फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   special story of Bell to find time inside jail at gorakhpur

जेल की 'पगली घंटी' बजते ही हो जाती है अनहोनी की आशंका, जानिए क्या इसका का राज

Sat, 12 Dec 2020 01:36 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 12 Dec 2020 01:36 PM IST
विज्ञापन
special story of Bell to find time inside jail at gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
टन टन टन टन लगातार जेल से गूंजती आवाज, इसका मतलब होता है कि जेल की पगली घंटी बज गई। एक दो नहीं जेल परिसर का यह घंटा लगातार पचास बार बजता है। बजते ही जेल के अंदर अनहोनी की आशंका का डर जेल अधिकारियों और कर्मियों के चेहरे पर छा जाता है। जेल मैन्युल के अनुसार इस घंटे को पचासा घंटा भी कहा जाता है। हर घंटे का अलग-अलग मतलब होता है। जेल की यह परंपरा कोई नई नहीं है। सौ वर्ष से भी पुरानी है जेल की यह परंपरा।
विज्ञापन


जेल परिसर के अंदर घड़ी नहीं होती है। शायद अभी तक पाठक को इसका अंदाजा नहीं होगा। मुख्य द्वार पर लगे घंटे की आवाज से ही उन्हें समय जानना होता है। इस विधा से अनपढ़ भी समय जान लेता है कि कितना बजा है। जितनी बार घंटा बजता है उसी हिसाब से समय का अंदाजा लगा लिया जाता है। इसी तरह बजता है पचासा, इसमें जेल का घंटा लगातार पचास बार बजता है। इसमें यह संदेश छुपा होता है कि जेल की बैरक खुल चुका है।
विज्ञापन


इसी का हिस्सा होती है पगली घंटी। इसके बजने का मतलब होता है कि जेल के अंदर कोई अनहोनी हो गई है। इसके बजते ही सभी जेलकर्मी यह जान लेते हैं कि जेल में कुछ गड़बड़ है। पगली घंटी बजते ही अफरा-तफरी का माहौल हो जाता है। सभी कर्मचारी जेल की ओर रुख करते हैं मानों कोई अदृश्य ताकत उन्हें जेल की तरफ खींच रही है। जेलकर्मी ड्यूटी पर हों या न हों, अविलंब जेल पर पहुंचना अनिवायज्ञ होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पचासा घंटी के बजने का मतलब

जेल से बाहर जमानत पर निकले एक कैदी ने जेल की इस घंटी के बारे में जानकारी दी। बताया कि नियम है कि पचासा सुबह और शाम दो बार बजाया जाए। शाम के पचासा का मतलब होता है कि जेल की बैरक बंद हो चुकी हैं। पहले जेल अधीक्षक के आगमन पर भी पचासा बजाया जाता था। इससे बंदी जान लेते थे कि जेल अधीक्षक का आगमन हो चुका है। इसी तरह शाम को तिकड़ी घंटी का भी प्रावधान है तिकड़ी का मतलब होता है एक साथ तीन बार घंटे का बजना। इसका तात्पर्य यह कि जेल बंदी भोजन कर अपनी-अपनी बैरकों में हैं, जेल सकुशल है।

जेल मैन्युल का नहीं होता पालन
जेल मैन्युल के अनुसार अंदर पचासा घंटी बजाना ही नियम है। हत्या के मामले में जमानत पर बाहर आए एक सूत्र ने बताया कि जेल में इन मैन्युअलों का पालन नहीं होता। नियम है कि जेल की सभी गतिविधियों का संदेश घंटा बजाकर ही देना होता है। लेकिन वर्तमान में सभी बैरकों में घड़ियां लगी हैं। नियमतः परिसर के अंदर घड़ी, कपड़ा सूखने वाली रस्सी, कील, समेत अन्य कोई भी बाहरी सामान नहीं रखना प्रतिबंधित होता है। लेकिन लगभग सभी बैरकों में इन घड़ियों को लगाया गया है। कपड़े सूखने के लिए रस्सी भी बंधी मिलती है।
 
गोरखपुर जेल अधिक्षक रामधनी ने बताया कि पचासा घंटी बजाने का नियम अभी भी जेल में है। लेकिन नमाज पढ़ने में इस घंटी के बजने से व्यवधान न पड़े इसलिए घड़ियां लगी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed