डॉक्टर की सलाह: बड़ों से बच्चों में फैल रहा वायरल इंफेक्शन...निमोनिया का भी खतरा
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप सिंह बताते हैं-पांच साल से कम उम्र के बच्चे जब सर्दी-जुकाम की चपेट में आते हैं तो उनके कमजोर फेफड़ों पर इसका बुरा असर जल्द पड़ता है। उन्हें सांस लेने में दिक्कत आने लगती है। एक बार संक्रमण की जद में आने पर बच्चे को बार-बार परेशानी होती है।
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गोरखपुर में बदल रहा मौसम आपके लाडले को बीमार न कर दे, इसलिए खुद के साथ उसका भी ख्याल रखना जरूरी है। अगर मां-बाप को सर्दी-जुकाम है तो छोटे बच्चे को भी संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। इस साल वायरल इंफेक्शन ने अभी तक लोगों को परेशान कर रखा है। उसका ही नतीजा है कि ठंड का मौसम शुरू होते ही बच्चों में तेजी से निमोनिया के मामले बढ़ने लगे हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग संस्थान भवन में चल रही बाल रोग की ओपीडी में बृहस्पतिवार को छह मामले ऐसे आए, जिनमें बच्चों को बुखार के दूसरे दिन ही सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। जिला अस्पताल की ओपीडी में भी कई ऐसे बच्चे आए थे। निजी अस्पतालों में तो ऐसे बाल रोगियों की भीड़ है। डॉक्टरों का कहना है कि यह मौसम में बदलाव का असर है।
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पांच साल से कम उम्र के बच्चों को अधिक दिक्कत
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप सिंह बताते हैं-पांच साल से कम उम्र के बच्चे जब सर्दी-जुकाम की चपेट में आते हैं तो उनके कमजोर फेफड़ों पर इसका बुरा असर जल्द पड़ता है। उन्हें सांस लेने में दिक्कत आने लगती है।
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एक बार संक्रमण की जद में आने पर बच्चे को बार-बार परेशानी होती है। जो बच्चे शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं, उन पर इसका असर भी अधिक होता है। अगर छोटे बच्चे में संक्रमण होता है तो उन्हें ठीक होने में ज्यादा वक्त लगता है।
- अगर घर में छोटे बच्चे हैं तो सर्दी-जुकाम के मरीज को उससे दूर रखें।
- बच्चों को कुछ भी खिलाने से पहले साबुन से अच्छी तरह हाथ साफ करें।
- भीड़ वाले इलाके में मास्क का प्रयोग करें। सर्दी-जुकाम होने पर घर में भी मास्क पहनें।
- बच्चों को सुबह-शाम हल्के गर्म कपड़े पहनाना शुरू कर दें।
- सर्दी-बुखार होने पर खुद से इलाज के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें।
- बच्चे को सांस लेने में दिक्कत या सीने में घरघराहट है तो लापरवाही बिल्कुल न करें।