विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस: बदलती जीवन शैली ने बढ़ाया ब्रेन ट्यूमर का खतरा, 3 साल में ही बढ़ गए 25 फीसदी मरीज
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तीन साल पहले जहां ब्रेन ट्यूमर के दो से तीन मरीज आते थे, अब उनकी संख्या छह हो गई है। पूर्वांचल की बात करें तो पिछले तीन-चार सालों के भीतर 25 प्रतिशत मरीज ब्रेन ट्यूमर के बढ़े हैं। डॉक्टर बदलती जीवन शैली को रोग के होने की बड़ी वजह बताते हैं।
कॉलेज में न्यूरो विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश सक्सेना ने बताया कि मस्तिष्क में कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने पर गांठ बन जाती है। इसकी वजह से ब्रेन ट्यूमर होता है। यह बेहद खतरनाक बीमारी है। बीमारी का असर पूरे शरीर पर होता है। इसलिए लक्षण मिलने पर तत्काल इलाज कराना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कई लोग ट्यूमर को कैंसर का रूप मानते हैं जबकि ट्यूमर से कैंसर होने के चांस नहीं होते हैं। बताया कि खाने-पीने के सामान में केमिकल का बढ़ता प्रयोग, एक्स-रे रेडिएशन जैसे कारक ट्यूमर को बढ़ावा देते हैं।
ये हैं लक्षण
डॉ. राकेश सक्सेना ने बताया कि सुबह उठने पर अक्सर उल्टी होना, सिर में हमेशा दर्द रहना, मिर्गी की तरह दौरे पड़ना, बोलने की क्षमता प्रभावित होना, आंख की रोशनी कम होना, अचानक वजन बढ़ना ट्यूमर के लक्षण हैं।
न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश सक्सेना ने कहा कि ब्रेन ट्यूमर गंभीर बीमारी है। पूर्वांचल में यह बीमारी तेजी से बढ़ी है। इससे बचाव के लिए विटामिन सी से भरपूर चीजें लोग खाएं। मिलावटी खाद्य पदार्थों से दूरी बनाते हुए जंक फूड से दूर रहें, साथ ही अधिक से अधिक पानी पिएं।