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युवतियों पर छींटाकशी मामला: पुलिस ने की होती कार्रवाई तो कलश यात्रा के दौरान न भड़कता बवाल

Mon, 24 Apr 2023 10:21 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 24 Apr 2023 10:21 AM IST
सार

रविवार को दिन में करीब दो बजे अमर उजाला की टीम गांव के मीरगंज टोला पहुंची तो वहां सन्नाटा पसरा था। यज्ञ स्थल के पास लगे टेंट और अन्य सामान उतारे जा रहे थे। वहां पर कुछ ग्रामीण भी बैठे थे। आपस में बातचीत में सिर्फ एक ही मुद्दे पर चर्चा हो रही थी, कि आखिर कलश विसर्जन में खलल डालने की कोशिश क्यों की गई।

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Slashing case on girls ruckus during Kalash Yatra in Gorakhpur
मीरगंज की घटना में हाथ में लाठी डंडा लिए युवकों का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर जिले में पिपराइच के जंगल छत्रधारी गांव के मीरगंज टोले में कलश यात्रा के दौरान मारपीट और पथराव की घटना में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते 17 अप्रैल को यज्ञ शुरू होने के दौरान आरोपियों ने गांव की बच्चियों पर छींटाकशी की थी।

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मामला पुलिस तक भी पहुंचा था, लेकिन पुलिस ने तहरीर के इंतजार में कोई कार्रवाई नहीं की। इससे आरोपियों का मनोबल बढ़ गया। 21 अप्रैल को भव्य कलश यात्रा में करीब एक हजार लोग मौजूद थे। कानून-व्यवस्था को बरकारार रखने के लिए पुलिस को कार्यक्रम की सूचना भी दी गई थी, लेकिन मौके पर किसी पुलिस वाले की ड्यूटी नहीं लगी और छेड़खानी का विरोध करने पर युवकों ने मारपीट और पथराव किया। इसके बाद भी पुलिस ने आरोपियों का सिर्फ शांतिभंग में चालान कर छोड़ दिया।
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रविवार को दिन में करीब दो बजे अमर उजाला की टीम गांव के मीरगंज टोला पहुंची तो वहां सन्नाटा पसरा था। यज्ञ स्थल के पास लगे टेंट और अन्य सामान उतारे जा रहे थे। वहां पर कुछ ग्रामीण भी बैठे थे। आपस में बातचीत में सिर्फ एक ही मुद्दे पर चर्चा हो रही थी, कि आखिर कलश विसर्जन में खलल डालने की कोशिश क्यों की गई। सबका यही कहना था कि पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, जिस वजह से घटना हो गई।

गांव के इंद्रजीत ने कहा- 17 अप्रैल को छींटाकशी के बाद पुलिस ने कार्रवाई की होती तो 21 अप्रैल को शोहदों की हिम्मत न होती की वह मारपीट करते। विवाद के बाद पुलिस आई थी, लेकिन तहरीर के इंतजार में कुछ नहीं किया और घटना हो गई। घटना वाले दिन पुलिस चौकी 300 मीटर पर न होती तो अनहोनी हो जाती।

आरोप- पुलिस ने की लापरवाही

गांव के राकेश उर्फ गोविंद चौहान बताते हैं- भइया, 17 अप्रैल को ही घटना की शुरुआत हो गई थी। गांव की बच्चियां यज्ञ स्थल पर परिक्रमा कर रही थीं। इस दौरान ही बगल के गांव का राकेश कुछ साथियों संग पहुंचा था। वह बच्चियों को घूर रहा था तो मैंने पूछा क्या बात है, कोई आप के घर का आया है, तो उसने कहा नहीं? फिर इस तरह से देखने के सवाल पर उसने जवाब दिया कि सब मेरी...हैं। इसके बाद गोविंद से राकेश उलझ गया। मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप किया और तब पुलिस भी आई थी।

दोनों पक्षों ने समझौता कर लिया, लेकिन पुलिस तहरीर के इंतजार में बैठी रही। आयोजकों ने भी गांव का मामला मानते हुए बात को वहीं खत्म मान लिया। बृजेश चौहान बताते हैं, 21 अप्रैल को कलश विसर्जन का कार्यक्रम तय समय पर हुआ। यज्ञ स्थल से कलश लेकर बच्चियां, महिलाएं व गांव के अन्य लोग निकले।

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रास्ते में ही महाराणा प्रताप कृषि इंटर कॉलेज के पास स्थित आटा चक्की पर मनबढ़ युवक खड़े थे। लाठी-डंडा देखते ही समझ गया कि विवाद कर सकते हैं, मैंने हाथ जोड़कर समझाने की कोशिश की, लेकिन तभी आरोपी छेड़खानी करने लगे और विरोध करने पर हमलावर हो गए, फिर ईंट चलाने लगे। भाई इंद्रजीत घटना का वीडियो बनाने लगा तो उस पर भी ईंट से हमला किया गया।

दिनेश चौहान बताते हैं, अचानक महिलाएं चिल्लाने लगीं। बोल रही थीं। भागो-भागे मारपीट हो गई है। इसके बाद अफरा-तफरी मच गई। फिर पुलिस को सूचना दी गई। पास में जंगल छत्रधारी चौकी होने की वजह से पुलिस आ गई और एक युवक पकड़ लिया गया, लेकिन अन्य आरोपी फरार हो गए। पुलिस ने केस दर्ज कर कार्रवाई की, लेकिन सबको पछतावा हो रहा है कि गांव में ऐसा क्यों हो गया?

ग्रुप बनाकर करते हैं गुंडई

मनबढ़ों ने माफिया ग्रुप बनाया है। सोशल मीडिया पर वह फोटो भी इसी ग्रुप के नाम से शेयर करते हैं और आए दिन मारपीट की घटनाएं करते हैं। 17 अप्रैल को विवाद के बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। फिर छेड़खानी करने और विरोध करने पर इस तरह से मारपीट करने लगे कि लग रहा था कि मार ही डालेंगे।- राकेश उर्फ गोविंद चौहान।

रात में आती थी पुलिस, उस दिन नहीं थी
आयोजन में रोजाना गांव की महिलाएं और बड़े-बुजुर्ग एकत्र होते थे, लेकिन पुलिस कलश विसर्जन वाले दिन नहीं थी। जबकि, जिस दिन विवाद हुआ था, उस दिन पुलिस थी और रोजाना रात में दो पुलिस वाले आते भी थे। पुलिस रहती तो शायद यह घटना नहीं होती।- शंभू प्रजापति

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कार्यक्रम की अनुमति भी ली गई थी

कार्यक्रम की अनुमति के लिए पत्राचार भी किया गया था। थाने पर भी सूचना थी कि कार्यक्रम होना है, लेकिन इसके बाद भी पुलिस उस दिन नहीं थी। मैंने युवकों से कई बार मिन्नत भी की। समझाया कि छेड़खानी और विवाद ना करें, क्यों मारपीट करना चाहते हो, लेकिन घटना हो गई।- बृजेश चौहान, आयोजक

कभी इस तरह की घटना नहीं हुई
पिता अनिरुद्ध चौहान पिछले 35 साल से रामलीला का आयोजन कराते हैं। कभी इस तरह की घटना नहीं हुई। भाई को कैंसर हो गया था। उनके लिए ही मन्नत थी, जिसका आयोजन किया गया था। गांव में सब कुुछ शांति से हो रहा था। कलश विसर्जन में भी डीजे या अन्य कुछ नहीं था, फिर भी घटना हो गई। - इंद्रजीत चौहान




 
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