जानिए, आपके सवाल और मुख्यमंत्री हुड्डा के जवाब

Vijay Kumarविजय कुमार Updated Mon, 25 Nov 2013 04:16 PM IST
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अमर उजाला के इस साप्ताहिक कॉलम के तहत पेश हैं पाठकों के सवाल और मुख्यमंत्री हुड्डा के जवाब।
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प्रश्न:-मुख्यमंत्री महोदय, मेरे पति 31 दिसंबर को खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने विभाग से मिलने वाले लाभों, ग्रेच्युटी और पेंशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक न तो पेंशन शुरू की गई और न ही कोई अन्य लाभ दिया गया।
श्रीमान जी, मेरे पति के खिलाफ कुछ आरोप भी लगाए गए थे, जिनकी जांच भी पूरी हो गई है। इसके बावजूद भी उनको ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया गया।
महोदय, मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप मेरी इस समस्या का समाधान कराने की कृपा करें।  
-चंद्रकांता पत्नी श्री चरणजीत, मकान नंबर 277/8, अर्बन इस्टेट, करनाल

उत्तर-आपके पति चरणजीत ने 31 अगस्त, 2012 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी और उस समय उनके विरुद्घ नियम 7 के तहत चार्जशीट लंबित थी।

प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) हरियाणा द्वारा उन्हें स्वीकृत की गई अस्थायी पेंशन 28 जून, 2013 को जारी कर दी गई।

पेंशन के अलावा उन्हें देय जीआईएस की 29,611 रुपये की राशि 9 अक्तूबर, 2012 को तथा जीपीएफ की 12,52,255 रुपये की अंतिम अदायगी 23 जनवरी, 2013 को अदा की गई।

इसी प्रकार, 23 अप्रैल, 2013 को उन्हें 300 दिनों की छुट्टियों के लिए 3,75,650 रुपये राशि की अदायगी की गई।

इसके अतिरिक्त उनके विरुद्घ अभी दो मामले लंबित होने के कारण उनकी ग्रेच्युटी और कम्यूटेशन की राशि रोक कर रखी गई है। इनके विरुद्घ नियम 7 के तहत चार्जशीट है तथा इनके विरुद्घ राज्य चौकसी ब्यूरो से भी 4 अप्रैल, 2013 को रिपोर्ट प्राप्त हुई थी, जिसे उपायुक्त भिवानी की टिप्पणी के लिए भेजा गया है।

इस संबंध में स्मरण पत्र देने के बावजूद अभी जवाब अपेक्षित है। सिविल सेवा नियम खंड-II के अनुसार कर्मचारी के विरुद्घ लंबित मामलों का अंतिम निर्णय होने के बाद ही कम्यूटेशन और ग्रेच्युटी की राशि समायोजित/जारी की जा सकती है।

प्रश्न :- मुख्यमंत्री महोदय, हमारे गांव में बाल्मीकि बस्ती के पास एक कनाल 17 मरले की जमीन सामूहिक शौचालय के इस्तेमाल के लिए कटी हुई है।

इस जमीन पर ग्राम पंचायत की ओर से सामूहिक शौचालय बनाने के लिए प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है। इसके बावजूद सरपंच ने शौचालय का निर्माण अब तक नहीं कराया है।

इससे बाल्मीकि बस्ती के लोग गांव के दक्षिण में बनी कंक्रीट की फिरनी पर शौच करते हैं। गांव का मुख्य रास्ता होने के कारण यहां से निकलने में गांव के लोगों को काफी परेशानी होती है। महोदय, हमारी आपसे प्रार्थना है कि आप ग्राम पंचायत भादसों को गांव में सामूहिक शौचालय बनवाने का निर्देश देने की कृपा करें।
-गुरदयाल सिंह (नंबरदार), गांव भादसों, तहसील इंद्री, करनाल

उत्तर- आपकी शिकायत के संबंध में खंड विकास एवं अधिकारी, इंद्री ने मौके का निरीक्षण करके रिपोर्ट दी है। मौका पर जिस भूमि पर शौचालय बनाए जाने का प्रस्ताव पास किया हुआ है, उस जमीन पर वृक्ष खड़े हैं और वे वृक्ष अभी कटवाने के लायक नहीं हैं।

बाल्मीकी बस्ती के साथ पिछड़े वर्ग की चौपाल के पास महिलाओं और पुरुषों के लिए 10-10 शौचालय बनवाए हुए हैं, जिनका प्रयोग किया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि बाल्मीकि बस्ती से इन शौचालयों की दूरी केवल 3 एकड़ है। आप जिस भूमि पर शौचालय बनवाने का अनुरोध कर रहे हैं वह भूमि भी बाल्मीकि बस्ती से उतनी ही दूरी पर है। अभी इन शौचालयों का उपयोग किया जा सकता है तथा यदि आपको निजी शौचालय बनवाने की आवश्यकता है तो आप जिला ग्रामीण विकास एजेंसी, करनाल से संपर्क करके निर्मल भारत अभियान योजना के अंतर्गत निजी शौचालय बनवा सकते हैं।

प्रश्न :- मुख्यमंत्री महोदय, मैं आपसे जानना चाहता हूं कि वर्ष 2006 के बाद शिक्षा विभाग में नियुक्त अध्यापक की असामयिक मृत्यु होने पर उसके परिजनों को कौन से लाभ दिए जाते हैं। इसके अलावा उसके परिजनों को कौन सी पेंशन व्यवस्था के तहत पेंशन दिए जाने का प्रावधान है।
-रामनाथ, गांव और डाकखाना मुसिबल, तहसील जगाधरी, जिला यमुनानगर।

