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चिंता: एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पढ़ाने के लिए मदरसों में नहीं हैं शिक्षक, जानिए कैसे पढ़ाए जा रहे हैं ये खास विषय
Thu, 17 Jun 2021 03:43 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 17 Jun 2021 03:43 PM IST
सार
सामाजिक विज्ञान, कंप्यूटर, इतिहास जैसे विषयों के लिए नहीं हैं विशेषज्ञ अध्यापक।
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NCERT
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मदरसों के तालिब ए इल्म (विद्यार्थियों) को आधुनिक विषय पढ़ाने के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकें तो जारी कर दी गईं, लेकिन कई विषय पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं हैं। ये विषय सामान्य शिक्षकों से ही पढ़वाए जा रहे हैं।
मदरसों के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकार ने तहतानियां (प्राथमिक), फौकानिया (उच्च प्राथमिक) और सेकेंडरी (कक्षा नौ दस) में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया है। पाठ्यक्रम में अंग्रेजी, विज्ञान और गणित के अलावा सामाजिक विज्ञान, इतिहास, कंप्यूटर आदि विषय शामिल हैं। हालांकि, इनमें हिंदी और अंग्रेजी विषय ही अनिवार्य हैं, बाकी विषय ऐच्छिक हैं।
इस मामले में, इरफान अहमद, (जिलाध्यक्ष मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एकता समिति) कहते हैं कि मदरसों में बहुत से विद्यार्थी ऐच्छिक विषय के रूप में इतिहास, सामाजिक विज्ञान आदि विषय ले रहे हैं। इन विषयों को विज्ञान, गणित और अंग्रेजी शिक्षकों को ही पढ़ाना पड़ रहा है।
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सरकार आधुनिक शिक्षकों को मानदेय और वेतन तो दे नहीं रही है, लेकिन उनसे अपेक्षा कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक सभी विषय पढ़ाने की कर रही है। बिना विषय विशेषज्ञ विद्यार्थियों का भला नहीं होगा।
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मदरसों के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकार ने तहतानियां (प्राथमिक), फौकानिया (उच्च प्राथमिक) और सेकेंडरी (कक्षा नौ दस) में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया है। पाठ्यक्रम में अंग्रेजी, विज्ञान और गणित के अलावा सामाजिक विज्ञान, इतिहास, कंप्यूटर आदि विषय शामिल हैं। हालांकि, इनमें हिंदी और अंग्रेजी विषय ही अनिवार्य हैं, बाकी विषय ऐच्छिक हैं।
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इस मामले में, इरफान अहमद, (जिलाध्यक्ष मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एकता समिति) कहते हैं कि मदरसों में बहुत से विद्यार्थी ऐच्छिक विषय के रूप में इतिहास, सामाजिक विज्ञान आदि विषय ले रहे हैं। इन विषयों को विज्ञान, गणित और अंग्रेजी शिक्षकों को ही पढ़ाना पड़ रहा है।
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सरकार आधुनिक शिक्षकों को मानदेय और वेतन तो दे नहीं रही है, लेकिन उनसे अपेक्षा कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक सभी विषय पढ़ाने की कर रही है। बिना विषय विशेषज्ञ विद्यार्थियों का भला नहीं होगा।
कुछ ऐसी ही बात, नावेद आलम (मदरसा आधुनिक शिक्षक) कहते हैं कि किसी भी विषय की बारीकियां विषय विशेषज्ञ शिक्षक ही समझता है। मदरसा आधुनिक शिक्षकों में अधिकतर सामान्य स्नातक या परास्नातक हैं। बीएससी या एमएससी गणित पास शिक्षक को इतिहास, सामाजिक विज्ञान की बेतहर जानकारी नहीं होगी। इसी तरह बीए, एमए पास शिक्षक के लिए तकनीकी विषय पढ़ाना आसान नहीं है। सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा करने की औपचारिकता होगी।
इन सबके उलट जब इस संबंध में आशुतोष पांडेय, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से सवाल किया गया तो वे कहते हैं कि मदरसों में सभी विषय पढ़ाए जा रहे हैं। मदरसा आधुनिक शिक्षक तहतानियां-फौकानियसा के साथ ही उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषय पढ़ाने में सक्षम हैं। सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, गणित आदि विषय ऐच्छिक हैं। मदरसों में एनसीईआरटी पुस्तकों से ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है।
आधुनिकीकरण शिक्षक संघ गोरखपुर के अखिल भारतीय मदरसा के मो. आजम मीडिया प्रभारी ने बताया कि दरअसल दसवीं, बारहवीं में सभी विषय काफी विस्तृत हो जाते हैं, पढ़ाई की तकनीक भी सामान्य से फार्मूला और तकनीकी आधारित हो जाती है, खासकर विज्ञान और गणित विषय में। आधुनिक मदरसा शिक्षक आठवीं तक के विषय तो पढ़ा सकते हैं लेकिन दसवीं-बारहवीं के तकनीकी विषय कंप्यूटर, गणित, विज्ञान के साथ सामाजिक विषयों के लिए भी विशेषज्ञ शिक्षक बेहतर होंगे।
इन सबके उलट जब इस संबंध में आशुतोष पांडेय, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से सवाल किया गया तो वे कहते हैं कि मदरसों में सभी विषय पढ़ाए जा रहे हैं। मदरसा आधुनिक शिक्षक तहतानियां-फौकानियसा के साथ ही उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषय पढ़ाने में सक्षम हैं। सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, गणित आदि विषय ऐच्छिक हैं। मदरसों में एनसीईआरटी पुस्तकों से ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है।
आधुनिकीकरण शिक्षक संघ गोरखपुर के अखिल भारतीय मदरसा के मो. आजम मीडिया प्रभारी ने बताया कि दरअसल दसवीं, बारहवीं में सभी विषय काफी विस्तृत हो जाते हैं, पढ़ाई की तकनीक भी सामान्य से फार्मूला और तकनीकी आधारित हो जाती है, खासकर विज्ञान और गणित विषय में। आधुनिक मदरसा शिक्षक आठवीं तक के विषय तो पढ़ा सकते हैं लेकिन दसवीं-बारहवीं के तकनीकी विषय कंप्यूटर, गणित, विज्ञान के साथ सामाजिक विषयों के लिए भी विशेषज्ञ शिक्षक बेहतर होंगे।