गोरखपुर में कोरोना जांच के लिए चल रहे विशेष कैंप बंद, वजह जान लें
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में रोजाना पांच से छह हजार लोगों की कोरोना जांच पर जोर दे रहे, जिला प्रशासन ने शहर के विशेष कोरोना जांच शिविरों को बंद कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि विशेष जांच शिविर में लिए जाने वाले नमूनों में पॉजिटिव केसों की संख्या काफी कम हो गई थी, जिसकी वजह से शिविर नहीं लगाने का निर्णय किया गया। अब जोर स्मार्ट सैंपलिंग पर रहेगा। इसमें अलग-अलग कारोबार से जुड़े लोगों की जांच होगी।
जिले में कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए शुरू में जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों सहित कुछ अन्य स्थानों पर जांच की व्यवस्था थी, मगर लोग जांच कराने से कतरा रहे थे। इसके बाद प्रशासन की ओर से शहरी क्षेत्र में सप्ताह में छह दिन 22 स्थानों पर निशुल्क जांच शिविर लगने लगा। इसका असर दिखाई पड़ा। घर या कार्य क्षेत्र से नजदीक सुविधा मिलने पर लोग कोरोना जांच कराने के लिए आगे आने लगे।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल के नेतृत्व में राजस्व एवं स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर लोगों को जांच कराने के लिए प्रोत्साहित किया। शुरू में उन स्थानों पर शिविर लगाए गए, जहां से कोरोना के अधिक मामले निकल रहे थे। सरकार की ओर से होम आइसोलेशन की सुविधा मान्य किए जाने के बाद लोग जांच कराने में रुचि लेने लगे।
पॉजिटिव केस का औसत पहले 40 तो अब दो फीसदी
जिला प्रशासन के मुताबिक शिविर में लिए जाने वाले सैंपलों में पॉजिटिव केसों का औसत शुरूआत में 35 से 40 फीसदी तक रहा। जो अब डेढ़ से दो फीसदी रह गया, जो प्रदेश के औसत से भी कम है।
चरगांवा और फोरेंसिक लैब में 24 घंटे जांच की सुविधा
चरगांवा और फोरेंसिक लैब में संचालित केंद्र में अब भी 24 घंटे कोरोना की जांच कराई जा सकेगी। इसके अलावा, जिनकी उम्र अधिक होगी, किसी बीमारी से पीड़ित होंगे या जिनमें लक्षण होगा, उनकी सैंपलिंग की जाएगी। इससे जांच किट का सदुपयोग हो सकेगा। जिला अस्पताल में आने वाले ऐसे मरीज जिन्हें बुखार होगा, उनकी कोरोना जांच कराई जाएगी। इसके अलावा अभियान चलाकर अलग-अलग दिन आटो चालकों व दुकानदारों की जांच होगी।
सीडीओ इंद्रजीत सिंह ने बताया कि शहरी क्षेत्र में जांच शिविर बंद कर दिए गए हैं। इन शिविरों में पाजिटिव केस का औसत काफी कम हो गया था, जिसकी वजह से यह निर्णय लिया गया। शहर के दो स्थानों पर 24 घंटे जांच की सुविधा है। स्मार्ट सैंपलिंग पर जोर दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सीएचसी व पीएचसी पर जांच कराई जा सकती है।