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यूपी पंचायत चुनाव: जातीय समीकरण साधकर चुनावी वैतरणी पार करने के प्रयास में जुटी बसपा, जानिए कैसे
Mon, 05 Apr 2021 10:09 AM IST
vivek shukla
राजन राय, गोखपुर।
राजन राय, गोखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 05 Apr 2021 10:09 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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जिला पंचायत सदस्य चुनाव में फतह हासिल करने के लिए बसपा ने जातीय समीकरण को तवज्जो दी है। कई सामान्य सीटों पर सैंथवार बिरादरी के लोगों को टिकट दे दिया गया है। जबकि सामान्य महिला सीटों पर ओबीसी को भी टिकट मिला है। टिकट बंटवारे में यह प्रयोग जानबूझकर जातीय संतुलन बनाने के लिए किया गया है।
हालांकि बसपा की यह रणनीति कितनी कारगर होती है या नहीं, यह नतीजे ही तय करेंगे। लेकिन पार्टी के क्षत्रपों ने टिकट वितरण में जातीय समीकरण के अलावा क्षेत्रवार आबादी का भी ख्याल रखा है। पार्टी ने अभी तक चार सूची जारी कर 56 समर्थित उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। जिसमें नौ सवर्ण, 26 ओबीसी, 19 एससी और दो मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। इस सूची में पिछली बार भी चुनाव लड़ने वाले कई प्रत्याशी हैं, जिन पर पार्टी ने दांव लगाया है। पांच से ज्यादा ऐसी सीटें हैं जहां यादव या मौर्य समाज के लोगों को चुनाव में उतारा गया है। ताकि कैडर वोटों के साथ ही जातीय फैक्टर भी काम आए। चौथी सूची में पार्टी ने सैंथवार, यादव, निषाद बिरादरी से ज्यादा उम्मीदवार उतारे हैं।
निषाद बिरादरी में पैठ बनाने की कवायद
पार्टी ने जिला पंचायत चुनाव के बहाने निषाद बिरादरी में पैठ बनाने की कवायद शुरू की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही वजह है कि दस प्रत्याशी निषाद बिरादरी से पार्टी ने उम्मीदवार बनाए हैं। ताकि विधानसभा चुनाव में जिले में निषाद वोटों में पकड़ मजबूत हो सके। गोरखपुर में निषाद मतदाताओं की संख्या करीब साढ़े चार लाख है।
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जिलाध्यक्ष बसपा घनश्याम राही ने बताया कि सपा-भाजपा के उम्मीदवारों को ध्यान में रखकर जातीय संतुलन के आधार पर टिकट दिया जा रहा है। पार्टी की पूरी कोशिश है कि चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतकर लाएं। टिकट बंटवारे में हर वर्ग का ख्याल रखा गया है।
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हालांकि बसपा की यह रणनीति कितनी कारगर होती है या नहीं, यह नतीजे ही तय करेंगे। लेकिन पार्टी के क्षत्रपों ने टिकट वितरण में जातीय समीकरण के अलावा क्षेत्रवार आबादी का भी ख्याल रखा है। पार्टी ने अभी तक चार सूची जारी कर 56 समर्थित उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। जिसमें नौ सवर्ण, 26 ओबीसी, 19 एससी और दो मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। इस सूची में पिछली बार भी चुनाव लड़ने वाले कई प्रत्याशी हैं, जिन पर पार्टी ने दांव लगाया है। पांच से ज्यादा ऐसी सीटें हैं जहां यादव या मौर्य समाज के लोगों को चुनाव में उतारा गया है। ताकि कैडर वोटों के साथ ही जातीय फैक्टर भी काम आए। चौथी सूची में पार्टी ने सैंथवार, यादव, निषाद बिरादरी से ज्यादा उम्मीदवार उतारे हैं।
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निषाद बिरादरी में पैठ बनाने की कवायद
पार्टी ने जिला पंचायत चुनाव के बहाने निषाद बिरादरी में पैठ बनाने की कवायद शुरू की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही वजह है कि दस प्रत्याशी निषाद बिरादरी से पार्टी ने उम्मीदवार बनाए हैं। ताकि विधानसभा चुनाव में जिले में निषाद वोटों में पकड़ मजबूत हो सके। गोरखपुर में निषाद मतदाताओं की संख्या करीब साढ़े चार लाख है।
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जिलाध्यक्ष बसपा घनश्याम राही ने बताया कि सपा-भाजपा के उम्मीदवारों को ध्यान में रखकर जातीय संतुलन के आधार पर टिकट दिया जा रहा है। पार्टी की पूरी कोशिश है कि चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतकर लाएं। टिकट बंटवारे में हर वर्ग का ख्याल रखा गया है।