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एमएमएमयूटी के पूर्व छात्र को कैंब्रिज विवि में मिला दाखिला: बीपीसीएल में कार्यरत रहते शुरू की खुद की कंपनी, पढ़ें सफलता कहानी

Sun, 06 Mar 2022 04:03 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: आकाश दुबे Updated Sun, 06 Mar 2022 04:03 PM IST
सार

मूल रूप से फर्रुखाबाद के रहने वाले वारीश प्रताप एमएमएमयूटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के 2016 बैच के छात्र रहे हैं। वारीश ने बीपीसीएल में एक्जीक्यूटिव मैनेजर (रिटेल बिजनेस) के रूप कार्य करते हुए अपनी कंपनी सुस्लैब्स फाउंडेशन इंडिया की स्थापना की। अब उन्हें प्रतिष्ठित कैंब्रिज विश्वविद्यालय में एम.फिल एनर्जी स्टडीज पाठ्यक्रम में दाखिला मिला है।
 

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Varish got admission in Cambridge university started his own company as an executive manager in BPCL
कैंब्रिज विवि. में प्रवेश पाने वाले वारीश प्रताप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र वारीश प्रताप को प्रतिष्ठित कैंब्रिज विश्वविद्यालय में एम.फिल एनर्जी स्टडीज पाठ्यक्रम में दाखिला मिला है। वारीश एमएमएमयूटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के 2016 बैच के छात्र रहे हैं। 2016 में एमएमएमयूटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक करने के बाद वारीश ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में करियर शुरू किया था। वर्ष 2021 में वारीश ने बीपीसीएल में एक्जीक्यूटिव मैनेजर (रिटेल बिजनेस) के रूप कार्य करते हुए अपनी कंपनी सुस्लैब्स फाउंडेशन इंडिया की स्थापना की। फिलहाल वे सुस्लैब्स फाउंडेशन इंडिया के संस्थापक निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। 

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फर्रुखाबाद से कैंब्रिज विवि. तक तय किया सफर 
वारीश मूल रूप से फर्रुखाबाद के रहने वाले हैं। उन्होंने एमएमएमयूटी (मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विवि.) में अपने अध्ययनकाल में भी बहुत सी उपलब्धियां हासिल की हैं। वारीश ने बी.टेक के दौरान राष्ट्रीय स्तर की ऑल टेरेन व्हीकल (हर तरह की सतह पर चलने में सक्षम कार) मेकिंग प्रतियोगिता 'एस ए ई बहा' में एमएमएमयूटी की टीम का नेतृत्व किया था। बी.टेक के दौरान ही वारीश को नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज की छात्र फेलोशिप और ऋषि शुक्ला मेमोरियल स्कॉलरशिप भी मिली थी। 
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पहले ही प्रयास में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पाई थी 301वीं रैंक
वारीश को राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित परीक्षा ग्रेजुएट एप्टिट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) में प्रथम प्रयास में 301वीं  रैंक प्राप्त हुई थी। ऊर्जा खपत एवं वाहन प्रदूषण पर किए गए कार्य के लिए बी,टेक के दौरान ही बेस्ट बी.टेक प्रोजेक्ट पुरस्कार भी वारीश को मिला था। वारीश ने शिक्षा मंत्रालय की एक परियोजना के अंतर्गत भौतिकी की दो पुस्तकों का तकनीकी अनुवाद भी किया है।
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फिलहाल वारीश अंतर्राष्ट्रीय संस्था ' क्लाइमेट इंटेरेक्टिव' के सदस्य के रूप में जलवायु परिवर्तन पर जन-जागरण का कार्य भी कर रहे हैं । वारीश फर्रुखाबाद के मूल निवासी श्री शिव कुमार चतुर्वेदी एवं श्रीमती मंजू चतुर्वेदी के पुत्र हैं। वारीश अपनी उपलब्धियों का श्रेय अपने शिक्षकों प्रो. बीके पांडेय, प्रो, डीके सिंह, प्रो. वीके गिरि, डॉ. एसपी सिंह सहित अपने मित्रों को देते हैं। उनकी उपलब्धि पर मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग सहित अन्य विभाग के शिक्षकों ने हर्ष व्यक्त किया है।

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