गोरखपुर की सरजमीं पर भी पड़े थे प्रभु राम के पांव, माता सीता ने यहां किया था विश्राम
- बड़हलगंज के लेटाघाट और विश्रामघाट पर प्रभु राम और माता सीता ने किया था विश्राम
- पर्यटन विभाग ने सुंदरीकरण का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा
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अयोध्या में राममंदिर का निर्माण शुरू होने के साथ ही गोरखपुर को रामायण सर्किट से जोड़ने की उम्मीदों को बल मिला है। जानकारों की मानें तो बड़हलगंज के लेटाघाट और विश्राम घाट में प्रभु राम सीता से विवाह के लिए जनकपुर जाने और आने के दौरान विश्राम को रुके थे।
इन दोनों ही घाटों का जिक्र अयोध्या शोध संस्थान की किताब में भी मौजूद है। जिसके बाद से पर्यटन विभाग ने सरयू किनारे स्थित इन दोनों ही घाटों को रामायण सर्किट से जोड़ने का प्रस्ताव शासन को भेजा है।
रामायण सर्किट के लिए केंद्र सरकार की ओर से 223 करोड़ रूपये का बजट आवंटित किया गया है। ये सर्किट देश के 15 शहरों से होकर गुजरेगा। इस फेहरिस्त में गोरखपुर का भी नाम शामिल हो सकता है। इससे जहां पर्यटन के विकास को बढ़ावा मिलेगा, वहीं रोजगार की संभावनाएं भी गोरखपुर के लोगों को मिल सकेंगी।
जोड़ा जाएगा रामायण सर्किट
पर्यटन अधिकारी रवींद्र मिश्रा ने बताया कि वर्ष-2019 में दिल्ली के अनाम शख्स ने पर्यटन मंत्री को पत्र लिखकर गोरखपुर से गुजरने वाली सरयू नदी के आसपास के इलाकों में प्रभु राम से जुड़ी आध्यात्मिक धरोहरों के होने की बात कही थी। साथ ही उन्हें रामायण सर्किट से जोड़ने का अनुरोध किया।
इसके बाद पर्यटन मंत्री ने मुख्यमंत्री से बात कर गोरखपुर में इसकी संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया। इस पर पर्यटन विभाग ने अयोध्या शोध संस्थान को पत्र लिखकर गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल में रामायण काल से जुड़ी धरोहरों की जानकारी मांगी गई थी।
अयोध्या शोध संस्थान की किताब में गोरखपुर के बड़हलगंज स्थित सरयू नदी के किनारे मौजूद लेटाघाट और विश्रामघाट पर प्रभु राम के आगमन और विश्राम की बात कही गई है। पर्यटन विभाग दोनों स्थलों का मुआयना भी कर चुका है।
कहां कहां से गुजरेगा रामायण सर्किट
क्या है रामायण सर्किट
बुद्ध सर्किट और कृष्ण सर्किट के तर्ज पर भगवान राम से जुड़े स्थलों को आकर्षक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने रामायण सर्किट विकसित करने की योजना बनाई है। इस योजना की घोषणा मई 2015 में केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा ने लखनऊ में की थी।
हालांकि प्रदेश की सपा सरकार में योजना को लेकर कोई तेजी नहीं दिखाई गई लेकिन जैसे ही भाजपा सरकार सत्ता में आई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर रामायण सर्किट को विकसित करने का कार्य तेज हो गया है।