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DDU Gorakhpur: कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले प्रोफेसर कमलेश निलंबित, धरना देने वाले सात शिक्षकों को नोटिस
Wed, 22 Dec 2021 09:59 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 22 Dec 2021 09:59 AM IST
सार
प्रोफेसर कमलेश गुप्ता मंगलवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के पास चार घंटे तक धरने पर बैठे रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे अनुशासनहीनता व दायित्व निर्वहन के प्रति लापरवाही करार देते हुए उन्हें निलंबित कर दिया जबकि, उनके धरने को समर्थन देने पहुंचे सभी सात प्रोफेसरों को भी कारण बताओ नोटिस दिया गया है।
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प्रोफेसर कमलेश गुप्ता।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (गोविवि) के कुलपति प्रो. राजेश सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर मोर्चा खोलने वाले हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. कमलेश कुमार गुप्त को मंगलवार को निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान प्रो कमलेश कला संकाय से संबद्ध रहेंगे। कला संकाय में ही उपस्थिति दर्ज कराएंगे। प्रो कमलेश पर लगे आरोपों की जांच तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। इसमें दो पूर्व कुलपति और एक कार्य परिषद सदस्य शामिल किए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक प्रो. कमलेश कुमार गुप्त मंगलवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सामने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के पास करीब चार घंटे तक धरने पर बैठे रहे। प्रो. गुप्त लंबे समय से कुलपति के खिलाफ सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं। इसके लिए उन्हें पहले ही आठ नोटिस मिल चुके हैं। लिहाजा, प्रो. गुप्त ने गत सोमवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के सामने सत्याग्रह की चेतावनी दी थी।
कुलपति को हटाने की मांग को लेकर प्रो. गुप्त मंगलवार सुबह 11 बजे धरने पर बैठने आए तो उन्हें अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अजय सिंह ने रोकने की कोशिश की। करीब एक घंटे तक दोनों के बीच बहस चलती रही, लेकिन प्रो गुप्त नहीं माने और प्रतिमा के पास धरने पर बैठ गए। इसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनुशासनहीनता व दायित्व निर्वहन के प्रति घोर लापरवाही करार दिया। साथ ही कुलपति के आदेश पर कुल सचिव विश्वेश्वर प्रसाद ने हिंदी विभाग के प्रोफेसर कमलेश गुप्त को निलंबित करने व उनके खिलाफ विभागीय जांच का आदेश जारी कर दिया।
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जानकारी के मुताबिक प्रो. कमलेश कुमार गुप्त मंगलवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सामने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के पास करीब चार घंटे तक धरने पर बैठे रहे। प्रो. गुप्त लंबे समय से कुलपति के खिलाफ सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं। इसके लिए उन्हें पहले ही आठ नोटिस मिल चुके हैं। लिहाजा, प्रो. गुप्त ने गत सोमवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के सामने सत्याग्रह की चेतावनी दी थी।
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कुलपति को हटाने की मांग को लेकर प्रो. गुप्त मंगलवार सुबह 11 बजे धरने पर बैठने आए तो उन्हें अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अजय सिंह ने रोकने की कोशिश की। करीब एक घंटे तक दोनों के बीच बहस चलती रही, लेकिन प्रो गुप्त नहीं माने और प्रतिमा के पास धरने पर बैठ गए। इसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने अनुशासनहीनता व दायित्व निर्वहन के प्रति घोर लापरवाही करार दिया। साथ ही कुलपति के आदेश पर कुल सचिव विश्वेश्वर प्रसाद ने हिंदी विभाग के प्रोफेसर कमलेश गुप्त को निलंबित करने व उनके खिलाफ विभागीय जांच का आदेश जारी कर दिया।
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समर्थन में धरना देने वाले सात शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस
हिंदी विभाग के प्रोफेसर कमलेश गुप्त के समर्थन में धरना देने वाले सात शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक मध्य कालीन इतिहास विभाग के प्रो. चंद्रभूषण अंकुर, केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रो. उमेश नाथ त्रिपाठी, कॉमर्स डिपार्टमेंट के प्रो. अजेय कुमार गुप्ता, मैथमेटिक्स डिपार्टमेंट के प्रो. सुधीर कुमार श्रीवास्तव, प्रो. वीएस वर्मा और प्रो. विजय कुमार, हिंदी विभाग के प्रो. अरविंद त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।गोरखपुर विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. कमलेश कुमार गुप्त ने बताया कि मुझे निलंबित करने का विश्वविद्यालय का अपना निर्णय है। मैं अपने शिक्षक और भारत का नागरिक होने के धर्म का निर्वाह करता रहूंगा। सत्याग्रह की अगली कड़ी के बारे में जल्द ही अवगत कराऊंगा।