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गोरखपुर: स्टेरॉयड के सेवन ने बना दिया ऑर्थराइटिस का मरीज, विशेषज्ञ बोले- अभी और दुष्परिणाम आ सकते हैं सामने
Wed, 12 Oct 2022 01:24 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 12 Oct 2022 01:24 PM IST
सार
लिगामेंट इंजरी वाले मरीजों को ऑर्थराइटिस का खतरा 90 फीसदी तक होता है। लिगामेंट इंजरी अधिकतर खिलाड़ियों को होती है। डॉक्टरों की सलाह है कि ऐसे लोग तत्काल इसका इलाज कराएं, या फिर लिगामेंट की सर्जरी कराएं। अन्यथा उन्हें ऑर्थराइटिस की दिक्कत कब शुरू हो जाए, इसका अंदाजा लगाना संभव नहीं है।
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(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कोरोना काल में संक्रमण की आशंका के बीच चिकित्सक के परामर्श के बिना स्टेरॉयड दवाओं के इस्तेमाल से ऑर्थराइटिस के मामले भी सामने आने लगे हैं। इससे पहले ब्लैक और येलो फंगस भी दुष्परिणाम के रूप में सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञ भी यह ठीक-ठीक नहीं बता पा रहे हैं कि आगे और क्या-क्या परिणाम आ सकते हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विशेषज्ञ प्रो. अमित मिश्रा ने बताया कि कोरोना महामारी के बीच 95 फीसदी लोगों ने संक्रमण से मुक्ति के लिए जाने-अनजाने में स्टेरॉयड दवाओं का सेवन किया। इसका नतीजा अब तक दिख रहा है। स्टेरॉयड का इस्तेमाल करने वाले मरीजों में ब्लैक फंगस का असर तो दिख ही रहा था। अब ऐसे मरीजों में हिप ऑर्थराइटिस के मामले भी सामने आ रहे हैं। यह ज्यादा चिंता का विषय है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इस तरह के मामले कोरोना की दूसरी लहर के बाद बढ़ गए हैं। ऐसे मरीजों के कूल्हे तक प्रत्यारोपित करने पड़ रहे हैं।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद मेडिकल कॉलेज में ऐसे 150 से अधिक मामले आ चुके हैं जिन्हें स्टेरॉयड के इस्तेमाल से ऑर्थराइटिस की समस्या हुई है। इसके अलावा पोस्ट ऑर्थराइटिस के मामले अब भी आ रहे हैं, जिसे विज्ञान की भाषा में रि-एक्टिव ऑर्थराइटिस कहते हैं। इस तरह के मामले भी लगातार मिल रहे हैं।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विशेषज्ञ प्रो. अमित मिश्रा ने बताया कि कोरोना महामारी के बीच 95 फीसदी लोगों ने संक्रमण से मुक्ति के लिए जाने-अनजाने में स्टेरॉयड दवाओं का सेवन किया। इसका नतीजा अब तक दिख रहा है। स्टेरॉयड का इस्तेमाल करने वाले मरीजों में ब्लैक फंगस का असर तो दिख ही रहा था। अब ऐसे मरीजों में हिप ऑर्थराइटिस के मामले भी सामने आ रहे हैं। यह ज्यादा चिंता का विषय है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इस तरह के मामले कोरोना की दूसरी लहर के बाद बढ़ गए हैं। ऐसे मरीजों के कूल्हे तक प्रत्यारोपित करने पड़ रहे हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर के बाद मेडिकल कॉलेज में ऐसे 150 से अधिक मामले आ चुके हैं जिन्हें स्टेरॉयड के इस्तेमाल से ऑर्थराइटिस की समस्या हुई है। इसके अलावा पोस्ट ऑर्थराइटिस के मामले अब भी आ रहे हैं, जिसे विज्ञान की भाषा में रि-एक्टिव ऑर्थराइटिस कहते हैं। इस तरह के मामले भी लगातार मिल रहे हैं।
