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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   shiv temple Bhadeshvar nath special story for sawan 2023

Sawan 2023: इस मंदिर में रावण ने की थी शिवलिंग की स्थापना, शिवपुराण में मिलता है उल्लेख

Thu, 13 Jul 2023 12:25 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती।
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती। Published by: vivek shukla Updated Thu, 13 Jul 2023 12:25 PM IST
सार

मंदिर के पुजारी शिवकुमार गिरी ने बताया कि लगभग दो सौ साल पूर्व बस्ती राजा शिकार खेलने जब यहां आए तो उनकी नजर इस शिवलिंग पर पड़ी। यहां भोलेनाथ को इस हालत में देख वे आहत हुए और फिर उस शिवलिंग की पूजा अर्चना कर यहां मंदिर स्थापित करा दिया।

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shiv temple Bhadeshvar nath special story for sawan 2023
Basti shiv temple - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वशिष्ठ मुनि की तपोभूमि के मुख्यालय से पांच किमी की दूरी पर कुआनो नदी के किनारे पौराणिक भदेश्वरनाथ मंदिर स्थित है। शिव पुराण में भद्र नाम से इसे उल्लेखित किया गया है। किवदंती है कि रावण ने यहां शिवलिंग की स्थापना करने के पश्चात वंदना की थी।

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इसका उल्लेख शिवपुराण में मिलता है। इसके बाद कई वर्षों तक यह स्थल जंगलों के बीच छिपा रहा। कहते हैं कि लोग यहां आते-जाते जरूर थे, मगर इस मंदिर के संबंध में किसी को कोई जानकारी नहीं थी।
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shiv temple Bhadeshvar nath special story for sawan 2023
Basti shiv temple - फोटो : अमर उजाला।

मंदिर के पुजारी शिवकुमार गिरी ने बताया कि लगभग दो सौ साल पूर्व बस्ती राजा शिकार खेलने जब यहां आए तो उनकी नजर इस शिवलिंग पर पड़ी। यहां भोलेनाथ को इस हालत में देख वे आहत हुए और फिर उस शिवलिंग की पूजा अर्चना कर यहां मंदिर स्थापित करा दिया।

 

shiv temple Bhadeshvar nath special story for sawan 2023
Basti shiv temple - फोटो : अमर उजाला।

भदेश्वरनाथ ग्राम निवासी रविन्द्र गिरी ने बताया कि मंदिर के निर्माण के कुछ वर्ष बाद यहां कुछ चोरों ने शिवलिंग को चुराने की कोशिश की थी। शिवलिंग को 50 फिट तक खोदा किन्तु तब भी इस शिवलिंग का अंतिम सिरा नहीं पा सके।

 

shiv temple Bhadeshvar nath special story for sawan 2023
Basti shiv temple - फोटो : अमर उजाला।

कहते हैं कि इस बीच बादल छा गए और बिजली कड़कने लगी। इसके बाद यहां चोरी कर रहे लोगों पर बिजली गिर गई, जिससे उनकी मौत हो गई। जिस बैलगाड़ी से वे चोरी कर शिवलिंग ले जाना चाहते थे वह भी पत्थर का हो गया, जो आज भी मंदिर की दाईं ओर स्थित है।

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