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- चोरी की वारदातों से परेशान हो चुके हैं अंबाला के नागरिक
Updated Fri, 24 Nov 2017 02:30 AM IST
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आरटीआई से खुलासा, अंबाला में एक महीने में हो रहे दो मर्डर
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
आरटीआई के आंकड़ों पर नजर डाले तो अंबाला में हर महीने दो मर्डर और दो व्यक्ति लापता हो रहे हैं। वहीं हर महीने औसतन चोरी की 50 घटनाएं हो रही हैं। यह हालात तब हैं, जब जिला में चौदह थाने हैं, जिनमें महिला थाना भी शामिल है और पीसीआर और पुलिस गश्त के दावे भी किए जा रहे हैं। इस बारे में एसपी अंबाला अभिषेक जोरवाल का कहना है कि चोरी की घटनाएं तो हुई हैं, लेकिन इनमें से कई वारदातों को सुलझाया भी गया है। पुलिस ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई करती है।
आरटीआई के तहत यह सूचना मांगी गई थी जनवरी 2014 से लेकर सितंबर 2017 तक अंबाला में चोरी की कितने मामले सामने आए हैं। जानकारी में बताया गया कि उक्त अवधि के दौरान अंबाला में चोरी के 2296 मामले सामने आए हैं। यानी जिला में हर माह चोरी की 50 वारदातें सामने आ रही हैं, जबकि औसतन हर दो दिनों में चोरी की तीन वारदातें सामने आती हैं। जिला में जहां चौदह थाने हैं, वहीं पुलिस चौकियां हैं, जिनके जिम्मे अंबाला के छह ब्लाक, 430 गांव शामिल हैं। दावा किया जा रहा है कि पुलिस की गश्त की जाती है, जबकि आंकड़े बताते हैं कि औसतन हर रोज अंबाला में चोरी की वारदात तो होती है। दूसरी ओर यदि हत्या और लापता के आंकड़ों पर नजर डाले तो अंबाला में हर पंद्रह दिन में एक हत्या का आंकड़ा सामने आ रहा है। उक्त अवधि में दो बच्चों की हत्याएं भी हुई हैं। इस अवधि के दौरान जिला अंबाला में हत्या के 95 मामले दर्ज किए गए हैं।
चालान के आंकड़ों से पुलिस मालामाल
पुलिस द्वारा इस अवधि के दौरान जमकर चालान किए गए हैं। जनवरी 2014 से लेकर सितंबर 2017 तक 196588 चालान किए गए हैं। यानी हर महीने औसतन 4273 चालान मतलब रोजाना 142 चालान किए गए हैं। इन चालान से उक्त अवधि के दौरान 5,02,97400 रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है। हर महीने पुलिस को चालान से 10.93 लाख रुपये हासिल हुए हैं।
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अंबाला में चोरी की वारदातों पर कोई लगाम नहीं लग पाई है। आंकड़े बताते हैं कि किस तरह से चोरों के हौसले बुलंद हैं। बेशक पुलिस के दावे कुछ भी हो, लेकिन हकीकत यही है कि कई मामलों में पीड़ितों को थाने में भी मामला दर्ज करवाने में पसीने छूटे हैं।
- पवन बांगा, आरटीआई एक्टिविस्ट एवं पूर्व यूथ उपप्रधान अंबाला
चोरी के आंकड़ों से साफ है कि पुलिस के लिए यह चुनौती है। बेशक मामले सुलझते हैं, लेकिन फिर भी चोरी की वारदातों पर यदि लगाम कसनी है, तो पुलिस को सख्त कदम उठाने होंगे। - सतीश कनौजिया, अध्यक्ष कनौजिया महासभा अंबाला
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
आरटीआई के आंकड़ों पर नजर डाले तो अंबाला में हर महीने दो मर्डर और दो व्यक्ति लापता हो रहे हैं। वहीं हर महीने औसतन चोरी की 50 घटनाएं हो रही हैं। यह हालात तब हैं, जब जिला में चौदह थाने हैं, जिनमें महिला थाना भी शामिल है और पीसीआर और पुलिस गश्त के दावे भी किए जा रहे हैं। इस बारे में एसपी अंबाला अभिषेक जोरवाल का कहना है कि चोरी की घटनाएं तो हुई हैं, लेकिन इनमें से कई वारदातों को सुलझाया भी गया है। पुलिस ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई करती है।
आरटीआई के तहत यह सूचना मांगी गई थी जनवरी 2014 से लेकर सितंबर 2017 तक अंबाला में चोरी की कितने मामले सामने आए हैं। जानकारी में बताया गया कि उक्त अवधि के दौरान अंबाला में चोरी के 2296 मामले सामने आए हैं। यानी जिला में हर माह चोरी की 50 वारदातें सामने आ रही हैं, जबकि औसतन हर दो दिनों में चोरी की तीन वारदातें सामने आती हैं। जिला में जहां चौदह थाने हैं, वहीं पुलिस चौकियां हैं, जिनके जिम्मे अंबाला के छह ब्लाक, 430 गांव शामिल हैं। दावा किया जा रहा है कि पुलिस की गश्त की जाती है, जबकि आंकड़े बताते हैं कि औसतन हर रोज अंबाला में चोरी की वारदात तो होती है। दूसरी ओर यदि हत्या और लापता के आंकड़ों पर नजर डाले तो अंबाला में हर पंद्रह दिन में एक हत्या का आंकड़ा सामने आ रहा है। उक्त अवधि में दो बच्चों की हत्याएं भी हुई हैं। इस अवधि के दौरान जिला अंबाला में हत्या के 95 मामले दर्ज किए गए हैं।
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चालान के आंकड़ों से पुलिस मालामाल
पुलिस द्वारा इस अवधि के दौरान जमकर चालान किए गए हैं। जनवरी 2014 से लेकर सितंबर 2017 तक 196588 चालान किए गए हैं। यानी हर महीने औसतन 4273 चालान मतलब रोजाना 142 चालान किए गए हैं। इन चालान से उक्त अवधि के दौरान 5,02,97400 रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है। हर महीने पुलिस को चालान से 10.93 लाख रुपये हासिल हुए हैं।
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अंबाला में चोरी की वारदातों पर कोई लगाम नहीं लग पाई है। आंकड़े बताते हैं कि किस तरह से चोरों के हौसले बुलंद हैं। बेशक पुलिस के दावे कुछ भी हो, लेकिन हकीकत यही है कि कई मामलों में पीड़ितों को थाने में भी मामला दर्ज करवाने में पसीने छूटे हैं।
- पवन बांगा, आरटीआई एक्टिविस्ट एवं पूर्व यूथ उपप्रधान अंबाला
चोरी के आंकड़ों से साफ है कि पुलिस के लिए यह चुनौती है। बेशक मामले सुलझते हैं, लेकिन फिर भी चोरी की वारदातों पर यदि लगाम कसनी है, तो पुलिस को सख्त कदम उठाने होंगे। - सतीश कनौजिया, अध्यक्ष कनौजिया महासभा अंबाला