26 एकड़ लावारिस जमीन की वरासत का मामला: तहसीलदार का तबादला, कमेटी ने शुरू की जांच
एसडीएम ने लेखपालों की टीम कोलकाता भेजी तो संबंधित पते पर कोई खातेदार नहीं मिला। इसी आधार पर एसडीएम सदर ने 2019-20 में जमीन को लावारिस घोषित करते हुए ग्रामसभा के नाम दर्ज कर दिया। इसके बाद नगर निगम को एक साल के लिए आवंटित कर दिया गया।
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गोरखपुर जिले के जंगल डुमरी नंबर दो की करीब 26 एकड़ लावारिस जमीन के वरासत मामले में तहसीलदार वीरेंद्र कुमार गुप्ता का तबादला कर दिया गया। उन्हें चौरीचौरा का तहसीलदार बनाया गया है। चौरीचौरा के तहसीलदार को सदर तहसील की जिम्मेदारी मिली है। उधर, डीएम की तरफ से नामित कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। दूसरी तरफ, मामला गरमाने के बाद तहसील प्रशासन लीपापोती करने में जुट गया है।
जमीन की जांच शुरू होते ही मामले में नया मोड़ आ गया। तहसीलदार ने लावारिस जमीन के वरासत करने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया। तहसीलदार का दावा है कि यह आदेश पहले कर दिया था, मगर पेशकार ने इसे फाइल में बाद में लगाया। इस कारण खतौनी पर नहीं दर्ज हो सका।
जांच के दौरान तहसीलदार ने दलील दी कि जमीन की वरासत होने के आदेश से कुछ दिन पहले उन्होंने सदर तहसील का चार्ज लिया था। जमीन से जुड़ी फाइल पेशकार उनके सामने लाए थे। फाइल में बंगाली परिवार के वारिसों का शपथपत्र लगा था। हलका लेखपाल और तत्कालीन कानूनगो की रिपोर्ट भी लगी हुई थी। फाइल में पेशकार ने जो खतौनी लगाई थी, उसमें बंगाली परिवार की जमीन को लावारिस घोषित करते हुए ग्रामसभा के नाम दर्ज करने का कोई आदेश नहीं था। नाम चढ़ने के बाद पेशकार ने दूसरी खतौनी फाइल में लगाई, जिसमें जमीन के ग्रामसभा में जाने का जिक्र था।
तहसीलदार का कहना है कि उन्होंने जैसे ही खतौनी को देखा तो तत्काल वरासत के आदेश को निरस्त कर दिया। निरस्तीकरण का आदेश पेशकार ने खतौनी में नहीं चढ़वाया। मामला जब सामने आया तब उसे तत्काल प्रभाव से खतौनी में चढ़वाया गया। उनका कहना है कि मामले में पेशकार, लेखपाल और कानूनगो से स्पष्टीकरण तलब किया गया था। उधर, ये कर्मचारी आरोपों को बेबुनियाद बता रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें फंसाया जा रहा है। बुधवार को भी कीमती जमीन का मामला तहसील समेत कलेक्ट्रेट में चर्चा का विषय बना रहा।
जांच कमेटी दो दिन में डीएम को सौंपेगी रिपोर्ट
एडीएम प्रशासन पुरुषोत्तम दास गुप्ता और मुख्य राजस्व अधिकारी ने बुधवार से सदर तहसील पहुंचकर मामले की जांच शुरू की। उन्होंने जमीन से जुड़े जरूरी अभिलेखों की जांच के साथ ही तहसीलदार और पेशकार से पूछताछ की। एडीएम प्रशासन ने बताया कि प्रथम दृष्टया गड़बड़ी दिख रही है। यही वजह है कि तहसीलदार सदर का कार्यक्षेत्र बदला गया है। दो दिन के भीतर जांच पूरी हो जाने की उम्मीद है। इसके बाद रिपोर्ट डीएम को सौंप दी जाएगी।
ऐसे पहेली बनी 26 एकड़ जमीन
सदर तहसील के जंगल डुमरी नंबर दो की 26 एकड़ जमीन राजस्व अभिलेखों में पहले कोलकाता के रहने वाले अतुल कृष्ण बनर्जी, केदारनाथ मुखर्जी, शैलेंद्रनाथ मुखर्जी, लक्खी देवी के नाम दर्ज थी। करीब तीन साल पहले पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर जमीन की बिक्री होने लगी तो प्रशासन से शिकायत हुई। तत्कालीन एसडीएम गौरव सिंह सोगरवाल ने पड़ताल कराई, तो पता चला कि जमीन के मूल खातेदार यहां नहीं रहते हैं। परिवार के एक सदस्य की हत्या के बाद सभी खातेदार कोलकाता में बस गए।
एसडीएम ने लेखपालों की टीम कोलकाता भेजी तो संबंधित पते पर कोई खातेदार नहीं मिला। इसी आधार पर एसडीएम सदर ने 2019-20 में जमीन को लावारिस घोषित करते हुए ग्रामसभा के नाम दर्ज कर दिया। इसके बाद नगर निगम को एक साल के लिए आवंटित कर दिया गया। मगर आठ माह बीते थे कि जमीन को वेटरिनरी कॉलेज के नाम आवंटित कर दिया गया। जगह कम पड़ने की वजह से कॉलेज का निर्माण नहीं हुआ।
इसी बीच मई 2022 में तहसीलदार ने अचानक जमीन की वरासत कर दी। मामला डीएम कृष्णा करुणेश तक पहुंचा तो उन्होंने जुलाई में इस जमीन को उद्यान विभाग के नाम दर्ज कर दिया।