार्ग से ही अंबाला पहुंच गए। यहां उन्हें सर्किट हाउस में ठहराया गया। अंबाला दौरे में अटल जी कभी भी होटल या गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम को कभी प्राथमिकता नहीं देते थे। हमेशा व न केवल किसी कार्यकर्ता के निवास पर ही भोजन किया करते थे बल्कि किसी कार्यकर्ता के निवास पर उसी के परिवार के बीच रात्रि ठहराव भी किया करते थे।
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अंबाला कैंट। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी को अंबाला से और जिलेवासियों को उनसे खासा लगाव था। हर चुनाव में यहां के लोगों को बेसब्री से उनके आगमन का इंतजार रहता था। वर्ष 1996 में कैंट में चुनाव रैली के दौरान भाषण शुरू करते वक्त जैसे ही कहा कि प्याज महंगा हो रहा है... तभी यहां की जनता झूम उठी थी। दरअसल अटल बिहारी वाजपेयी की भाषण शैली के सभी कायल थे। वीरवार शाम सरल स्वभाव वाले अटल बिहारी की मौत की खबर सुनते ही जिलेवासियों की आंखें नम हो गईं।
सांसद रतनलाल कटारिया बताते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी के मार्गदर्शन में वह एक छोटे से परिवार से उठकर संसद तक पहुंचने में कामयाब हुए हैं। उनके शब्द हमेशा उनके लिए प्रेरणा ही रहे हैं और रहेंगे। उन्होंने बताया कि वह अंतिम बार वर्ष 2000 में अंबाला सिटी में विधायक वीना छिब्बर के चुनाव प्रचार में पुलिस लाइन मैदान में पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने वर्ष 1996 में कैंट में चुनाव रैली को संबोधित किया था। इस दौरान काफी भीड़ उमड़ी हुई थी। उन्होंने कांग्रेस शासन में प्याज महंगा होने के मुद्दे को रैली में उछाला। उन्होंने जैसे ही प्याज महंगा हो रहा है... कहा तभी लोगों ने हाथ ऊपर करके उनका सम्मान किया। इससे पूर्व वर्ष 1977 में इंदिरा गांधी के शासनकाल में विदेश मंत्री थे तब रूक्मणि देवी हॉल में आए थे।
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आरएसएस और बाद में राजनीति से जुड़े बुजुर्ग सोमनाथ खुराना, लक्ष्मण दास कुमार और प्रेम लाल शर्मा बताते हैं कि अटलजी सबसे पहले 1967 के चुनाव में प्रचार करने के लिए अंबाला शहर और छावनी में आए थे। उसके बाद तो उन्हें अंबाला का उनसे और उनका अंबाला से इतना ज्यादा लगाव हो गया कि उसके बाद का कोई चुनाव उनकी जनसभा के बिना पूरा नहीं होता था। उन्हें जिलेवासियों की मांग को पूरा करने यहां आना ही पड़ता था। वह इतने साधारण स्वभाव के थे कि यहां आकर वह सर्राफा बाजार स्थित पार्टी कार्यालय में जमीन पर बैठकर ही सारी कार्रवाई करते थे, उन्होंने कभी अपने बड़े होने का अहसास नहीं करवाया। अंबाला में वह दलित नेता सूरजभान के सबसे ज्यादा करीब थे। 5 जून 1994 को उनकी बेटी की शादी में भारी गर्मी में सड़क मार्ग से ही अंबाला पहुंच गए। यहां उन्हें सर्किट हाउस में ठहराया गया। अंबाला दौरे में अटल जी कभी भी होटल या गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम को कभी प्राथमिकता नहीं देते थे। हमेशा व न केवल किसी कार्यकर्ता के निवास पर ही भोजन किया करते थे बल्कि किसी कार्यकर्ता के निवास पर उसी के परिवार के बीच रात्रि ठहराव भी किया करते थे।
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