{"_id":"6840a6ca23c5138bea0e25ca","slug":"12-years-ago-the-park-was-a-jungle-built-a-herbal-park-with-friends-ambala-news-c-36-1-amb1003-143866-2025-06-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: 12 वर्ष पहले पार्क था जंगल, दोस्तों के साथ बनाया हर्बल पार्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: 12 वर्ष पहले पार्क था जंगल, दोस्तों के साथ बनाया हर्बल पार्क
विज्ञापन
प्राेफेसर डॉ. सुरेश देसवाल
अंबाला सिटी। पर्यावरण को संरक्षित रखने की बात शहर के कुछ लोगों के लिए मिशन की तरह है। वे लोगों को पौधे दे रहे हैं। पार्क को सजा रहे हैं तो संस्था के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के मिशन को बढ़ावा दे रहे हैं।
इस अभियान में 30 वर्ष से लेकर 85 वर्ष तक के लोग हैं। खास बात है कि इन पर्यावरण प्रहरियों का काम दूसरों को भी प्रोत्साहित कर रहा है। यही कारण है कि इन्हें अलग-अलग मंचों पर सम्मान भी मिल रहा है।
पार्क में लगे हैं 1400 पेड़-पौधे
हर्बल वेलफेयर सोसाइटी प्रधान कुलवंत सिंह वालिया ने बताया कि 12 वर्ष पूर्व वे जब दोस्तों डॉक्टर केएल घुमड़ और प्रोफेसर एससी चावला के साथ सड़क पर सैर कर रहे थे। तब पार्क के सामने हर्बल पार्क का बोर्ड लगा था। जब उन्होंने पार्क के अंदर जाकर देखा तो 12 फुट गड्ढे में सांप चल रहा था। फुटपाथ पर घास उगी थी। तब उनको लगा कि पार्क को ठीक करना चाहिए।
विज्ञापन
इसके बाद उन्होंने प्रकृति से जुड़े लोगों को जोड़ने के लिए पौधारोपण शुरू किया। आज यहां पर 1400 पेड़ लग चुके हैं। पार्क सुबह चार बजे खुल जाता है और रात 10 बजे बंद होता है। खास बात है कि उन्होंने लोगों को प्रकृति से जोड़ा तो आज सुबह और शाम के समय पार्क में किसी मॉल जैसी भीड़ देखने को मिलती है।
फोटो : 18
लोगों को उपहार में देते हैं पौधे
छावनी के शास्त्री कॉलोनी निवासी 85 वर्षीय रामस्वरूप तनेजा का पर्यावरण प्रेम इस उम्र में भी बरकरार है। वह अपने आप आने वाले हर व्यक्ति अपनी तरफ से पौधे उपहार में देते हैं। वे बताते हैं कि वह 60 वर्ष से पर्यावरणीय कार्यों से जुड़े हैं। बीएसएनएल से सेवानिवृत्त होने के बाद इस काम को उन्होंने मिशन बना लिया। पिता का प्रकृति से प्रेम देखकर बेटा डाक्टर संजय तनेजा भी इस मुहिम में साथ हो लिया। वह 30 वर्ष से चंडीगढ़ में फूलों की प्रदर्शनी लगाते आ रहे हैं और कई ईनाम भी जीत चुके हैं। उन्होंने घर पर तुलसी, पाम, विंका, हेबीकस, गुलाब, शुगर फ्री प्लांट, मोरिंगा, अश्वगंदा, बेल पत्थर, नीम व अन्य तरह से प्लांट लगाए हुए हैं। वह प्रशासन की और से कई बार सम्मानित हो चुके हैं।
फोटो : 16
ग्रीन मैन के नाम से जाने जाते हैं डॉ. सुरेश
सेवानिवृत प्रोफेसर ग्रीनमैन डाॅ. सुरेश देसवाल ने बताया कि वह 20 वर्ष से पर्यावरण से जुड़े हैं। वे 12 वर्ष से पेड़ लगाओ जीवन बचाओ और ग्रीन अर्थ क्लीन अर्थ के संस्थापक और संयोजक है। उन्होंने एनसीसी, वन विभाग, रोटरी क्लब, रोटरी क्लब और रेलवे अधिकारियों के साथ मिलकर स्कूल, काॅलेज और यूनिवर्सिटी में एक लाख पौधे लगा चुके हैं। डॉ. देसवाल ने बताया कि वह अभी तक पर्यावरण के सरंक्षण के लिए सरकार व विभिन्न संस्थानों के साथ मिलकर एक लाख से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं। वह जब भी किसी कार्यक्रम में जाते हैं तो त्रिवेणी जरूर लगाते हैं और अपनी जेब खर्च से पौधारोपण कार्यक्रम पर भी खर्च करते हैं।
फोटो: 42
सेवानिवृत्त होने के बाद पर्यावरण से जोड़ा नाता
बैंक से सेवानिवृत्त सेक्टर नौ में रहने वाले राकेश शर्मा ने बताया कि वे लंबे समय से पर्यावरण के क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे अपने क्षेत्र में पौधारोपण करके अपने क्षेत्र में भी लोगों को जागरूक करने का काम करते हैं। उन्होंने मृदा विज्ञान विषय से परास्नातक हैं। इसलिए वे अपने क्षेत्र की मिट्टी को बेहतर बनाने के लिए पौधारोपण करते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए पौधारोपण ही सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। अभी तक वे भी 2 हजार पौधे लगा चुके हैं। इतना ही नहीं पौधे लगाने के बाद वे उनकी देखभाल भी करते हैं।
