चालान भरने के लिए बेचा मां का मंगलसूत्र: विजय की दर्दभरी कहानी सुन एआरटीओ ने जमा की पूरी रकम, टेंपो का इंश्योरेंस भी कराया
एआरटीओ कार्यालय में सिंहपुर ताल्ही गांव के रहने वाले विजय कुमार पहुंचे। उन्हें परेशान देख एआरटीओ ने उन्हें अपने पास बुलाया और उनकी समस्या जानने की कोशिश की। विजय अपनी दर्दभरी कहानी सुनाते हुए फफक पड़े। पूरी कहानी सुनने के बाद एआरटीओ ने चालान की पूरी रकम स्वयं जमा करने के साथ ही टेंपो का इंश्योरेंस भी कराया।
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नियम भी न टूटे और मानवता से भरोसा भी न उठे, ऐसा संतुलन बनाना महराजगंज के एआरटीओ आरसी भारतीय से सीखा जा सकता है। बुधवार को एआरटीओ कार्यालय में कुछ ऐसा हुआ जिसे, जिसने भी सुना, वह द्रवित हो गया और एआरटीओ की प्रशंसा करने से नहीं चूका। दरअसल, आर्थिक रूप से कमजोर युवक के ऑटो चालक पिता का 24500 रुपये का चालान कट गया था। मां का मंगलसूत्र बेचने के बाद भी रुपये कम पड़ रहे थे। यह बात जब आरसी भारतीय की जानकारी में आई तो उन्होंने न सिर्फ चालान की रकम स्वयं भरी, बल्कि गरीबी के कारण पढ़ाई छोड़ चुके युवक को पढ़ाने की पेशकश भी की।
एआरटीओ कार्यालय में बुधवार दोपहर करीब 2 बजे सिंहपुर ताल्ही गांव के विजय कुमार पहुंचे। मगर संकोच में कुछ कह नहीं पा रहे थे। उन्हें परेशान देख एआरटीओ ने उन्हें अपने पास बुलाया और उनकी समस्या जानने की कोशिश की। उनके पूछने पर विजय ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उनके पिता राजकुमार ऑटो चलाते हैं। उन्हें एक आंख से दिखता भी नहीं है। कुछ दिन पहले टेंपो का चालान हो गया है। 24,500 रुपये चालान के जमा करने हैं। मां का मंगलसूत्र बेचने के बाद भी केवल 13 हजार रुपये ही जमा हो पाए हैं। यह बताते हुए विजय फफक पड़े। उनकी दर्द भरी कहानी सुनने के बाद एआरटीओ ने पहले उन्हें पानी पिलाया, फिर विस्तार से पूरी बात पूछी।
विजय ने आगे बताया कि मैं मजदूरी करता हूं। फेल होने के बाद हाईस्कूल की पढ़ाई भी नहीं कर सका। बीते आठ जून को टेंपो का चालान कट गया था। जिसका 24,500 रुपये जुर्माना जमा करना है। इस उम्मीद में यहां आया कि शायद शेष रकम माफ हो जाएगी। परिवार में छह बहने हैं। एक बहन की शादी हुई है। पूरी कहानी सुनने के बाद एआरटीओ ने चालान की पूरी रकम स्वयं जमा करने के साथ ही टेंपो का इंश्योरेंस भी कराया। इसके बाद कुछ नकद राशि देकर भविष्य में हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया। उन्होंने युवक की पढ़ाई का खर्च उठाने की भी पेशकश की। एआरटीओ की दरियादिली देखकर कार्यालय में मौजूद सभी कर्मी एवं अन्य लोगों ने सराहना की।
पीड़ित की पूरी बात सुनने के बाद चालान की पूरी रकम जमा कर दी। विजय को पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। अगर वह पढ़ना चाहेगा तो उसकी हर संभव मदद करूंगा। उसकी समस्याओं को देखते हुए मदद करने का मन किया। पीड़ितों की मदद करने से मन को शांति मिलती है। - आरसी भारतीय, एआरटीओ, महराजगंज
समस्या सुनने के बाद एआरटीओ ने पूरी मदद की। चालान की पूरी रकम जमा करने के बाद टेंपो का इंश्योरेंश भी करा दिया। उन्होंने भविष्य में हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। मेरी पूरी समस्या दूर हो गई। चालान जमा होने के बाद राहत मिली है। - विजय कुमार, सिंहपुर ताल्ही