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हादसे का खतरा: राप्ती नदी पर स्थित उग्रसेन सेतु फिर क्षतिग्रस्त, इन दो जिलों को जोड़ता है- नए पुल की मांग
Thu, 16 Jul 2026 04:55 PM IST
Rohit Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, बड़हलगंज/चिल्लूपार
संवाद न्यूज एजेंसी, बड़हलगंज/चिल्लूपार
Published by: Rohit Singh
Updated Thu, 16 Jul 2026 04:55 PM IST
सार
यह पुल पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन और राहगीर इस पुल से गुजरते हैं। इससे पहले भी कई बार पुल की सतह धंसने और होल बनने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन हर बार केवल अस्थायी मरम्मत कर आवागमन बहाल कर दिया गया।
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विस्तार
राम-जानकी मार्ग पर गोरखपुर और देवरिया जनपद को जोड़ने वाला राप्ती नदी पर स्थित पटनाघाट–कपरवार उग्रसेन सेतु एक बार फिर क्षतिग्रस्त हो गया है। गुरुवार सुबह पुल के बीच सड़क पर बड़ा होल हो गया, जिससे नीचे की सरिया साफ दिखाई देने लगी।
पुल की स्थिति को देखते हुए देवरिया प्रशासन ने एहतियातन भारी वाहनों की आवाजाही पर तत्काल रोक लगा दी है। हालांकि छोटे वाहनों और राहगीरों का आवागमन जारी है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
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पुल की स्थिति को देखते हुए देवरिया प्रशासन ने एहतियातन भारी वाहनों की आवाजाही पर तत्काल रोक लगा दी है। हालांकि छोटे वाहनों और राहगीरों का आवागमन जारी है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
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यह पुल पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन और राहगीर इस पुल से गुजरते हैं। इससे पहले भी कई बार पुल की सतह धंसने और होल बनने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन हर बार केवल अस्थायी मरम्मत कर आवागमन बहाल कर दिया गया।
पटना ग्राम सभा के पूर्व प्रधान एवं राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन गोरखपुर के जिला प्रभारी हृदय शंकर सिंह ने पुल की तत्काल मरम्मत कराने, तकनीकी जांच कराने तथा भविष्य की सुरक्षा को देखते हुए जर्जर पुल के स्थान पर नए और मजबूत पुल का शीघ्र निर्माण कराने की मांग की है।
पटना ग्राम सभा के पूर्व प्रधान एवं राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन गोरखपुर के जिला प्रभारी हृदय शंकर सिंह ने पुल की तत्काल मरम्मत कराने, तकनीकी जांच कराने तथा भविष्य की सुरक्षा को देखते हुए जर्जर पुल के स्थान पर नए और मजबूत पुल का शीघ्र निर्माण कराने की मांग की है।
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करीब 660 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण वर्ष 1986 में उत्तर प्रदेश सेतु निगम ने कराया था। पुल में कुल 13 पिलर हैं। 19 मार्च 2019 को पुल के पश्चिमी छोर के पांचवें डेक में बड़ा होल हो गया था, जिससे सरिया और नीचे की जमीन तक दिखाई देने लगी थी। इसके बाद 24 जनवरी 2023 को भी पुल के मध्य भाग में होल हो गया था, जिसकी मरम्मत मार्च 2023 में पूरी हो सकी थी।
बताया जा रहा है कि पुल के रखरखाव का कार्य अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सौंप दिया गया है।
बताया जा रहा है कि पुल के रखरखाव का कार्य अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सौंप दिया गया है।
राम-जानकी मार्ग परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर पी. सुब्रमण्यम ने बताया कि पुल की मरम्मत पूरी होने तक भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू कर पुल पर सुरक्षित आवागमन बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है।