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आज लगेगा खग्रास चंद्र ग्रहण, सुबह 6:20 बजे शुरू होगा सूतक
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- चंद्र ग्रहण अपराह्न 3:20 बजे लगेगा, समाप्ति शाम 6:47 बजे
- गोरखपुर में शाम 5:57 से देखा जा सकेगा ग्रहण
गोरखपुर। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर मंगलवार को खग्रास चंद्र ग्रहण अपराह्न 3:20 बजे लगेगा। जिले में यह ग्रहण ग्रस्तोदित अवस्था में रहेगा। गोरखपुर में इसे शाम 5:57 बजे देखा जा सकेगा और मोक्ष शाम 6:47 मिनट पर होगा। सुबह 6.20 बजे ही इसका सूतक शुरू हो जाएगा।
ज्योतिषाचार्य बृजेश पांडेय ने बताया कि गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में ग्रहण लगभग 50 मिनट तक दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि ग्रहण में इष्टदेव की पूजा-आराधना और मंत्रजप करने से विशेष लाभ होता है। सूतक सुबह 6:20 बजे शुरू होगा और यह नौ घंटे पहले तक रहेगा। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाने का विधान है। बृजेश पांडेय ने बताया कि यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र एवं सिंह राशि में लग रहा है। इसका प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग-अलग दिखाई देगा। ग्रहण के दौरान कुछ कार्यों से बचना चाहिए और समाप्ति पर स्नान, दान और पूजा का विधान है।
पंडित विकास मालवीय के अनुसार, ग्रहण काल में जप, तप, दान और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में गायत्री मंत्र जप, महामृत्युंजय मंत्र जप और गोदान का विधान बताया गया है। ऋषियों ने शांति पाठ और दान के माध्यम से कष्ट निवारण का मार्ग सुझाया है। उन्होंने कहा कि विधिपूर्वक संकल्प लेकर इष्टदेव की आराधना करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसलिए ग्रहण के दौरान पूजा-ध्यान और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व बढ़ जाता है। ग्रहण के दौरान सावधानी बरतने और धार्मिक नियमों का पालन करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
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- गोरखपुर में शाम 5:57 से देखा जा सकेगा ग्रहण
गोरखपुर। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर मंगलवार को खग्रास चंद्र ग्रहण अपराह्न 3:20 बजे लगेगा। जिले में यह ग्रहण ग्रस्तोदित अवस्था में रहेगा। गोरखपुर में इसे शाम 5:57 बजे देखा जा सकेगा और मोक्ष शाम 6:47 मिनट पर होगा। सुबह 6.20 बजे ही इसका सूतक शुरू हो जाएगा।
ज्योतिषाचार्य बृजेश पांडेय ने बताया कि गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में ग्रहण लगभग 50 मिनट तक दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि ग्रहण में इष्टदेव की पूजा-आराधना और मंत्रजप करने से विशेष लाभ होता है। सूतक सुबह 6:20 बजे शुरू होगा और यह नौ घंटे पहले तक रहेगा। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाने का विधान है। बृजेश पांडेय ने बताया कि यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र एवं सिंह राशि में लग रहा है। इसका प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग-अलग दिखाई देगा। ग्रहण के दौरान कुछ कार्यों से बचना चाहिए और समाप्ति पर स्नान, दान और पूजा का विधान है।
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पंडित विकास मालवीय के अनुसार, ग्रहण काल में जप, तप, दान और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में गायत्री मंत्र जप, महामृत्युंजय मंत्र जप और गोदान का विधान बताया गया है। ऋषियों ने शांति पाठ और दान के माध्यम से कष्ट निवारण का मार्ग सुझाया है। उन्होंने कहा कि विधिपूर्वक संकल्प लेकर इष्टदेव की आराधना करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसलिए ग्रहण के दौरान पूजा-ध्यान और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व बढ़ जाता है। ग्रहण के दौरान सावधानी बरतने और धार्मिक नियमों का पालन करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
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