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Exclusive: 'छोटी राजधानी' में भेज दी घटिया खेल सामग्री, जानिए कैसे सामने आई गड़बड़ी?
Fri, 27 Nov 2020 11:56 AM IST
vivek shukla
संतोष सिंह, गोरखपुर।
संतोष सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 27 Nov 2020 11:56 AM IST
सार
- यूपी के 75 जिलों में 24 करोड़ 87 लाख 11 हजार 60 रुपये की हुई है खरीदारी
- 25 हजार महिला व पुरुष मंगलदलों में बांटी जानी है खेल सामग्री, लेकिन कार्यालयों के स्टोर में रखी गईं
- प्रमुख सचिव बोलीं, घटिया खेल सामग्री की आपूर्ति हुई तो जांच कराके करेंगे कार्रवाई
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रांतीय रक्षक दल, विकास दल एवं युवा कल्याण ने घटिया खेल सामग्री खरीदी है। 'छोटी राजधानी' यानी गोरखपुर में ही वालीबॉल नेट और इंफ्लेटर खराब भेजा गया है। इस पर सत्यापन समिति के सदस्य व गोरखपुर के अपर सिटी मजिस्ट्रेट द्वितीय ने आपत्ति जताई है। साथ ही संबंधित कंपनियों को पत्र भेजकर गुणवत्ता परक खेल सामग्री आपूर्ति करने को कहा है। इसकी सूचना प्रमुख सचिव व महानिदेशक को भेजी गई है। खेल सामग्री युवा कल्याण अधिकारी या फिर उपनिदेशकों के कार्यालयों के स्टोर में रखी हुईं हैं।
गोरखपुर और बस्ती मंडल के सात जिलों सहित यूपी के 75 जिलों में महिला व पुरुष मंगलदलों को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में 24 करोड़ 87 लाख 11 हजार 60 रुपये की खेल सामग्री खरीदी गई है। आई फिट स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड इंदिरानगर लखनऊ, स्टर्लिंग स्पोर्ट्स इंडस्ट्रीज उद्योगपुरम मेरठ और सॉकर इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड गोमतीनगर लखनऊ ने वालीबॉल, वालीबॉल नेट, फुटबाल, डिप्स स्टैंड इंफ्लेटर और स्किपिंग रोप की आपूर्ति की है।
इसका वितरण 75 जिलों के 25 हजार मंगल दलों में किया जाना था, लेकिन अभी तक नहीं हुआ। इसकी बड़ी वजह घटिया खेल सामग्री की आपूर्ति बताई जा रही है। 'छोटी राजधानी' में भी घटिया खेल सामग्री भेजने से गुरेज नहीं किया गया है।
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गोरखपुर और बस्ती मंडल के सात जिलों सहित यूपी के 75 जिलों में महिला व पुरुष मंगलदलों को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 में 24 करोड़ 87 लाख 11 हजार 60 रुपये की खेल सामग्री खरीदी गई है। आई फिट स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड इंदिरानगर लखनऊ, स्टर्लिंग स्पोर्ट्स इंडस्ट्रीज उद्योगपुरम मेरठ और सॉकर इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड गोमतीनगर लखनऊ ने वालीबॉल, वालीबॉल नेट, फुटबाल, डिप्स स्टैंड इंफ्लेटर और स्किपिंग रोप की आपूर्ति की है।
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इसका वितरण 75 जिलों के 25 हजार मंगल दलों में किया जाना था, लेकिन अभी तक नहीं हुआ। इसकी बड़ी वजह घटिया खेल सामग्री की आपूर्ति बताई जा रही है। 'छोटी राजधानी' में भी घटिया खेल सामग्री भेजने से गुरेज नहीं किया गया है।
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गोरखपुर की सत्यापन समिति ने खेल सामग्री की गुणवत्ता का अध्ययन 15 जून 2020 को किया था। इससे पता चला कि वालीबॉल नेट व इंफ्लेटर घटिया है। इस पर गोरखपुर के अपर सिटी मजिस्ट्रेट ने कड़ी आपत्ति जताई और आपूर्ति करने वाली कंपनी से नई खेल सामग्री की आपूर्ति की बात कही।
इसी का नतीजा रहा कि गोरखपुर में खेल सामग्री का वितरण नहीं किया गया। घटिया खेल सामग्री की आपूर्ति का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। कहा जा रहा है कि इस तरह की गड़बड़ी यूपी के अलग-अलग जिलों में हुई है। यदि खेल सामग्री की गुणवत्ता की जांच करा ली जाए तो बड़ा गोलमाल सामने आएगा।
