खेल दिवस: मिट्टी से निकल कर मैट तक पहुंची कुश्ती, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोरखपुर की माटी की खुशबू बिखेर रहे पहलवान
राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोरखपुर की माटी की खुशबू बिखेर रहे पहलवान, बाबा गोरक्षनाथ की धरती ने भी देश को एक से बढ़कर एक धुरंधर पहलवान दिए।
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टोक्यो ओलंपिक में रवि दहिया ने रजत और बजरंग पुनिया ने कांस्य पदक हासिल कर कुश्ती के पहलवानों को मंजिल तक पहुंचने का रास्ता दिखाया है। बाबा गोरक्षनाथ की धरती ने भी देश को एक से बढ़कर एक धुरंधर पहलवान दिए हैं, जो मिट्टी से निकल मैट पर पहलवानी का लौहा मनवा चुके हैं। वे वर्ष 1970 से ही गोरखपुर की माटी की खुशबू राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिखेर रहे हैं। वर्तमान में भी ये सिलसिला जारी है।
कुश्ती के लिए गोरखपुर में स्पोर्ट्स कॉलेज, रीजनल स्टेडियम और रेलवे स्टेडियम में मैट की सुविधा उपलब्ध है। स्पोर्ट्स कॉलेज में 85 कुश्ती खिलाड़ी, रीजनल स्टेडियम में 20 और रेलवे स्टेडियम में कुश्ती के 20 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। शहरी क्षेत्र में कृष्णानगर व्यायामशाला और ग्रामीण क्षेत्र में चतुर बंदुआरी गांव में मैट है। इसके अलावा शहर के सबसे पुराने अखाड़े पक्कीबाग, शिवाजी व्यायामशाला, खजनी, ककराखोर, डेरवां समेत ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 50 से अधिक जगहों पर मिट्टी के अखाड़े हैं, जिनमें हजारों बच्चे कुश्ती का प्रशिक्षण लेते हैं।
एक जिला एक खेल के तहत कुश्ती का चयन
एक जिला एक खेल योजना के तहत कुश्ती का चयन होने से गोरखपुर के खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं अब मिल सकेंगी। खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में दिखाने का मौका मिलेगा।
गोरखपुर के अंतरराष्ट्रीय पहलवान
दिनेश सिंह 1971-72, रामचन्द्र यादव 1974, पन्नेलाल यादव 1977-89, राम मिलन यादव 1980-8, रामाश्रय यादव 1984-90, स्व. तालुकदार यादव 1992-99, जनार्दन यादव 1992-2004, चंद्र विजय सिंह 1996-2005, स्व. गामा मिश्रा 1995-98, राम निवास यादव 1993-2000, विजय चौरसिया 2013-16, अमरनाथ यादव 2008*, अनूप यादव 2019*, पुष्पा यादव 2018, गौरव बालियान पूर्वोत्तर रेलवे 2021* ।
यूपी हॉकी संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश सिंह ने कहा कि कुश्ती में यहां से बहुत से अंतरराष्ट्रीय पहलवान निकले हैं। कुश्ती गांव और मिट्टी से जुड़ा खेल है। कुश्ती के खिलाड़ियों ने हमेशा अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरी है। इकलौता ऐसा खेल है, जिसे देखने दूर दराज से आज भी ग्रामीण लोग आते हैं।
भारतीय कुश्ती टीम के को चंद्रविजय सिंह ने कहा कि गोरखपुर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई पहलवान देश को दिए हैं। माटी से शुरू हुआ ये सफर अब मैट तक पहुंच गया है। खेलो इंडिया सेंटर के लिए गोरखपुर जिले में कुश्ती खेल का चयन किया गया है, जिससे खेल के तहत कुश्ती को सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।