गोरखपुर: भोजन बन रहा चूल्हे पर, उज्ज्वला का सिलिंडर धुएं से पड़ रहा काला
महंगा होने की वजह से नहीं भराया जा रहा है रसोई गैस सिलिंडर। घर के कोने में रख दिया, लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना हुई मजबूरी।
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केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र की गरीब महिलाओं को लकड़ी के धुएं से बचाने के लिए उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त में गैस सिलिंडर व चूल्हे दिए। गैस सिलिंडर महंगा हो जाने से भोजन लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा है और सिलिंडर उसके धुएं से धुआं रहा है। महिलाएं कहती हैं कि इतना महंगा सिलिंडर भराने के लिए पैसा कहां से लाएं?
दरअसल, घरेलू गैस सिलिंडर लगातार महंगा होता गया है। इस समय सिलिंडर के दाम 1068 रुपये हैं। इस कारण उज्ज्वला योजना की लाभार्थियों को इसे भरा पाना मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि वे भोजन दोबारा से लकड़ी जलाकर चूल्हे पर बनाने लगी हैं। गांवों के कई घरों में सिलिंडर एक कोने में रख दिया गया है।
बासूडीहा की निर्मला, कोठा गांव की मैरून निशा, सिसायल गांव की ममता, गंभीरपुर की लक्ष्मीना कहती हैं कि उज्ज्वला योजना में रसोई गैस सिलिंडर और चूल्हा मिल जाने से खुशी थी। सोचा था कि अब धुएं से आंख खराब नहीं होगी, लेकिन महंगाई ने सपनों और अरमानों पर पानी फेर दिया।
वहीं, कुछ लोग खर्चा कम करने के लिए केवल चाय और दूध गर्म करने के लिए गैस का उपयोग कर रहे हैं। सुबह-शाम का खाना चूल्हे पर बन रहा है। यह कहानी एक या दो घर की नहीं है, ग्रामीण क्षेत्र में ऐसी सैकड़ों महिलाएं मिल जाएंगी जो अपनी गृहस्थी की गाड़ी ढंग से चलाने के लिए गैस का उपयोग या तो बंद कर दिया है या कम कर दिया है।
14.2 किलो और रसोई गैस सिलिंडरों के बढ़े दामों पर एक नजर
| माह | दाम |
| अप्रैल 2019 | रुपये 739 |
| अप्रैल 2020 | रुपये 777 |
| अप्रैल 2021 | रुपये 840 |
| अप्रैल 2022 | रुपये 985 |
| मई 2022 | रुपये 1035 |
| जून 2022 | रुपये 1068 |
महंगाई में गैस सिलिंडर भरवाने के लिए पैसे नहीं बच रहे हैं। सिलिंडर न भरवा पाने के कारण लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना पड़ता है। अब सिलिंडर पर सब्सिडी भी बहुत कम हो गई है।
- आफती गौड़, कोठा
गैस सिलिंडर खाली पड़ा है। सिलिंडर भरवाने के लिए 1100 रुपये जुटाने पड़ेंगे। बेटे मजदूरी करते हैं। हर दिन काम मिलता नहीं है। तीन दिहाड़ी के पैसे लग जाते हैं सिलिंडर भरवाने में। इसलिए लकड़ियां ढूंढ कर चूल्हे पर खाना बनाती हूं।
- किस्मती, बासूडीहा
पैसे नहीं होने की वजह से छह महीने से सिलिंडर नहीं भराए हैं। गैस सिलिंडर से लकड़ी और गोबर के कंडे सस्ते पड़ रहे हैं। पहले भी तो ऐसे ही खाना बनाती थी।
- चंपा देवी, सिसायल