ताल सुमेर सागर: तहसील में हुई सुनवाई, अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
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गोरखपुर के ताल सुमेर सागर मामले में सदर तहसील प्रशासन ने जिन 10 लोगों को नोटिस दिया था उनके प्रतिनिधियों व अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष रखा। इससे पहले सभी ने लिखित जवाब भी दिया था। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। मामले में 22 फरवरी को ही कोर्ट में सुनवाई होनी है।
ताल सुमेर सागर क्षेत्र में अभी तक कब्जा खाली न करने वाले 10 लोगों को तहसील सदर की ओर से नोटिस दिया गया था। 16 फरवरी तक सभी को जवाब देने को कहा गया था। यह भी मौका दिया गया था कि वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर या प्रतिनिधि के जरिए भी अपना पक्ष रख सकते हैं।
इसी क्रम में शुक्रवार को संबंधित लोगों के प्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं ने सुनवाई के दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/ एसडीएम सदर कुलदीप मीणा के सामने अपना पक्ष रखा। सभी ने अपने कब्जे को वाजिब बताते हुए अलग-अलग दलीलें पेश की हैं।
बता दें, ताल सुमेर सागर के करीब 90 फीसदी हिस्से से तहसील प्रशासन अतिक्रमण हटवा चुका है। एसडीएम/ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर की ओर से लोगों को भेजी गई नोटिस में 10 दिनों के भीतर कब्जा हटाने को कहा गया था। पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही संबंधित को नोटिस जारी किया गया था।
इन्हें जारी हुआ था नोटिस
तहसील प्रशासन के अनुसार ताल सुमेर सागर से गीता देवी, निशा पांडेय, नीता जायसवाल, पुरजाना बानो, हसीना बानो, साधना श्रीवास्तव, सुनील कुमार श्रीवास्तव, दीपांकर पांडेय, आशीष कुमार सक्सेना व निशा सक्सेना ने अपना कब्जा नहीं हटाया था। इन सभी को नोटिस दिया गया था।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/ एसडीएम सदर कुलदीप मीणा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में ताल सुमेर सागर के मामले में कुछ लोगों को नोटिस दिया गया था। लोगों ने अपने लिखित जवाब भी दिए थे। शुक्रवार को मामले में सुनवाई के दौरान भी सभी दस लोगों के प्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं ने व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होकर भी अपना पक्ष रखा। अब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आना बाकी है। 22 फरवरी को इस मामले में वहां सुनवाई है। जो आदेश होगा, उसी के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी।