{"_id":"606d4fb2a7ac03723670f1ff","slug":"special-struggle-story-of-hardworking-women-in-gorakhpur","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी: इन महिलाओं ने आपदा में तलाशा अवसर, खुद के साथ औरों को भी बनाया आत्मनिर्भर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी: इन महिलाओं ने आपदा में तलाशा अवसर, खुद के साथ औरों को भी बनाया आत्मनिर्भर
Wed, 07 Apr 2021 11:52 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 07 Apr 2021 11:52 AM IST
विज्ञापन
लिफाफा बनाने में जुटी महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जहां नौकरी के लिए लोगों को दूसरे प्रदेशों का रुख करना पड़ता है, वहीं प्रदेश सरकार की आजीविका मिशन ने ग्रामीण इलाकों की महिलाओं को उनके घर में रोजगार उपलब्ध करा दिया है। ग्रामीण इलाकों की कुछ महिलाएं न सिर्फ इस योजना के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि औरों को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। वे गांव में ही लिफाफे व फाइल कवर बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को और बेहतर कर रही हैं।
कोरोना काल में जब लोगों के सामने रोजगार का संकट था, तब गोरखपुर की आरती, रिंकी, सुनैना और कुसुम कड़ी मेहनत व जज्बे से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में जुटी हुईं थीं। अपने साथ दूसरों को भी रोजगार मुहैया कराने में वे आज सफल हो रही हैं। आजीविका मिशन से जुड़कर इन लोगों ने खुद का समूह बनाया। उन्होंने लिफाफे और फाइल बनाने का काम शुरू किया है। जिसके बाद से इन्हें आमदनी के साथ-साथ जीने की राह भी मिल चुकी है। खजनी ब्लॉक के सतुआभार ग्राम सभा की इन महिलाओं की जिंदगी को आजीविका मिशन ने बदल दिया है। इसका सारा श्रेय वे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देती हैं।
विज्ञापन
कोरोना काल में जब लोगों के सामने रोजगार का संकट था, तब गोरखपुर की आरती, रिंकी, सुनैना और कुसुम कड़ी मेहनत व जज्बे से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में जुटी हुईं थीं। अपने साथ दूसरों को भी रोजगार मुहैया कराने में वे आज सफल हो रही हैं। आजीविका मिशन से जुड़कर इन लोगों ने खुद का समूह बनाया। उन्होंने लिफाफे और फाइल बनाने का काम शुरू किया है। जिसके बाद से इन्हें आमदनी के साथ-साथ जीने की राह भी मिल चुकी है। खजनी ब्लॉक के सतुआभार ग्राम सभा की इन महिलाओं की जिंदगी को आजीविका मिशन ने बदल दिया है। इसका सारा श्रेय वे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देती हैं।
विज्ञापन
2018 में गठित किया था अपना समूह
इन महिलाओं ने नवंबर 2018 में ग्राम संगठन के नाम से अपने समूह का गठन किया था। इसके बाद रूरल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आरटीआई) से प्रशिक्षण लिया। सामुदायिक निवेश निधि के तहत दस-दस हजार का ऋण स्वीकृत हुआ और फिर उन्होंने नारी-शक्ति पेपर प्रोडक्ट्स के नाम से अपना खुद का रोजगार शुरू किया। उनके समूह ने फाइल कवर और कागज के लिफाफे बनाने शुरू किए।
आरती और रिंकू ने बताया कि शुरुआत में लिफाफे और फाइल बनाकर इन्हें बाजार में बेचने के लिए मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों के मदद से इन्हें बाजार भी उपलब्ध हो गया। आज समूह की महिलाएं दो से पांच हजार रुपये हर महीने कमा रही हैं।
आजीविका मिशन अधिकारी अवधेश ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से जारी सभी निर्देशों का पालन किया जा रहा है। गोरखपुर जिले में 13,299, महराजगंज में 5,778, कुशीनगर में 3,731 और देवरिया में 10,579 स्वयं सहायता समूह कार्य कर रहे हैं। कोशिश यह है कि समूह सहायता के जरिये लोगों को प्रशिक्षण देने के साथ ही उनको व्यवसाय शुरू कराने के लिए ऋण भी दिलाया जाए। इसके लिए एसबीआई खुद प्रशिक्षण दिलाने का कार्य गीडा में कर रहा है। उससे जो भी सहायता समूह प्रशिक्षण के बाद निकलते हैं, विभाग उनकी पूरी मदद करता है।
आरती और रिंकू ने बताया कि शुरुआत में लिफाफे और फाइल बनाकर इन्हें बाजार में बेचने के लिए मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन बैंक अधिकारियों और अन्य लोगों के मदद से इन्हें बाजार भी उपलब्ध हो गया। आज समूह की महिलाएं दो से पांच हजार रुपये हर महीने कमा रही हैं।
आजीविका मिशन अधिकारी अवधेश ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से जारी सभी निर्देशों का पालन किया जा रहा है। गोरखपुर जिले में 13,299, महराजगंज में 5,778, कुशीनगर में 3,731 और देवरिया में 10,579 स्वयं सहायता समूह कार्य कर रहे हैं। कोशिश यह है कि समूह सहायता के जरिये लोगों को प्रशिक्षण देने के साथ ही उनको व्यवसाय शुरू कराने के लिए ऋण भी दिलाया जाए। इसके लिए एसबीआई खुद प्रशिक्षण दिलाने का कार्य गीडा में कर रहा है। उससे जो भी सहायता समूह प्रशिक्षण के बाद निकलते हैं, विभाग उनकी पूरी मदद करता है।