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बच्चों को पंजाब ले जा रहे दो तस्कर गिरफ्तार, गोरखपुर की इस टीम ने सात बच्चों को कराया मुक्त
Fri, 25 Sep 2020 03:17 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2020 03:17 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
तस्करी कर बच्चों को पंजाब ले जा रहे दो तस्करों को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट गोरखपुर की टीम ने गिरफ्तार कर लिया। टीम ने उनके कब्जे से सात बच्चों को मुक्त कराया। पकड़े गए तस्करों की पहचान बिहार के भागलपुर के अमघट्टा वार्ड नंबर एक निवासी कुमोद सिंह व बिहार कटिहार के मानिकपुर वार्ड नंबर छह निवासी सुजेन कुमार दास के रूप में हुई। ये दोनों सातों बच्चों को बिहार के कटिहार से न्यू जलपाई गुड़ी ट्रेन से पंजाब के अमृतसर मजदूरी कराने के लिए ले जा रहे थे।
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एसपी क्राइम अशोक वर्मा ने बताया कि इस समय प्रदेश में एडीजी महिला सम्मान प्रकोष्ठ/ एएचटीयू लखनऊ के निर्देश पर नो चाइल्ड लेबर अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत जबरन मजदूरी कराए जा रहे बच्चों को मुक्त कराया जा रहा है।
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इस अभियान के तहत गोरखपुर एएचटीयू यूनिट के प्रभारी अजीत प्रताप सिंह अपने हमराहियों के साथ रेलवे स्टेशन के पास बुधवार की रात मौजूद थे। तभी उन्हें मुखबिर से सूचना मिली कि बिहार के कटिहार से कुछ बच्चों को कर्मभूमि न्यू जलपाईगुडी ट्रेन से मानव तस्करी कर बालश्रम कराने के लिए पंजाब के अमृतसर ले जाया जा रहा है। इस पर टीम गोरखपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार पर पहुंच गई और ट्रेन का इंतजार करने लगी।
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रात करीब 9-40 बजे ट्रेन प्लेटफार्म पर आई। ट्रेन की तलाशी में दो तस्करों को गिरफ्तार कर उनके चंगुल से सात बच्चों को टीम ने मुक्त करा लिया। मुक्त कराए गए बच्चों को चाइल्ड लाईन को सौंप दिया गया। टीम के प्रभारी अजीत प्रताप सिंह ने कैंट थाने में तहरीर देकर तस्करी के आरोपी कुमोद सिंह व सुजेन कुमार दास के खिलाफ 79 किशोर न्याय अधिनियम एंव 3 सीएलपीआर एक्ट तथा मानव तस्करी के आरोप में केस दर्ज कराया।
टीम ने दोनों आरोपितों को कैंट पुलिस के हवाले कर दिया। जिसके बाद कैंट पुलिस ने दोनों आरोपितों को गुरूवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। सभी बच्चे बिहार के कटिहार के ही रहने वाले हैं। गिरफ्तारी करने वाली टीम में एएचटीयू के सिपाही नीरज सिंह, बृजकिशोर सिंह, अमिताभ बच्चन, सतीश जायसवाल, विनोद कुुमार मौर्य, भीम कुमार यादव, विनोद सोनकर व अखिलेश कुमार आदि शामिल रहे।
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पहले भी मुक्त कराए जा चुके हैं तस्करी कर ले जाए जा रहे बच्चे, आरोपित भी पकड़े गए हैं
इससे पहले भी जबरन मजदूरी कराये जाने वाले बच्चों को पुलिस मुक्त करा चुकी है। जिसमें कई आरोपित पर केस दर्ज उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है। 18 अगस्त 2020 को एएचटीयू की टीम ने खोराबार के जगदीशपुर कोनी तिराहे से नौ तस्करों बिहार के अररिया निवासर मोहम्मद हाशिम, मोहम्मद जाहिद, इश्तियाक, मुर्शीद, मारूफ, नूर हसन, शाहिद को गिरफ्तार किया था। इनके कब्जे से टीम ने बीस बच्चों को मुक्त कराया था। सभी बच्चों को तीन बसों से बिहार के अररिया से दिल्ली मजदूरी के लिए ले जाया जा रहा था।
21 सितंबर को टीम ने गुलरिहा के भटहट कस्बे के बाइक मकैनिक की दुकान पर काम कर रहे दो बच्चों को मुक्त कराया था। टीम ने दुकानदार को हिदायत देकर छोड़ दिया था। मार्च 2020 में कोतवाली के नखास निवासी अनस के मकान से टीम ने नाबालिग नौकर को मुक्त कराया था। टीम ने कैंट थाने में अनस के खिलाफ बाल मजदूरी कराने के आरोप में केस दर्ज कराय गया था। अनस को अपने पिता दवा कारोबारी सईद की गोली मारकर हत्या करने के आरोप में पहले ही गिरफ्तार किया गया था।
ये हो सकती है सजा
अगर आरोप सिद्ध हुए तो पकड़े गए दोनों आरोपितों को मानव तस्करी कर दास के रूप में जबरन काम कराने की धारा 370(5) के तहत दस वर्ष का कठोर कारावास या आजीवन कारावास व जुर्माना की सजा हो सकती है। वहीं 79 किशोर न्याय अधिनियम के तहत पांच वर्ष के कारावास की सजा या एक लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। तथा 3 सीएलपीआर एक्ट के तहत भी करीब पांच साल की सजा हो सकती है।
21 सितंबर को टीम ने गुलरिहा के भटहट कस्बे के बाइक मकैनिक की दुकान पर काम कर रहे दो बच्चों को मुक्त कराया था। टीम ने दुकानदार को हिदायत देकर छोड़ दिया था। मार्च 2020 में कोतवाली के नखास निवासी अनस के मकान से टीम ने नाबालिग नौकर को मुक्त कराया था। टीम ने कैंट थाने में अनस के खिलाफ बाल मजदूरी कराने के आरोप में केस दर्ज कराय गया था। अनस को अपने पिता दवा कारोबारी सईद की गोली मारकर हत्या करने के आरोप में पहले ही गिरफ्तार किया गया था।
ये हो सकती है सजा
अगर आरोप सिद्ध हुए तो पकड़े गए दोनों आरोपितों को मानव तस्करी कर दास के रूप में जबरन काम कराने की धारा 370(5) के तहत दस वर्ष का कठोर कारावास या आजीवन कारावास व जुर्माना की सजा हो सकती है। वहीं 79 किशोर न्याय अधिनियम के तहत पांच वर्ष के कारावास की सजा या एक लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। तथा 3 सीएलपीआर एक्ट के तहत भी करीब पांच साल की सजा हो सकती है।