विकास दल एवं युवा कल्याण की प्रमुख सचिव व महानिदेशक प्रांतीय रक्षक दल डिंपल वर्मा ने बताया कि खेल सामग्री की खरीद जैम पोर्टल की मदद से की गई है। ई-टेंडरिंग हुई थी। विभागीय मंत्री उपेंद्र तिवारी और खरीद समिति के अनुमोदन से खरीदारी हुई है। जैम पोर्टल पर जिन कंपनियों ने टेंडर डाला था, उन्हीं से खरीद का नियम है। खेल सामग्री की गुणवत्ता खराब है, तो जांच कराके कार्रवाई की जाएगी। कोई बाजार की वर्तमान कीमत अब निकाले, यह बहुत मायने नहीं रखता है। जिलाधिकारियों की नामित समिति के सदस्यों ने सत्यापन किया था, फिर भुगतान हुआ है।
इसी का नतीजा रहा कि गोरखपुर में खेल सामग्री का वितरण नहीं किया गया। घटिया खेल सामग्री की आपूर्ति का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। कहा जा रहा है कि इस तरह की गड़बड़ी यूपी के अलग-अलग जिलों में हुई है। यदि खेल सामग्री की गुणवत्ता की जांच करा ली जाए तो बड़ा गोलमाल सामने आएगा।
विकास दल एवं युवा कल्याण की प्रमुख सचिव व महानिदेशक प्रांतीय रक्षक दल डिंपल वर्मा ने बताया कि खेल सामग्री की खरीद जैम पोर्टल की मदद से की गई है। ई-टेंडरिंग हुई थी। विभागीय मंत्री उपेंद्र तिवारी और खरीद समिति के अनुमोदन से खरीदारी हुई है। जैम पोर्टल पर जिन कंपनियों ने टेंडर डाला था, उन्हीं से खरीद का नियम है। खेल सामग्री की गुणवत्ता खराब है, तो जांच कराके कार्रवाई की जाएगी। कोई बाजार की वर्तमान कीमत अब निकाले, यह बहुत मायने नहीं रखता है। जिलाधिकारियों की नामित समिति के सदस्यों ने सत्यापन किया था, फिर भुगतान हुआ है।
आरटीआई कार्यकर्ता की पहल पर गड़बड़ी सामने आई
विकास दल एवं युवा कल्याण गोरखपुर के उपनिदेशक प्रांतीय रक्षक दल संजय कुमार सिंह ने बताया कि गोरखपुर में खेल सामग्री का सत्यापन कराया गया था। जो सामग्री खराब थी, उसे बदलवा दिया गया है। खरीदारी ई-टेंडरिंग से की गई है।
गोरखपुर के आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्र की पहल के बाद गड़बड़ी सामने आई है। दरअसल, आरटीआई कार्यकर्ता ने यूपी के 75 जिलों में हुई खेल सामग्री की खरीद, आपूर्ति व भुगतान की जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी। यह सूचना प्रांतीय रक्षक दल, विकास दल एवं युवा कल्याण की उपनिदेशक व जन सूचना अधिकारी मेघना सोनकर ने छह नवंबर 2020 को दी।
सूचना के मुताबिक खेल सामग्री सभी जिलों में भेजी जा चुकी है। इसके एवज में तीनों कंपनियों का भुगतान कर दिया गया है। अब सवाल उठ रहा है कि जून में ही खेल सामग्री आ गई तो वितरण क्यों नहीं हुआ? इसी बीच घटिया खेल सामग्री की आपूर्ति की जानकारी मिल गई।
यही नहीं आरटीआई कार्यकर्ता ने लखनऊ की स्पोर्ट्स लाइन कंपनी नजीराबाद रोड अमीनाबाद और कोहली स्पोर्ट्स नजीराबाद रोड के यहां से खेल सामग्री का वर्तमान रेट लिया और आरोप लगाया कि खेल सामग्री वर्तमान बाजार दर से महंगे दर पर खरीदी गई है। इसकी सूचना प्रमुख सचिव व महानिदेशक को ई-मेल, स्पीड पोस्ट से भेजी है। साथ ही पूरे मामले की जांच कराके कार्रवाई की मांगी की है।
गोरखपुर के आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्र की पहल के बाद गड़बड़ी सामने आई है। दरअसल, आरटीआई कार्यकर्ता ने यूपी के 75 जिलों में हुई खेल सामग्री की खरीद, आपूर्ति व भुगतान की जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी। यह सूचना प्रांतीय रक्षक दल, विकास दल एवं युवा कल्याण की उपनिदेशक व जन सूचना अधिकारी मेघना सोनकर ने छह नवंबर 2020 को दी।
सूचना के मुताबिक खेल सामग्री सभी जिलों में भेजी जा चुकी है। इसके एवज में तीनों कंपनियों का भुगतान कर दिया गया है। अब सवाल उठ रहा है कि जून में ही खेल सामग्री आ गई तो वितरण क्यों नहीं हुआ? इसी बीच घटिया खेल सामग्री की आपूर्ति की जानकारी मिल गई।
यही नहीं आरटीआई कार्यकर्ता ने लखनऊ की स्पोर्ट्स लाइन कंपनी नजीराबाद रोड अमीनाबाद और कोहली स्पोर्ट्स नजीराबाद रोड के यहां से खेल सामग्री का वर्तमान रेट लिया और आरोप लगाया कि खेल सामग्री वर्तमान बाजार दर से महंगे दर पर खरीदी गई है। इसकी सूचना प्रमुख सचिव व महानिदेशक को ई-मेल, स्पीड पोस्ट से भेजी है। साथ ही पूरे मामले की जांच कराके कार्रवाई की मांगी की है।