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कूल्हे तक नहीं पहुंच पा रहा खून
डॉ. अमित ने बताया कि स्टेरॉयड के सेवन से ए-वैस्कुलर नेक्रोसिस खून के संचार को कूल्हे तक जाने से रोक रहा है। इससे कूल्हे की हड्डियां गल रही हैं। ऐसे मामले पहले बुजुर्गों में देखने को मिलते थे। लेकिन, अब 35 वर्ष के युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। स्टेरॉयड दवाओं के साथ शराब का सेवन हिप ऑर्थराइटिस का बड़ा कारण है।
लिगामेंट इंजरी होने पर ऑर्थराइटिस का खतरा 90 फीसदी
लिगामेंट इंजरी वाले मरीजों को ऑर्थराइटिस का खतरा 90 फीसदी तक होता है। लिगामेंट इंजरी अधिकतर खिलाड़ियों को होती है। डॉक्टरों की सलाह है कि ऐसे लोग तत्काल इसका इलाज कराएं, या फिर लिगामेंट की सर्जरी कराएं। अन्यथा उन्हें ऑर्थराइटिस की दिक्कत कब शुरू हो जाए, इसका अंदाजा लगाना संभव नहीं है।
इस वर्ष की थीम ‘ऑर्थराइटिस पर काबू पाना हमारे हाथ में’
आईएमए के मीडिया प्रभारी डॉ. इमरान अख्तर ने बताया कि विश्व ऑर्थराइटिस दिवस की इस वर्ष की थीम ‘ऑर्थराइटिस पर काबू पाना हमारे हाथ में’ है। इसे ध्यान में रखते हुए बुधवार से मरीजों को जागरूक भी किया जाएगा। बताया कि आस्टियो ऑर्थराइटिस की वजह से घुटने के बीच की सफेद गद्दी कमजोर हो जाती है और यह गलने लगती है।
इस दौरान जोड़ के अंदर की हड्डियां नजदीक आ जाती हैं और एक-दूसरे से टकराती हैं। इससे असहनीय दर्द होता और चलने में दिक्कत होने लगती है। कुछ ऐसा ही रुमेटाइड ऑर्थराइटिस बीमारी में भी होता है। इसमें एक साथ कई जोड़ों में दर्द और सूजन होती है। इससे बचाव के लिए कैल्शियम, विटामिन डी एवं प्रोटीन युक्त भोजन लेना चाहिए।
लिगामेंट इंजरी होने पर ऑर्थराइटिस का खतरा 90 फीसदी
लिगामेंट इंजरी वाले मरीजों को ऑर्थराइटिस का खतरा 90 फीसदी तक होता है। लिगामेंट इंजरी अधिकतर खिलाड़ियों को होती है। डॉक्टरों की सलाह है कि ऐसे लोग तत्काल इसका इलाज कराएं, या फिर लिगामेंट की सर्जरी कराएं। अन्यथा उन्हें ऑर्थराइटिस की दिक्कत कब शुरू हो जाए, इसका अंदाजा लगाना संभव नहीं है।
इस वर्ष की थीम ‘ऑर्थराइटिस पर काबू पाना हमारे हाथ में’
आईएमए के मीडिया प्रभारी डॉ. इमरान अख्तर ने बताया कि विश्व ऑर्थराइटिस दिवस की इस वर्ष की थीम ‘ऑर्थराइटिस पर काबू पाना हमारे हाथ में’ है। इसे ध्यान में रखते हुए बुधवार से मरीजों को जागरूक भी किया जाएगा। बताया कि आस्टियो ऑर्थराइटिस की वजह से घुटने के बीच की सफेद गद्दी कमजोर हो जाती है और यह गलने लगती है।
इस दौरान जोड़ के अंदर की हड्डियां नजदीक आ जाती हैं और एक-दूसरे से टकराती हैं। इससे असहनीय दर्द होता और चलने में दिक्कत होने लगती है। कुछ ऐसा ही रुमेटाइड ऑर्थराइटिस बीमारी में भी होता है। इसमें एक साथ कई जोड़ों में दर्द और सूजन होती है। इससे बचाव के लिए कैल्शियम, विटामिन डी एवं प्रोटीन युक्त भोजन लेना चाहिए।