देरी से हुई कार्रवाई पर उठने लगे सवाल: 13 दिन पहले मिली थी टिप, जांच से बचता रहा विभाग
सूत्रों के मुताबिक उसी दिन ड्रग विभाग को टिप मिली थी कि गुप्ता भाइयों के अलावा भालोटिया मार्केट के कई बड़े व्यापारी नशीली दवाओं के काले धंधे में संलिप्त हैं, लेकिन विभाग चुप्पी साधे रहा। कई दिनों बाद प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव में शनिवार को छापा मारा। इस दौरान कुछ दवाओं के सैंपल लिए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
लैबोरेट फार्मास्यूटिकल के कैरी एंड फारवर्ड (सीएंडएफ) पर शनिवार को हुई ड्रग विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का कहना है कि ड्रग विभाग को मनीष केडिया की कंपनी के बारे में टिप (जानकारी) 13 दिन पहले मिल गई थी, लेकिन कार्रवाई में देरी की गई। बताया जा रहा है कि ड्रग विभाग को प्रशासन के दो बड़े अधिकारियों के दबाव में केडिया की कंपनी पर छापा मारना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक, सात अगस्त को दो करोड़ रुपये की नशीली दवाएं गीडा और संतकबीरनगर जिले में बरामद हुई थीं। मामले में भालोटिया मार्केट के 10 लोगों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट का मुकदमा दर्ज किया गया था। इनमें छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जबकि भालोटिया के दो व्यापारी भाई आशीष गुप्ता और अमित गुप्ता फरार हैं।
सूत्रों के मुताबिक उसी दिन ड्रग विभाग को टिप मिली थी कि गुप्ता भाइयों के अलावा भालोटिया मार्केट के कई बड़े व्यापारी नशीली दवाओं के काले धंधे में संलिप्त हैं, लेकिन विभाग चुप्पी साधे रहा। कई दिनों बाद प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव में शनिवार को छापा मारा।
इस दौरान कुछ दवाओं के सैंपल लिए हैं। सही रखरखाव नहीं होने के आरोप में 27 हजार ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को सीज किया है। बताया जा रहा है कि लैबोरेट के संचालक मनीष केडिया भालोटिया के जेनेरिक दवाओं के बड़े कारोबारी हैं। उनके पास लैबोरेट समेत आधा दर्जन बड़ी दवा कंपनियों के सीएंडएफ है। ये दवा कंपनियां नशे की दवाएं बनाती हैं, जिसकी खपत सर्वाधिक है।
प्रशासन के अधिकारियों को लगी भनक, दबाव में की गई कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, ड्रग विभाग से ही यह सूचना प्रशासन के दो बड़े वरिष्ठ अधिकारियों को मिली कि मामले में गठजोड़ किया जा रहा है। इस पर अधिकारियों ने ड्रग विभाग पर दबाव बनाया तो शनिवार को आनन-फानन टीम कार्रवाई के लिए सीएंडएफ पहुंची, जहां से उसे नारकोटिक्स की तीन दवाएं मिलीं, जिसका सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। बताया जा रहा है कि छापे के दौरान एक दवा व्यापारी नेता भी लैबोरेट के गोदाम पर पहुंचा था और कार्रवाई कर रहे अधिकारियों से वार्ता के बाद चला गया था।
जेनेरिक की जगह फर्म के नाम से बन गई पहचान
भालोटिया में एक बड़ा दवा व्यापारी जेनेरिक दवाओं का काम करता है। जेनेरिक दवाओं में नारकोटिक्स की सभी दवाएं शामिल हैं। उस व्यापारी की पकड़ इतनी तगड़ी है कि लोग कोड वर्ड के तौर पर जेनेरिक की जगह उसके फर्म के नाम का इस्तेमाल करते हैं। फर्म का नाम लेते हुए उसकी दुकान से नारकोटिक्स दवाओं की खेप अन्य छोटे व्यापारियों तक पहुंच जाती है। बताया जा रहा है कि गुप्ता भाइयों को बढ़ाने वाला भी वही है, लेकिन विभाग इस व्यापारी पर हाथ डालने से बच रहा है।
आठ से 10 व्यापारी बड़ी रेंज के साथ करते हैं बड़ा कारोबार
भालोटिया मार्केट में आठ से 10 व्यापारी ऐसे हैं, जो बड़ी रेंज के साथ नारकोटिक्स के दवाओं का काम करते हैं। इन व्यापारियों के पास जेनेरिक दवाओं के बड़े काम हैं। इनके दवाओं की सप्लाई नेपाल से लेकर, बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में भी है। विभाग को इसकी जानकारी हो गई है, लेकिन विभाग इन पर हाथ डालने से कतरा रहा है।
रखना होता है हिसाब, रखते नहीं
सूत्रों के मुताबिक नारकोटिक्स की सभी दवाएं शेड्यूल एच और एक्स में शामिल हैं। इनकी खरीद और बिक्री का रिकॉर्ड थोक से लेकर फुटकर व्यापारियों को रखना होता है। लेकिन, कोई भी ऐसा नहीं करता। इसकी वजह यह है कि व्यापारी कच्चे सौदे में इनका व्यापार करते हैं। यही कारण है कि विभाग ने सीएंडएफ से तीन साल के दवाओं की खरीद फरोख्त का रिकॉर्ड मांगा है।
जांच के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। जांच में देरी नहीं हुई है। जरूरत के मुताबिक अन्य दुकानों की जांच की जाएगी। विभाग अपने स्तर से जांच कर रहा है। तीन दिन में संचालक मनीष केडिया से दवाओं की खरीद-फरोख्त का हिसाब मांगा गया है। हिसाब देने के बाद जांच का दायरा तेज होगा। मामले में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। - एजाज अहमद, सहायक आयुक्त औषधि