World No Tobacco Day: रंगबाजी या तनाव में खींचते हैं कश, तो अब करें बस...
गोरखपुर जिले के 44.6 फीसदी पुरुष तथा 5.4 फीसदी महिलाएं तंबाकू का सेवन कर रही हैं। तंबाकू के कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, बांझपन, पेट में बच्चे की मौत जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है।
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राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के 44.6 फीसदी पुरुष और 5.4 महिलाएं तंबाकू का सेवन किसी न किसी रूप में कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह लोग कैंसर के दर्द झेलने के कगार पर हैं। चिकित्सकों के मुताबिक पूर्वांचल में 90 फीसदी मरीज मुंह के कैंसर के हैं। ये मरीज इलाज के लिए समय से अस्पताल भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसकी वजह से 70 फीसदी मरीजों के जबड़े तक निकालने पड़ रहे हैं।
धूम्रपान करने वाली महिलाओं के शिशु गंभीर बीमारियों से हो सकते हैं पीड़ित
सीएमओ डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि तंबाकू कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, श्वसन रोग, बांझपन, पेट में बच्चे की मौत समेत कई प्रकार की बीमारियों का मुख्य कारण है। बताया कि तंबाकू सेवन के कारण मुंह, गले, फेफड़े और पेट का कैंसर होता है। यदि महिलाएं धूम्रपान कर रही हैं तो उनका शिशु कम वजन को हो सकता है या गर्भाशय में उसकी मौत हो सकती है। पैदा होने के बाद शिशु कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो सकते हैं, जो लोग पहले से दमाग्रस्त हैं उनके लिए तंबाकू और धूम्रपान और भी मुश्किलें बढ़ा सकता है। तंबाकू में मौजूद 7000 से अधिक रसायनों में से 250 रसायन बेहद नुकसानदायक हैं।
नशा छोड़ने में लें मनोचिकित्सक की मदद
सीएमओ ने बताया कि तंबाकू व खासकर धूम्रपान का सेवन छोड़ दिया जाए तो ह्रदय रोग का खतरा 50 फीसदी कम हो जाता है। तंबाकू का सेवन छोड़ने के लिए मनोचिकित्सक की मदद ले सकते हैं। इलायची, अनार दाने की गोलियां, भुनी हुई सौंफ, मिश्री जैसी वैकल्पिक चीजों का सेवन कर भी तंबाकू छोड़ा जा सकता है।
केस-एक
शहर के रहने वाले 50 वर्षीय व्यक्ति ने 18 साल की उम्र में गुटखा का सेवन शुरू किया था। 24 साल की उम्र तक आते-आते एक दिन में 40-40 गुटखा खा लेते थे। 28 की उम्र में पहुंचे तो मुंह खुलना बंद होने लगा। चिकित्सक की सलाह के बाद भी गुटखे का सेवन बंद नहीं किया। 40 वर्ष की उम्र में दांत में दिक्कत हुई तो डॉक्टर ने बायोप्सी कराई और कैंसर का पता चला। नई दिल्ली में इलाज कराया तो जबड़ा निकालना पड़ा। इलाज में छह लाख रुपये खर्च हो गए। साथ ही डॉक्टर ने कड़ी चीज खाने से मना कर दिया है।
केस- दो
शहर के ही रहने वाले 42 वर्षीय व्यक्ति ने 23 साल की उम्र में गुटखा खाना शुरू किया। परिजनों ने कई बार मना किया, लेकिन नहीं माने। 33 साल की उम्र में कई दांत खराब हो गए। डॉक्टर ने गुटखा न खाने की सलाह दी। लेकिन, इसके बाद भी वह नहीं माने। इस बीच 38 साल की उम्र में पता चला की कैंसर का पहला स्टेज है। इसके बाद डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन अंत में उनके जबड़े निकालने पड़े। अब उनका मुंह टेढ़ा हो चुका है और बोलने में भी दिक्कत हो रही है।