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Exclusive: घर बसाने के साथ जिंदगी बचाने में मददगार बन रहीं महिला पुलिसकर्मी, इनका काम जानकर आप भी करेंगे गर्व

Fri, 09 Jul 2021 07:23 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 09 Jul 2021 07:23 PM IST
सार

रक्तदान, आपसी समझौता करा कर दिखा रहीं पुलिस का मानवीय पहलू। तीन दिन में पांच दंपतियों में सुलह कराकर फिर से किया एक साथ।

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Special story of lady policeman of Gorakhpur Reconciliation done in five couples in three days
गोरखपुर महिला पुलिस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महिला पुलिस कर्मी लोगों का घर बसाने के साथ उनकी जिंदगी बचाने में मददगार बन रही हैं। पुलिस के मानवीय पहलू से कई परिवारों की गृहस्थी बिखरने से बच गई। टूटने के कगार पर पहुंच चुके रिश्तों में फिर से जान आ गई। कुछ ऐसे भी थे जो जीवन से निराश हो चुके थे। ऐसे लोगों में उम्मीद और उत्साह भरने में इन पुलिसकर्मियों का अहम योगदान है। 
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कोरोना के इस दौर में जहां अपने भी साथ देने की बात सुनते ही मुंह फेर ले रहे हैं, वहां पुलिस सबकी मदद करने के लिए आगे आ रही है। रक्तदान कर कई लोगों को स्वस्थ करने में जहां मदद की, वहीं पर राशन, घर में अकेले रह रहे बुजुर्गों आदि तक दवा पहुंचाकर लोगों के मन में पुलिस की अलग छाप छोड़ी है। पुलिस अफसरों ने भी इसे खूब सराहा है। एडीजी अखिल कुमार हों या एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु, ऐसे बेहतर काम करने वाले पुलिसकर्मियों का वे हौसला बढ़ाते रहे हैं।
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जानकारी के मुताबिक, एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने पुलिस वालों को मानवीय होने की नसीहत दी थी। कुछ ऐसा करने को कहा कि पुलिसकर्मी खुद भी संतुष्ट हों और उन्हें अच्छा लगे। उनके इस संदेश का असर जिले की पुलिस पर सकारात्मक रूप में देखने को मिला। पुलिस ने कई बुजुर्गों का हाल जानने से लेकर उन्हें दवाएं, भोजन और अन्य जरूरतों का सामान घर तक पहुंचाया। जिस किसी को कोरोना कर्फ्यू में साधन नहीं मिला, उन्हें अपने गाड़ी से समय से उनके गंतव्य तक पहुंचाने में सहयोग किया।  
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महिला थाना पुलिस ने की नई पहल

महिला थाना की पुलिस ने पिछले तीन दिनों में नई पहल की है। ऐसा नहीं है कि यह पहले नहीं होता था लेकिन इस ओर पुलिस इतना ध्यान नहीं देती थी। अब इंस्पेक्टर अर्चना सिंह खुद पहल कर दंपती के विवाद को सुलह समझौते की मदद से सुलझाकर घरों को बसाने का काम कर रही हैं। पिछले तीन दिन में इस तरह के पांच मामले सामने आ चुके हैं। महिला पुलिस ने दोनों परिवारों को समझाया और इसमें सफल होने पर कई दंपती को राजी खुशी घर भेजा। वे सभी फिर से अपनी नई जिंदगी शुरू कर लिए हैं जो पहले अलग होने की ठान चुके थे।
 
सोशल मीडिया की सूचना पर पहुंचाई मदद
इस पूरे कोरोना काल में सोशल मीडिया ने अहम भूमिका निभाई है। मदद के लिए लोगों ने सोशल मीडिया का रुख अख्तियार किया। मदद मांगी तो पुलिस वाले भी पहुंचे और पल भर में बिना भटके उनकी वांछित जरूरतें पूरी हो गई। रक्तदान, जरूरत की वस्तुएं जैसे अन्य काम पुलिसकर्मियों ने सोशल मीडिया की जानकारी होने पर संबंधित शख्स तक पहुंचाया है।
 
एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने बताया कि पुलिस वाले लोगों की मदद के लिए आगे रहते हैं। ऐसा करने से निश्चित तौर पर पुलिस के प्रति लोगों की सोच भी बदली है। बेहतर काम करने वाले पुलिस वालों को प्रोत्साहित भी किया जाता है।

केस एक

गीडा इलाके के एक दंपती की शादी 9 साल पहले हुई थी। करीब तीन साल से छोटी सी बात पर पति-पत्नी में खटपट शुरू हो गई थी। दोनों ने तलाक लेने का फैसला कर लिया। पत्नी ने महिला थाने में कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र भी दे दिया। मगर पुलिस ने पहल की। पति को बुलाया, कानूनी दांव-पेंच समझाया। पति-पत्नी और परिवार के लोगों को आमने-सामने करने के बाद पुलिस को सफलता मिल गई। बृहस्पतिवार को दोनों ही एक हो गए। दंपती साथ में फिर से नई जिंदगी शुरू करने को राजी होकर थाने से गए।

केस दो
जंगल डुमरी निवासी व इंडियन बैंक में फील्ड आफिसर की पत्नी को 25 मई को बच्ची हुई थी। खून की जरूरत पड़ी। परेशान पिता ने ऑनलाइन मदद मांगी। सोशल मीडिया पर मदद मांगते ही शाहपुर के पीआरवी 0321 में तैनात बस कमांडर यशपाल यादव वहां पर पहुंच गए। बच्ची को रक्तदान करने की इच्छा जताई। उन्हें देखते ही पिता भी खुश हो गए और फिर डॉक्टर के जांच के बाद पुलिसकर्मी ने रक्तदान कर बच्ची को स्वस्थ करने में योगदान दिया। कई अन्य पुलिस वाले भी इस तरह का काम कर चुके हैं।

केस तीन
वाराणसी के सिगरा निवासी चेतन उपाध्याय गोरखपुर आए थे। 19 अप्रैल को कोरोना कर्फ्यू होने की वजह से उन्हें कोई सवारी नहीं मिल पा रहा था। शाहपुर इलाके के आरोग्य मंदिर में रुके चेतन के पिता की तबीयत खराब थी और उन्हें वाराणसी जाना बेहद जरूरी था। ट्रेन तक पहुंचने के लिए कोई गाड़ी न मिलने पर उन्होंने पुलिस से मदद मांगी। पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गई और फिर अपनी पीआवी से चेतन को रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया। समय से पहुंचने की वजह से वह वाराणसी जा पाए।

केस चार
दो मई को कोतवाली इलाके में एक व्यापारी के घर काम करने वाली महिला की मौत हो गई। उसकी अंत्येष्टि करने को कोई तैयार नहीं था। घरवाले शव के करीब भी नहीं जाना चाह रहे थे। ऐसे में इसकी सूचना किसी ने एडीजी को दी। एडीजी ने एसएसपी को निर्देश दिया जिसके बाद कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। नगर निगम की मदद से सैनिटाइज करा कर कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराते हुए पुलिस ने महिला के शव को दाह संस्कार के लिए राजघाट पहुंचाया और अंत्येष्टि कराई।
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