उत्तर- वर्ष 2006 के बाद शिक्षा विभाग में नियुक्त अध्यापक की असामयिक मृत्यु होने पर उसके परिजनों को एक अगस्त 2006 की अनुग्रह अनुदान नीति की हिदायतों अनुसार मासिक वित्तीय सहायता 25,000 रुपये की अनुदान राशि तथा जीआईएस, लीव इन्कैशमेंट और ग्रेच्युटी की राशि दिए जानेे का प्रावधान है। जहां तक पेंशन का संबंध है, नियमानुसार इसका कोई प्रावधान नहीं है।

प्रश्न:-मुख्यमंत्री महोदय, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की ओर से स्वतंत्रता सेनानी कोटे के तहत मुझे ड्रा द्वारा एक मरले का प्लाट आवंटित किया गया था, लेकिन अब तक प्लाट का कब्जा नहीं दिया गया।

इस संबंध में मैंने विभाग के अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर एफिडेविट भी दिया। इसके बावजूद मुझे प्लाट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। महोदय, मैं आपसे जानना चाहता हूं कि मुझे यह प्लाट कब तक मिलेगा।

-मेहर सिंह, गांव भंगाव, डाकखाना कक्कड़ माजरी, तहसील नारायणगढ़, अंबाला।

उत्तर- आपकी शिकायत के संबंध में संपदा अधिकारी, हुडा, पंचकूला ने अवगत करवाया है कि आपने स्वतंत्रता सेनानी श्रेणी के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग योजना-2001 के अंतर्गत 14 मार्च, 2001 को एक मरला प्लाट के लिए आवेदन किया था और इस दौरान ड्रॉ के माध्यम से सेक्टर-20 पंचकूला में आपका एक मरला का प्लाट नंबर 335 निकला था।

लेकिन आवेदन/विवरणिका के नियम और शर्त संख्या (iv) के अनुसार आप द्वारा शपथ पत्र के रूप में आय का प्रमाण पत्र दिया जाना आवश्यक था कि आपकी कुल पारिवारिक आय 2100 रुपये प्रतिमास से अधिक नहीं है। आपसे 18 मार्च, 2002 को आवश्यक शपथ पत्र देने के लिए कहा गया ताकि आपको अलाटमेंट लेटर जारी किया जा सके।

इस संबंध में आपने 23 जुलाई, 2002 के अपने पत्र के अनुसार कहा कि मुझ पर आय की शर्त लागू नहीं होती है, क्योंकि मैंने केवल स्वतंत्रता सेनानी कोटे में प्लाट के लिए आवेदन किया था। अधिकांशत: ऐसा कोई भी स्वतंत्रता सेनानी नहीं है, जिसकी आय 5000-6000 रुपये प्रतिमाह से कम हो। इसलिए योजना में निहित प्रावधानों के विपरीत होने के कारण आप इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

आप आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की श्रेणी के अंतर्गत नहीं आते हैं। इसलिए अलाटमेंट पत्र जारी नहीं किया गया। आप द्वारा जमा की गई धरोहर राशि चेक संख्या 183283, दिनांक 6 मई 2005 के माध्यम से वापस कर दी गई थी।

प्रश्न:-मुख्यमंत्री महोदय, मेरी लड़की ने पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप फॉर माइनारिटी स्टूडेंट (सिख) के लिए आवेदन किया था। जब वह अपना आवेदन कालेज में जमा करवाने पहुंची तो उसे प्रमाणपत्रों को प्रमाणित करवाकर जमा करवाने के लिए कहा गया। महोदय, मैं आपसे जानना चाहता हूं कि इस स्कालरशिप के आवेदन के लिए क्या प्रावधान हैं और इसके साथ किन प्रमाणपत्रों की आवश्यकता पड़ती है।
-अमृत सिंह, एएमसी, रेलवे रोड, अंबाला शहर।

उत्तर- पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप लेने के लिए पात्रता प्रक्रिया पूरी करनी होती है। पिछली अंतिम परीक्षा में विद्यार्थी के अंक 50 फीसदी से कम न हों या समकक्ष ग्रेड हासिल किया हो।

उसके माता-पिता या अभिभावकों की सभी स्रोतों से वार्षिक आय दो लाख रुपये से अधिक न हो। इसी प्रकार, छात्रवृत्ति के लिए धर्म-संबंधी एक प्रमाण-पत्र हो। यदि विद्यार्थी गलत बयान/प्रमाण-पत्र पर छात्रवृत्ति लेेता पाया जाता है तो उसकी छात्रवृत्ति तुरंत रद्द हो जाएगी। विद्यार्थी हाजिरी में नियमित हो।

गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर आय का स्वप्रमाणित प्रमाण पत्र होना चाहिए। हॉस्टलर या डे-स्कालर का प्रमाण-पत्र स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय अथॉरिटी से प्रमाणित हो। इसके अलावा इस छात्रवृत्ति योजना के तहत लाभ उठाने वाले विद्यार्थी इसी उद्देश्य के लिए किसी अन्य छात्रवृत्ति योजना का लाभ नहीं उठा सकेंगे।
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