विज्ञापन
इस अभियान में 30 वर्ष से लेकर 85 वर्ष तक के लोग हैं। खास बात है कि इन पर्यावरण प्रहरियों का काम दूसरों को भी प्रोत्साहित कर रहा है। यही कारण है कि इन्हें अलग-अलग मंचों पर सम्मान भी मिल रहा है।
विज्ञापन
पार्क में लगे हैं 1400 पेड़-पौधे
हर्बल वेलफेयर सोसाइटी प्रधान कुलवंत सिंह वालिया ने बताया कि 12 वर्ष पूर्व वे जब दोस्तों डॉक्टर केएल घुमड़ और प्रोफेसर एससी चावला के साथ सड़क पर सैर कर रहे थे। तब पार्क के सामने हर्बल पार्क का बोर्ड लगा था। जब उन्होंने पार्क के अंदर जाकर देखा तो 12 फुट गड्ढे में सांप चल रहा था। फुटपाथ पर घास उगी थी। तब उनको लगा कि पार्क को ठीक करना चाहिए।
विज्ञापन
इसके बाद उन्होंने प्रकृति से जुड़े लोगों को जोड़ने के लिए पौधारोपण शुरू किया। आज यहां पर 1400 पेड़ लग चुके हैं। पार्क सुबह चार बजे खुल जाता है और रात 10 बजे बंद होता है। खास बात है कि उन्होंने लोगों को प्रकृति से जोड़ा तो आज सुबह और शाम के समय पार्क में किसी मॉल जैसी भीड़ देखने को मिलती है।
फोटो : 18
लोगों को उपहार में देते हैं पौधे
छावनी के शास्त्री कॉलोनी निवासी 85 वर्षीय रामस्वरूप तनेजा का पर्यावरण प्रेम इस उम्र में भी बरकरार है। वह अपने आप आने वाले हर व्यक्ति अपनी तरफ से पौधे उपहार में देते हैं। वे बताते हैं कि वह 60 वर्ष से पर्यावरणीय कार्यों से जुड़े हैं। बीएसएनएल से सेवानिवृत्त होने के बाद इस काम को उन्होंने मिशन बना लिया। पिता का प्रकृति से प्रेम देखकर बेटा डाक्टर संजय तनेजा भी इस मुहिम में साथ हो लिया। वह 30 वर्ष से चंडीगढ़ में फूलों की प्रदर्शनी लगाते आ रहे हैं और कई ईनाम भी जीत चुके हैं। उन्होंने घर पर तुलसी, पाम, विंका, हेबीकस, गुलाब, शुगर फ्री प्लांट, मोरिंगा, अश्वगंदा, बेल पत्थर, नीम व अन्य तरह से प्लांट लगाए हुए हैं। वह प्रशासन की और से कई बार सम्मानित हो चुके हैं।
फोटो : 16
ग्रीन मैन के नाम से जाने जाते हैं डॉ. सुरेश
सेवानिवृत प्रोफेसर ग्रीनमैन डाॅ. सुरेश देसवाल ने बताया कि वह 20 वर्ष से पर्यावरण से जुड़े हैं। वे 12 वर्ष से पेड़ लगाओ जीवन बचाओ और ग्रीन अर्थ क्लीन अर्थ के संस्थापक और संयोजक है। उन्होंने एनसीसी, वन विभाग, रोटरी क्लब, रोटरी क्लब और रेलवे अधिकारियों के साथ मिलकर स्कूल, काॅलेज और यूनिवर्सिटी में एक लाख पौधे लगा चुके हैं। डॉ. देसवाल ने बताया कि वह अभी तक पर्यावरण के सरंक्षण के लिए सरकार व विभिन्न संस्थानों के साथ मिलकर एक लाख से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं। वह जब भी किसी कार्यक्रम में जाते हैं तो त्रिवेणी जरूर लगाते हैं और अपनी जेब खर्च से पौधारोपण कार्यक्रम पर भी खर्च करते हैं।
फोटो: 42
सेवानिवृत्त होने के बाद पर्यावरण से जोड़ा नाता
बैंक से सेवानिवृत्त सेक्टर नौ में रहने वाले राकेश शर्मा ने बताया कि वे लंबे समय से पर्यावरण के क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे अपने क्षेत्र में पौधारोपण करके अपने क्षेत्र में भी लोगों को जागरूक करने का काम करते हैं। उन्होंने मृदा विज्ञान विषय से परास्नातक हैं। इसलिए वे अपने क्षेत्र की मिट्टी को बेहतर बनाने के लिए पौधारोपण करते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को बचाने के लिए पौधारोपण ही सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। अभी तक वे भी 2 हजार पौधे लगा चुके हैं। इतना ही नहीं पौधे लगाने के बाद वे उनकी देखभाल भी करते हैं।

प्राेफेसर डॉ. सुरेश देसवाल

प्राेफेसर डॉ. सुरेश देसवाल

प्राेफेसर डॉ. सुरेश देसवाल