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यूपी के पहले जटायु प्रजनन केंद्र में रखे जाएंगे छह जोड़े गिद्ध, इनकी निगरानी के लिए पैरों में लगाई जाएगी चिप

Fri, 09 Oct 2020 04:15 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 09 Oct 2020 04:15 PM IST
सार

  • अगले साल मई में आस पास के इलाकों से लाएं जाएंगे 6 जोड़े गिद्ध
  • जटायु प्रजनन केंद्र में रखें जाएंगे, इनके पैरों में लगाए जाएंगे सेटेलाइट

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Six pairs of vultures will be kept in UP first Vulture Conservation Center maharajganj
जीपीएस लगा गिद्ध। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उत्तर प्रदेश के वन प्रभाग फरेंदा (महाराजगंज) के भारीवैसी गांव के जटायु संरक्षण केंद्र में छह जोड़े वयस्क गिद्ध रखे जाएंगे। इनकी उड़ान पर निगरानी बनाए रखने के लिए इनके पैरों में सेटेलाइट चिप लगाए जाएंगे। बता दें कि जटायु संरक्षण केंद्र का शिलान्यास बुधवार को सीएम योगी ने किया था।

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डीएफओ अविनाश कुमार ने बताया कि वयस्क गिद्धों को केंद्र में लाकर रखा जाएगा। इससे प्रजनन दर में बढ़ोत्तरी होगी। सभी गिद्धों के पैरों में सेटेलाइट की टैगिंग की जाएगी। इससे उनकी निगरानी की जा सकेगी। कहां तक उड़कर जाने की उनकी क्षमता है इसका आंकलन भी किया जा सकेगा।
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डीएफओ ने बताया कि दरअसल गांवों में लोग गाय भैंस से अधिक दूध निकालने के लिए उन्हें दवाएं खिला देते हैं। इन्हीं में से अगर किसी जानवर की मौत होती जाती है तो उसके अंदर दवा का रसायन वैसे ही बना रहता है। गिद्ध अपने भोजन के लिए इनका आहार करते हैं तो उनके लिए रसायन जहर का काम करता है ऐसे में उनकी मौत भी हो सकती है। इससे गिद्धों की संख्या कम होने लगी है।
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उन्होंने बताया कि गिद्धों को केंद्र में लाए जाने के पहले और बाद में ग्रामीणों से इस दवा के प्रयोग पर मनाही की जाएगी। 15 साल में 40 जोड़े गिद्ध तैयार कराए जाने का लक्ष्य है।

जटायु केंद्र में होंगी यह सुविधाएं

जटायु संरक्षण व प्रजनन केंद्र में फ्रीजर रूम, पोस्टमार्टम रूम, प्रशासनिक परिसर, खाद्य प्रसंस्करण कक्ष, रक्षक कक्ष, चौकीदार कक्ष बनाए जाएंगे। साथ ही क्लोज सर्किट कैमरे से गिद्धों के संरक्षण और प्रजनन की मॉनिटरिंग की जा सकेगी।

पांच एकड़ में करेंगे केंद्र का निर्माण
फरेंदा के भारीवैसी गांव में पांच एकड़ में जटायु केंद्र का निर्माण कराया जाएगा। 15 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण किया जाएगा। पहले चरण में 85 लाख रुपये अनुमोदित कर दिए गए हैं। यह प्रदेश का पहला जटायु संरक्षण केंद्र होगा।
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