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Exclusive: गोरखपुर में रेलवे की बेशकीमती जमीन पर बन गई दुकान व इमारतें, जानिए कैसे पकड़ में आया मामला
Sun, 12 Sep 2021 01:51 PM IST
vivek shukla
राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 12 Sep 2021 01:51 PM IST
सार
धर्मशाला अंडरपास तिराहे से तरंग ओवरब्रिज तक 300 मीटर तक है कब्जा। रेल प्रशासन पैमाइश कराने की तैयारी में, जिला प्रशासन से मांगा सहयोग।
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धर्मशाला अंडरपास से पहले लगा रेलवे का बोर्ड।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर शहर में रेलवे की बेशकीमती जमीन पर दुकान व इमारतें बना दी गई हैं। धर्मशाला अंडरपास तिराहे से तरंग ओवरब्रिज तक करीब 300 मीटर की लंबाई में जमीनों पर कब्जा हुआ है। मामला सामने आने पर अब रेल प्रशासन जमीन की पैमाइश (मापी) कराने की तैयारी में है। इसके लिए जिला प्रशासन से भी सहयोग मांगा गया है। दरअसल, धर्मशाला अंडरपास के पहले तिराहे पर रेलवे ने सीमांकन के संबंध में एक बोर्ड भी लगा रखा है, लेकिन उसके आगे फोरलेन सड़क और नाला बन गया है। उस जगह से सीमांकन अब गायब है। रेलवे ने प्रारंभिक जांच-पड़ताल में पाया है कि तिराहे से करीब 300 मीटर लंबाई में जमीन पर कब्जा हुआ है।
फोरलेन सड़क ही नहीं नाला भी रेलवे की जमीन में बनाया गया है। उसके बाद बहुत सारी दुकानें व मकान बन गए हैं। कुछ मकानों की बाउंड्री बढ़ाकर बनाई गई है। इन सभी जगहों पर रेलवे के सीमांकन को उखाड़ दिया गया है। लिहाजा अब देखकर अनुमान लगाना मुश्किल है कि कितनी जमीन पर किसने कब्जा किया है। इसे लेकर अब नए सिरे से पैमाइश होगी और रेलवे अपना पत्थर लगाएगा। अतिक्रमण वाले हिस्से को भी खाली कराने की योजना बनी है।
ऐसे पकड़ में आया मामला
बीते माह रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। पाया गया कि जमीन रेलवे की है। लिहाजा निर्माण कार्य रुकवा दिया गया। इसके बाद जब आगे पैमाइश की गई तो करीब 300 मीटर लंबाई तक रेलवे की जमीन पर कब्जा का मामला सामने आया। रेलवे ने कब्जा करने वालों की सूची बनानी शुरू कर दी है।
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जल्द हो सकती है कार्रवाई
रेलवे प्रशासन के मुताबिक जमीन पर अतिक्रमण हटाने को लेकर जल्द ही कार्रवाई हो सकती है। इसके लिए रेलवे ने जिला प्रशासन से तो सहयोग मांगा ही है, आरपीएफ भी मौजूद रहेगी।
गोरखपुर क्षेत्र पूर्वोत्तर रेलवे के उप मुख्य अभियंता रवींद्र मेहरा ने बताया कि धर्मशाला अंडरपास से तरंग ओवरब्रिज की ओर तक रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण का मामला प्रकाश में आया है। कई जगहों पर सीमांकन भी हटा दिया गया है। इसकी पैमाइश कराकर अतिक्रमण को हटाया जाएगा। इसे लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला प्रशासन से भी सहयोग मांगा गया है।
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फोरलेन सड़क ही नहीं नाला भी रेलवे की जमीन में बनाया गया है। उसके बाद बहुत सारी दुकानें व मकान बन गए हैं। कुछ मकानों की बाउंड्री बढ़ाकर बनाई गई है। इन सभी जगहों पर रेलवे के सीमांकन को उखाड़ दिया गया है। लिहाजा अब देखकर अनुमान लगाना मुश्किल है कि कितनी जमीन पर किसने कब्जा किया है। इसे लेकर अब नए सिरे से पैमाइश होगी और रेलवे अपना पत्थर लगाएगा। अतिक्रमण वाले हिस्से को भी खाली कराने की योजना बनी है।
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ऐसे पकड़ में आया मामला
बीते माह रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। पाया गया कि जमीन रेलवे की है। लिहाजा निर्माण कार्य रुकवा दिया गया। इसके बाद जब आगे पैमाइश की गई तो करीब 300 मीटर लंबाई तक रेलवे की जमीन पर कब्जा का मामला सामने आया। रेलवे ने कब्जा करने वालों की सूची बनानी शुरू कर दी है।
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जल्द हो सकती है कार्रवाई
रेलवे प्रशासन के मुताबिक जमीन पर अतिक्रमण हटाने को लेकर जल्द ही कार्रवाई हो सकती है। इसके लिए रेलवे ने जिला प्रशासन से तो सहयोग मांगा ही है, आरपीएफ भी मौजूद रहेगी।
गोरखपुर क्षेत्र पूर्वोत्तर रेलवे के उप मुख्य अभियंता रवींद्र मेहरा ने बताया कि धर्मशाला अंडरपास से तरंग ओवरब्रिज की ओर तक रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण का मामला प्रकाश में आया है। कई जगहों पर सीमांकन भी हटा दिया गया है। इसकी पैमाइश कराकर अतिक्रमण को हटाया जाएगा। इसे लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला प्रशासन से भी सहयोग मांगा गया है।